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जरूरत 55 लाख क्विंटल गन्ने की, आपूर्ति हो पा रही 32 लाख क्विंटल
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बहराइच। सिम्भावली शुगर्स लिमिटेड की चिलवरिया चीनी मिल को हर साल करीब 55 लाख क्विंटल गन्ने की जरुरत होती है। मगर उसे 32 लाख क्विंटल की ही आपूर्ति हो पा रही है। ऐसे में मिल चलने पर संशय बढ़ने लगा है। नवंबर से नए पेराई सत्र न शुरू हो पाने पर किसानों के बकाया 95 करोड़ रुपये मिलने पर भी असमंजस के हालात बन गए हैं।
यूपी सरकार ने इस बार चीनी मिलों का पेराई सत्र अक्तूबर माह से ही शुरु करने का फैसला लिया है। जिले की सबसे बड़ी चीनी मिल सिम्भावली शुगर्स लिमिटेड चिलवरिया की इकाई को शुरु करने पर संशय के हालात बनते जा रहे हैं। मिल प्रबंधन का कहना है कि लगातार गन्ना क्षेत्रफल घटता चला जा रहा है। चीनी मिल के क्रय केंद्रों को काटकर बजाज, पारले, कुंदरखी, बलरामपुर को आवंटित कर दिया जा रहा है। मिल को पूरी क्षमता से चलाने के लिए करीब 55 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति की जरुरत होती है। मगर सत्र 2020-21 में महज 32.83 लाख क्विंटल गन्ने की ही आपूर्ति हो सक्री।
इस बार भी कुछ केंद्र काट दिए गए हैं। जिससे मिल को गन्ना ही नहीं मिल सकेगा। ऐसे में मिल को चलाने पर संशय के हालात बनते जा रहे हैं। मिल प्रबंधन ने डीएम और डीसीओ को पत्र भेजकर क्रय केंद्र के आवंटन की संख्या बढ़ाए जाने की जरुरत बताई है। अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों के बकाया 95 करोड़ रुपये को दिलाने और मिल के गन्ना आपूर्ति पर किस रणनीति के तहत काम करता है।
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चिलवरिया चीनी मिल पर करीब 114 करोड़ रुपया पेराई सत्र 2019-20 का बकाया था। उसका 95 फीसदी भुगतान करने के साथ सत्र 2020-21 का भी बकाया भुगतान शुरु कर दिया गया है। मगर गन्ने की कम आपूर्ति होने से समस्या आ रही है।
पीएन सिंह, मुख्य महाप्रबंधक, चीनी मिल
चिलवरिया चीनी मिल पर किसानों का काफी पैसा बकाया है। उसे दिलाना प्राथमिकता है। मिल के केंद्र काटे जाने की बात गलत है। अगर समस्या है तो उस पर बात की जा रही है। जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।
- शैलेष मौर्या, डीसीओ, बहराइच
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यूपी सरकार ने इस बार चीनी मिलों का पेराई सत्र अक्तूबर माह से ही शुरु करने का फैसला लिया है। जिले की सबसे बड़ी चीनी मिल सिम्भावली शुगर्स लिमिटेड चिलवरिया की इकाई को शुरु करने पर संशय के हालात बनते जा रहे हैं। मिल प्रबंधन का कहना है कि लगातार गन्ना क्षेत्रफल घटता चला जा रहा है। चीनी मिल के क्रय केंद्रों को काटकर बजाज, पारले, कुंदरखी, बलरामपुर को आवंटित कर दिया जा रहा है। मिल को पूरी क्षमता से चलाने के लिए करीब 55 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति की जरुरत होती है। मगर सत्र 2020-21 में महज 32.83 लाख क्विंटल गन्ने की ही आपूर्ति हो सक्री।
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इस बार भी कुछ केंद्र काट दिए गए हैं। जिससे मिल को गन्ना ही नहीं मिल सकेगा। ऐसे में मिल को चलाने पर संशय के हालात बनते जा रहे हैं। मिल प्रबंधन ने डीएम और डीसीओ को पत्र भेजकर क्रय केंद्र के आवंटन की संख्या बढ़ाए जाने की जरुरत बताई है। अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों के बकाया 95 करोड़ रुपये को दिलाने और मिल के गन्ना आपूर्ति पर किस रणनीति के तहत काम करता है।
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चिलवरिया चीनी मिल पर करीब 114 करोड़ रुपया पेराई सत्र 2019-20 का बकाया था। उसका 95 फीसदी भुगतान करने के साथ सत्र 2020-21 का भी बकाया भुगतान शुरु कर दिया गया है। मगर गन्ने की कम आपूर्ति होने से समस्या आ रही है।
पीएन सिंह, मुख्य महाप्रबंधक, चीनी मिल
चिलवरिया चीनी मिल पर किसानों का काफी पैसा बकाया है। उसे दिलाना प्राथमिकता है। मिल के केंद्र काटे जाने की बात गलत है। अगर समस्या है तो उस पर बात की जा रही है। जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।
- शैलेष मौर्या, डीसीओ, बहराइच