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संस्कृति की अज्ञानता से हिंदुओं का हो रहा धर्मांतरण
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बहराइच। संस्कृति की अज्ञानता से हिंदुओं का भारी संख्या में धर्मांतरण हुआ। साथ ही जातीय घृणा से उनकी एकता भी छिन्न-भिन्न होती चली गई। कांग्रेस के 65 वर्षों के शासन में वही हुआ जो अंग्रेजी शासनकाल में होता आया था। ये बातें जगदगुरु परमहंसाचार्य महाराज ने छावनी बाजार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि जब देश का विभाजन हुआ तब पाकिस्तान के तत्कालीन नेताओं ने अपने देश को इस्लामिक देश के रूप में स्थापित कर लिया था। दुर्भाग्य से भारत का नेतृत्व ऐसे हाथों में था जिन्होंने भारतीय बहुसंख्यक की भावनाओं की अनदेखी की और देश हिंदू राष्ट्र होने से वंचित रह गया। महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भारत के हिंदू राष्ट्र घोषित होने तक संघर्षरत रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी राष्ट्र अपनी भाषा पढ़ते, लिखते व बोलते हैं, लेकिन हमारे देश में अंग्रेजी भाषा क्यों फल-फूल रही है।
हमारे देश के विभिन्न अंचलों में कई तरह के व्रत व पूजा का रिवाज रहा है। यह मात्र व्रत व पूजा नहीं है बल्कि हमारे देश का रक्षा कवच है। अंग्रेजी शिक्षा हमारे इस कवच को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री द्वारा लागू की गई नई शिक्षा नीति की सराहना की। इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि जब देश का विभाजन हुआ तब पाकिस्तान के तत्कालीन नेताओं ने अपने देश को इस्लामिक देश के रूप में स्थापित कर लिया था। दुर्भाग्य से भारत का नेतृत्व ऐसे हाथों में था जिन्होंने भारतीय बहुसंख्यक की भावनाओं की अनदेखी की और देश हिंदू राष्ट्र होने से वंचित रह गया। महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भारत के हिंदू राष्ट्र घोषित होने तक संघर्षरत रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी राष्ट्र अपनी भाषा पढ़ते, लिखते व बोलते हैं, लेकिन हमारे देश में अंग्रेजी भाषा क्यों फल-फूल रही है।
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हमारे देश के विभिन्न अंचलों में कई तरह के व्रत व पूजा का रिवाज रहा है। यह मात्र व्रत व पूजा नहीं है बल्कि हमारे देश का रक्षा कवच है। अंग्रेजी शिक्षा हमारे इस कवच को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री द्वारा लागू की गई नई शिक्षा नीति की सराहना की। इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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