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पुल टूटा और 40 साल पीछे पहुंच गये बुलहा वाले
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रानीपुर (बहराइच)। हुुजूरपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बुलहा में नहर पर 1981-82 में बना पुल तीन साल पहले टूट गया था। इसके चलते ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुल टूटने से सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों व महिलाओं को उठानी पड़ रही है। पुल के उस पार स्कूल जाने के लिए बच्चों को गर्मी, जाड़ा व बरसात झेलते हुए डेढ़ किलोमीटर लंबी पदयात्रा करनी पड़ती है। राशन की दुकान भी नहर के उस पार है। इस वजह से राशन लेने के लिए महिलाओं को दो किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यहां के लोगों का कहना है, लगता है कि हम लोग 40 साल पहले की स्थिति में पहुंच गये हैं।
ग्राम पंचायत बुलहा की आबादी लगभग 3500 है। गांव के बीच से नहर गुजरी है जिससे गांव दो भागों में बंट जाता है। गांव वालों को समस्या न हो इसके मद्देनजर 1981-82 में नहर पर पुल का निर्माण करवाया गया था। इसी पुल के जरिए ग्रामीण नहर पार करते थे। कुछ वर्ष पूर्व पुल जर्जर होकर क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद दुर्घटना की आशंका के चलते नहर विभाग ने पुल पर भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया था। ग्रामीण पैदल, साइकिल व दो पहिया वाहनों से गुजरते रहे, लेकिन 2019 में विभाग ने पुल पर बैरिकेडिंग लगाकर आवागमन पूरी तरह रोक दिया। इसके बाद भी लोग बैरिकेडिंग फांदकर आते-जाते रहे। जनवरी, 2022 में नहर विभाग ने पुल ध्वस्त कर दिया। इसके बाद से विभाग की ओर से पुल बनाने की कोई पहल नहीं की गई। पुल टूटने से गांव की आबादी पिछले तीन साल से दिक्कत का सामना कर रही है।
बुलहा गांव की सरकारी राशन की दुकान, स्कूल व स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए बनी टंकी नहर के उस पार है। पुल टूटने से पानी की पाइप लाइन भी बाधित हो गई। इस वजह से लोगों को शुद्ध पेयजल भी नहीं मिल पा रहा है। बच्चों को भी स्कूल जाने के लिए काफी पैदल चलना पड़ता है।
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पुल टूटने से उस पार रहने वाले अधिकांश बच्चे विद्यालय से नदारद रहते हैं। शिक्षा के लिए बच्चों को बहुत प्रेरित किया जाता है लेकिन डेढ़ किलोमीटर पैदल चलने की समस्या के चलते वे विद्यालय का रुख नहीं करते हैं।
- ऋषभ बाजपेई, प्रभारी प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय
गांव के लगभग 60 प्रतिशत कार्डधारक गांव के उस पार रहते हैं। इसके चलते उन्हें राशन लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर महिलाओं को परेशानियां होती हैं। महिलाओं को सिर पर राशन लादकर लगभग डेढ़ किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है।
- प्रेमपाल मौर्या, कोटेदार
नहर का पुल टूटने की वजह से ग्रामवासियों को बहुत परेशानियां होती है। खासकर बच्चों को स्कूल जाने में और महिलाओं को राशन लाने में। वहीं, पुल टूटने से टंकी से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति भी ठप हो गई है। सरकार को चाहिए कि ग्रामीणों की समस्या दूर करे।
रियाजुद्दीन सिद्दीकी, ग्रामीण
कॉलेज जाने के लिए यही एकमात्र रास्ता है। पुल टूटने से काफी दिक्कत है। बरसात के दिनों में कॉलेज जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। शासन-प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द पुल का निर्माण करवाएं।
- शिवेंद्र सिंह, छात्र
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ग्राम पंचायत बुलहा की आबादी लगभग 3500 है। गांव के बीच से नहर गुजरी है जिससे गांव दो भागों में बंट जाता है। गांव वालों को समस्या न हो इसके मद्देनजर 1981-82 में नहर पर पुल का निर्माण करवाया गया था। इसी पुल के जरिए ग्रामीण नहर पार करते थे। कुछ वर्ष पूर्व पुल जर्जर होकर क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद दुर्घटना की आशंका के चलते नहर विभाग ने पुल पर भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया था। ग्रामीण पैदल, साइकिल व दो पहिया वाहनों से गुजरते रहे, लेकिन 2019 में विभाग ने पुल पर बैरिकेडिंग लगाकर आवागमन पूरी तरह रोक दिया। इसके बाद भी लोग बैरिकेडिंग फांदकर आते-जाते रहे। जनवरी, 2022 में नहर विभाग ने पुल ध्वस्त कर दिया। इसके बाद से विभाग की ओर से पुल बनाने की कोई पहल नहीं की गई। पुल टूटने से गांव की आबादी पिछले तीन साल से दिक्कत का सामना कर रही है।
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बुलहा गांव की सरकारी राशन की दुकान, स्कूल व स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए बनी टंकी नहर के उस पार है। पुल टूटने से पानी की पाइप लाइन भी बाधित हो गई। इस वजह से लोगों को शुद्ध पेयजल भी नहीं मिल पा रहा है। बच्चों को भी स्कूल जाने के लिए काफी पैदल चलना पड़ता है।
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पुल टूटने से उस पार रहने वाले अधिकांश बच्चे विद्यालय से नदारद रहते हैं। शिक्षा के लिए बच्चों को बहुत प्रेरित किया जाता है लेकिन डेढ़ किलोमीटर पैदल चलने की समस्या के चलते वे विद्यालय का रुख नहीं करते हैं।
- ऋषभ बाजपेई, प्रभारी प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय
गांव के लगभग 60 प्रतिशत कार्डधारक गांव के उस पार रहते हैं। इसके चलते उन्हें राशन लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर महिलाओं को परेशानियां होती हैं। महिलाओं को सिर पर राशन लादकर लगभग डेढ़ किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है।
- प्रेमपाल मौर्या, कोटेदार
नहर का पुल टूटने की वजह से ग्रामवासियों को बहुत परेशानियां होती है। खासकर बच्चों को स्कूल जाने में और महिलाओं को राशन लाने में। वहीं, पुल टूटने से टंकी से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति भी ठप हो गई है। सरकार को चाहिए कि ग्रामीणों की समस्या दूर करे।
रियाजुद्दीन सिद्दीकी, ग्रामीण
कॉलेज जाने के लिए यही एकमात्र रास्ता है। पुल टूटने से काफी दिक्कत है। बरसात के दिनों में कॉलेज जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। शासन-प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द पुल का निर्माण करवाएं।
- शिवेंद्र सिंह, छात्र