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25 गांवों में अब भी भरा है बाढ़ का पानी, लोग परेशान
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महसी (बहराइच)। महसी में नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार को कम हो गया, लेकिन अब भी 25 गांव में पानी से घिरे हैं। वहीं, मिहींपुरवा और कैसरगंज के गांवों में भी पानी भरा हुआ है। बाढ़ के बावजूद ग्रामीणों को बाहर निकालने के लिए तहसील प्रशासन की ओर से नाव तक नहीं उपलब्ध कराई गई है। खाने के लाले पड़े हैं। बाढ़ चौकी भी अभी तक संचालित नहीं हो रही है। वहीं 3.39 लाख क्यूसेक पानी तीन बैराजों से छोड़ा गया है। कैसरगंज में एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
महसी में सरयू नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। कुछ गांवों से बाढ़ का पानी घट गया है। नदी का जलस्तर छह सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। लेकिन अभी भी तहसील क्षेत्र के 25 गांवों में पानी भरा हुआ है। ग्राम पंचायत पचदेवरी के मजरा चमरही व मंगलपुरवा गांव में पानी अधिक भरा हुआ है। यहां लोगों का जीवन नरकीय बीत रहा है। इसके अलावा घुरेहरीपुर, तुरंतीपुरवा, बरुहा, मांझा दरिया बुर्द, छत्तरपुरवा, भौंरी समेत अन्य गांव में पानी भरा होने के कारण लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए विवश हैं। उनके बाहर निकलने के लिए तहसील प्रशासन की ओर से न तो नाव लगाई गई है और न ही अन्य कोई सुविधा दी जा रही है। बाढ़ चौकियां भी संचालित नहीं हो रही हैं।
लोगों को लंच पैकेट तक नहीं मिल रहा है। जिससे बाढ़ पीड़ितों को खाने के लाले पड़े हैं। कुछ यही हाल मिहींपुरवा विकास खंड और कैसरगंज के गांवों का है। विकास खंड के पांच पूरी तरह से जलमग्न हैं। ग्रामीण सुरक्षित स्थान की तलाश में लगे हुए हैं। लेकिन तहसील प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की पूरी तरह से उपेक्षा की जा रही है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शोभित कुशवाहा ने बताया कि महसी में नदी का जलस्तर छह सेंटीमीटर घटा है। जबकि कैसरगंज में नदी खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। अधिशासी अभियंता शोभित कुशवाहा ने बताया कि मिहींपुरवा के तीन बैराज से तीन लाख 39 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इनमें गिरिजापुरी, बनबसा और गोपिया बैराज शामिल हैं।
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महसी में सरयू नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। कुछ गांवों से बाढ़ का पानी घट गया है। नदी का जलस्तर छह सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। लेकिन अभी भी तहसील क्षेत्र के 25 गांवों में पानी भरा हुआ है। ग्राम पंचायत पचदेवरी के मजरा चमरही व मंगलपुरवा गांव में पानी अधिक भरा हुआ है। यहां लोगों का जीवन नरकीय बीत रहा है। इसके अलावा घुरेहरीपुर, तुरंतीपुरवा, बरुहा, मांझा दरिया बुर्द, छत्तरपुरवा, भौंरी समेत अन्य गांव में पानी भरा होने के कारण लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए विवश हैं। उनके बाहर निकलने के लिए तहसील प्रशासन की ओर से न तो नाव लगाई गई है और न ही अन्य कोई सुविधा दी जा रही है। बाढ़ चौकियां भी संचालित नहीं हो रही हैं।
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लोगों को लंच पैकेट तक नहीं मिल रहा है। जिससे बाढ़ पीड़ितों को खाने के लाले पड़े हैं। कुछ यही हाल मिहींपुरवा विकास खंड और कैसरगंज के गांवों का है। विकास खंड के पांच पूरी तरह से जलमग्न हैं। ग्रामीण सुरक्षित स्थान की तलाश में लगे हुए हैं। लेकिन तहसील प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की पूरी तरह से उपेक्षा की जा रही है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शोभित कुशवाहा ने बताया कि महसी में नदी का जलस्तर छह सेंटीमीटर घटा है। जबकि कैसरगंज में नदी खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। अधिशासी अभियंता शोभित कुशवाहा ने बताया कि मिहींपुरवा के तीन बैराज से तीन लाख 39 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इनमें गिरिजापुरी, बनबसा और गोपिया बैराज शामिल हैं।
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