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40 करोड़ के ठेके में न्यूनतम दर का प्रस्ताव 'एल-1' किया खारिज
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लखनऊ। श्रावस्ती में पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों का एक बड़ा खेल सामने आया है। 40 करोड़ रुपये लागत की एक सड़क के ठेके में आया न्यूनतम दर का प्रस्ताव 'एल-1' गुपचुप ढंग से अस्वीकार कर दिया गया। इतना ही नहीं पूरी टेंडर प्रक्रिया रद्द करके नए सिरे से टेंडर आमंत्रित कर लिए। मामला खुलने पर शासन ने बहराइच सर्किल के अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार और श्रावस्ती के अधिशासी अभियंता सर्वेश कुमार को आरोपपत्र दे दिए हैं।
कुछ समय पहले श्रावस्ती में बहराइच-ककदरी राजमार्ग (एसएच-156) के निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इसकी कुल अनुमानित लागत 40 करोड़ रुपये आंकी गई। राजमार्ग के इस हिस्से की कुल लंबाई करीब 17 किलोमीटर है। इसे पेव्ड शोल्डर के साथ दो लेन चौड़ा बनाया जाना है।
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, कुल 6 फर्मों ने सड़क निर्माण के लिए निविदाएं डालीं। टेक्निकल बिड के बाद फाइनेंशियल बिड भी खोल दी गईं। सबसे कम दर एल-1 और उससे ज्यादा रेट देने वाली एल-2 फर्म की दर में 5 करोड़ रुपये का अंतर निकला। नियमानुसार, एल-1 फर्म को तत्काल कार्य आवंटित कर देना चाहिए। लेकिन, बहराइच और श्रावस्ती के इंजीनियरों ने ऐसा नहीं किया।
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बताते हैं कि एल-1 आए रेट पीडब्ल्यूडी की निर्धारित दरों से कम था। इसके बावजूद टेंडर प्रक्रिया रद्द करके नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए गए। मामला शासन तक पहुंचा तो पीडब्ल्यूडी मुख्यालय भी हरकत में आया। पीडब्ल्यूडी विभागाध्यक्ष पीके सक्सेना ने बताया कि ऐसा क्यों किया गया, इसके लिए अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता के लिए कर्मचारी अनुशासन नियमावली के नियम-7 के तहत आरोप पत्र भेजे गए हैं। यहां बता दें कि नियम-7 के तहत कठोर दंड का प्रावधान भी है। इस पर शासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। कई अन्य इंजीनियरों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
टेंडर प्रक्रिया में शिकायत मिलने पर संबंधित अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को हमने आरोप पत्र दिए हैं। उनका जवाब मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।- नितिन रमेश गोकर्ण, प्रमुख सचिव, पीडब्ल्यूडी
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कुछ समय पहले श्रावस्ती में बहराइच-ककदरी राजमार्ग (एसएच-156) के निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इसकी कुल अनुमानित लागत 40 करोड़ रुपये आंकी गई। राजमार्ग के इस हिस्से की कुल लंबाई करीब 17 किलोमीटर है। इसे पेव्ड शोल्डर के साथ दो लेन चौड़ा बनाया जाना है।
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पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, कुल 6 फर्मों ने सड़क निर्माण के लिए निविदाएं डालीं। टेक्निकल बिड के बाद फाइनेंशियल बिड भी खोल दी गईं। सबसे कम दर एल-1 और उससे ज्यादा रेट देने वाली एल-2 फर्म की दर में 5 करोड़ रुपये का अंतर निकला। नियमानुसार, एल-1 फर्म को तत्काल कार्य आवंटित कर देना चाहिए। लेकिन, बहराइच और श्रावस्ती के इंजीनियरों ने ऐसा नहीं किया।
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बताते हैं कि एल-1 आए रेट पीडब्ल्यूडी की निर्धारित दरों से कम था। इसके बावजूद टेंडर प्रक्रिया रद्द करके नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए गए। मामला शासन तक पहुंचा तो पीडब्ल्यूडी मुख्यालय भी हरकत में आया। पीडब्ल्यूडी विभागाध्यक्ष पीके सक्सेना ने बताया कि ऐसा क्यों किया गया, इसके लिए अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता के लिए कर्मचारी अनुशासन नियमावली के नियम-7 के तहत आरोप पत्र भेजे गए हैं। यहां बता दें कि नियम-7 के तहत कठोर दंड का प्रावधान भी है। इस पर शासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। कई अन्य इंजीनियरों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
टेंडर प्रक्रिया में शिकायत मिलने पर संबंधित अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को हमने आरोप पत्र दिए हैं। उनका जवाब मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।- नितिन रमेश गोकर्ण, प्रमुख सचिव, पीडब्ल्यूडी