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कोर्ट में चल रहा मामला फिर दे दी तैनाती
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बहराइच। मिहींपुरवा विकास खंड क्षेत्र के मनुगौढ़िया में नौ लाख रुपये लागत के सड़क घोटाले के आरोपी अवर अभियंता को हुक्मरानों ने फिर से उसी विकास खंड में तैनाती दे दी है। यही नहीं आरोपी को मिहींपुरवा के अलावा बलहा विकास खंड और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग का विभागीय चार्ज भी दे दिया गया है। ऐसी स्थिति में बीजेपी के जिला कार्यसमिति सदस्य ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर सवाल उठाए हैं।
गौरतलब हो कि मनुगौढ़िया में 1018 में क्षेत्र पंचायत निधि से सड़क निर्माण का मामला प्रकाश में आया था। सड़क बनी ही नहीं थी और भुगतान कर दिया गया था। मामले में उच्चाधिकारियों ने जांच कराई तो जेई विवेक वर्मा का दोष सामने आया था। जेई के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई थी। कोई कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ताओं ने न्यायालय में शरण ली थी। अभी यह मामला न्यायालय में विचाराधीन ही था कि ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता ने विवेक वर्मा को उसी स्थान पर फिर तैनाती दे दी है। उसकी तैनाती के बाद बीजेपी कार्यकर्ता शिव कुमार शुक्ला सहित अन्य ग्रामीणों ने अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि शासनादेश में भी स्पष्ट है कि तीन वर्ष से अधिक किसी अफसर की तैनाती नहीं हो सकती, लेकिन चार वर्ष यहां बिताने के बाद फिर से विवेक वर्मा को यहां पर तैनाती दे दी गई है।
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गौरतलब हो कि मनुगौढ़िया में 1018 में क्षेत्र पंचायत निधि से सड़क निर्माण का मामला प्रकाश में आया था। सड़क बनी ही नहीं थी और भुगतान कर दिया गया था। मामले में उच्चाधिकारियों ने जांच कराई तो जेई विवेक वर्मा का दोष सामने आया था। जेई के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई थी। कोई कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ताओं ने न्यायालय में शरण ली थी। अभी यह मामला न्यायालय में विचाराधीन ही था कि ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता ने विवेक वर्मा को उसी स्थान पर फिर तैनाती दे दी है। उसकी तैनाती के बाद बीजेपी कार्यकर्ता शिव कुमार शुक्ला सहित अन्य ग्रामीणों ने अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि शासनादेश में भी स्पष्ट है कि तीन वर्ष से अधिक किसी अफसर की तैनाती नहीं हो सकती, लेकिन चार वर्ष यहां बिताने के बाद फिर से विवेक वर्मा को यहां पर तैनाती दे दी गई है।
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