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कानून पास होने के बाद भी सीमा पर बंद है आवागमन
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रुपईडीहा (बहराइच)। कोरोना संक्रमण को देखते हुए नेपाल और भारत के बीच लगभग डेढ़ वर्ष से आवागमन बंद है। ऐसे में भारत के विभिन्न राज्यों में काम कर रहे नेपाली नागरिक प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार की संख्या में पैदल सीमा पार करने को विवश हैं। नेपाल संसद में सीमा खोलने के लिए बिल बारित होने के बाद भी आवागमन बहाल न होने से दोनों देश के नागरिकों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 2020 के मार्च माह में कोरोना संक्रमण को लेकर भारत-नेपाल सीमा पर आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। तब से नेपाल और भारतीय प्रशासन की ओर से नेपाल सीमा पर वाहनों का प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। सिर्फ आवश्यक वस्तुओं का वाहन ही रुपईडीहा बार्डर से नेपाल को प्रवेश दिया जा रहा है। इससे नेपाली नागरिकों के साथ भारतीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मालूम हो कि हिंदू देश नेपाल में अक्तूबर माह से दीपावली, भाईदूज समेत अन्य त्योहार पड़ रहे हैं। जिसमें शामिल होने के लिए काफी संख्या में नेपाली रुपईडीहा सीमा से पैदल नेपाल सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। जहां पर एसएसबी की ओर से इनकी जांच की जाती है।
इसके बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। ज्ञात हो कि नेपाल सरकार ने संसद में सभी भारतीय मार्ग से आवागमन बहाल करने के लिए बिल भी पारित कर दिया था। इसके बावजूद अभी तक आवागमन बहाल नहीं हो सका है। जिससे दैनिक यात्रियों के साथ प्रदेश में रहने वाले लोग परेशान हैं। नेपाल के जमुनहा चेक पोस्ट के उपनिरीक्षक पूर्ण बहादुर खत्री ने बताया कि वाहनों का प्रवेश बंद होने से लोग पैदल ही आवागमन करते हैं।
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भारत के हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मुंबई, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा समेत अन्य प्रांत में काफी संख्या में नेपाली नागरिक काम करते हैं। लेकिन पर्व शुरू होने के चलते अभी से सभी अपने घर को वापस हो रहे हैं। चेक पोस्ट के उपनिरीक्षक पूर्ण बहादुर खत्री ने बताया कि प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार नेपाली नागरिक भारतीय सीमा से नेपाल क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं।
नेपाल राष्ट्र के लुंबिनी, डांग, सूर्खेत, जाजरकोट, जुमला, हुमला, बर्दिया, कैलाली, करनाली, बांके समेत अन्य क्षेत्रों से नेपाली नागरिक रोजी रोटी रोटी के लिए भारत के विभिन्न प्रदेशों में जाते हैं। त्योहार आने पर सभी वापस अपने घर को लौटने लगते हैं।
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वर्ष 2020 के मार्च माह में कोरोना संक्रमण को लेकर भारत-नेपाल सीमा पर आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। तब से नेपाल और भारतीय प्रशासन की ओर से नेपाल सीमा पर वाहनों का प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। सिर्फ आवश्यक वस्तुओं का वाहन ही रुपईडीहा बार्डर से नेपाल को प्रवेश दिया जा रहा है। इससे नेपाली नागरिकों के साथ भारतीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मालूम हो कि हिंदू देश नेपाल में अक्तूबर माह से दीपावली, भाईदूज समेत अन्य त्योहार पड़ रहे हैं। जिसमें शामिल होने के लिए काफी संख्या में नेपाली रुपईडीहा सीमा से पैदल नेपाल सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। जहां पर एसएसबी की ओर से इनकी जांच की जाती है।
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इसके बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। ज्ञात हो कि नेपाल सरकार ने संसद में सभी भारतीय मार्ग से आवागमन बहाल करने के लिए बिल भी पारित कर दिया था। इसके बावजूद अभी तक आवागमन बहाल नहीं हो सका है। जिससे दैनिक यात्रियों के साथ प्रदेश में रहने वाले लोग परेशान हैं। नेपाल के जमुनहा चेक पोस्ट के उपनिरीक्षक पूर्ण बहादुर खत्री ने बताया कि वाहनों का प्रवेश बंद होने से लोग पैदल ही आवागमन करते हैं।
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भारत के हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मुंबई, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा समेत अन्य प्रांत में काफी संख्या में नेपाली नागरिक काम करते हैं। लेकिन पर्व शुरू होने के चलते अभी से सभी अपने घर को वापस हो रहे हैं। चेक पोस्ट के उपनिरीक्षक पूर्ण बहादुर खत्री ने बताया कि प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार नेपाली नागरिक भारतीय सीमा से नेपाल क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं।
नेपाल राष्ट्र के लुंबिनी, डांग, सूर्खेत, जाजरकोट, जुमला, हुमला, बर्दिया, कैलाली, करनाली, बांके समेत अन्य क्षेत्रों से नेपाली नागरिक रोजी रोटी रोटी के लिए भारत के विभिन्न प्रदेशों में जाते हैं। त्योहार आने पर सभी वापस अपने घर को लौटने लगते हैं।