{"_id":"60be922a8ebc3e7a86424eb2","slug":"bahraich-bahraich-news-lko581432186","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोकतंत्र सेनानी का देहांत, किसानों का मसीहा बन बुलंद करते थे आवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकतंत्र सेनानी का देहांत, किसानों का मसीहा बन बुलंद करते थे आवाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहराइच। इमरजेंसी से लेकर अब तक राजनीति में सक्रिय रहने वाले किसानों के हितैषी वरिष्ठ किसान व भाजपा में संरक्षक की भूमिका निभाने वाले लोकतंत्र सेनानी हनुमान शर्मा का देहांत हो गया। उनके देहांत की खबर सुनने के बाद कोई भी अपने आप को रोक न सका। हर कोई अंतिम दर्शन के लिए घर से लेकर शमशानघाट तक पहुंचता रहा। लोकतंत्र सेनानी का गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सभी की आंखें नम रही। लोकतंत्र सेनानी को किसानों का मसीहा भी कहा जाता था।
देहात कोतवाली क्षेत्र के रंजीतपुर गांव निवासी 83 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी हनुमान प्रसाद शर्मा का जन्म सात जनवरी 1938 मेें हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जिले से ही हुई थी। होश संभालने के बाद वह लोगों की समस्याओं को उजागर करने के लिए हमेशा से अपने सिर पर बीड़ा उठाए रहते थे। इसी कारण उनपर डीआईआर व मीसा लगाया गया था। जिसके कारण उनको 18 महीने तक जेल में रहना पड़ा था। बलराज मधोप, दीनदयाल उपाध्याय, अटलबिहारी बाजपेयी के साथ जनसंघ पार्टी के दौरान लोकतंत्र सेनानी काफी सक्रिय रहे। जनसंघ पार्टी का नाम बदलने के बाद वह कुछ दिन के लिए राजनीति से दूर हो गए थे, लेकिन किसानों व आमजनमानस की समस्या को देखकर वह कुछ ही माह बाद फिर से सक्रिय हो गए थे।
वह जिले में भी पशु क्रूरता के खिलाफ, जल संरक्षण, किसानों को वैज्ञानिक खेती करने के लिए प्रेरित करते रहे। चार दिन पहले वह अपना रूटीन चेकअप कराने के लिए लखनऊ के मेदांता गए थे। वहां पर हार्टअटैक आने के कारण उनकी तबियत खराब होती चली गई और रविवार की देर रात उनका देहांत हो गया। वह अपने पीछे तीन बेटे व एक बेटी को छोड़ गए हैं। एक बेटा महाराष्ट्र में आईएएस के पद पर तैनात है। रंजीतपुर गांव में ही एसडीएम सदर सौरभ गंगवार की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
विज्ञापन
किसानों के खेतों में फसल बर्बाद कर रहे बेसहारा जानवरों का आतंक देखने के बाद प्रगतिशील किसान ने शासन को बैलों का बधियाकरण करने के लिए पत्र लिखा था। वह हर बैठक में किसानों की समस्या को बेबाकी से उठाते थे। किसानों के हक की लड़ाई में साथ रहते थे। इसलिए उन्हेें किसानों का मसीहा कहा जाता था।
पांच जुलाई 1975 को नानपारा से लोकतंत्र सेनानी हनुमान शर्मा की गिरफ्तारी हुई थी। उनके ऊपर आरोप लगाया गया था कि यह रेलवे की पटरी उखाड़ रहे थे। उस समय डीआईआर व मीसा लगाया गया। उनको बहराइच से गोरखपुर, बहराइच से लखनऊ, लखनऊ से बरेली, बरेली से आगरा, आगरा से लखनऊ व लखनऊ से अलीगढ़ जेल में स्थानांतरित किया जाता रहा।
विज्ञापन
देहात कोतवाली क्षेत्र के रंजीतपुर गांव निवासी 83 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी हनुमान प्रसाद शर्मा का जन्म सात जनवरी 1938 मेें हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जिले से ही हुई थी। होश संभालने के बाद वह लोगों की समस्याओं को उजागर करने के लिए हमेशा से अपने सिर पर बीड़ा उठाए रहते थे। इसी कारण उनपर डीआईआर व मीसा लगाया गया था। जिसके कारण उनको 18 महीने तक जेल में रहना पड़ा था। बलराज मधोप, दीनदयाल उपाध्याय, अटलबिहारी बाजपेयी के साथ जनसंघ पार्टी के दौरान लोकतंत्र सेनानी काफी सक्रिय रहे। जनसंघ पार्टी का नाम बदलने के बाद वह कुछ दिन के लिए राजनीति से दूर हो गए थे, लेकिन किसानों व आमजनमानस की समस्या को देखकर वह कुछ ही माह बाद फिर से सक्रिय हो गए थे।
विज्ञापन
वह जिले में भी पशु क्रूरता के खिलाफ, जल संरक्षण, किसानों को वैज्ञानिक खेती करने के लिए प्रेरित करते रहे। चार दिन पहले वह अपना रूटीन चेकअप कराने के लिए लखनऊ के मेदांता गए थे। वहां पर हार्टअटैक आने के कारण उनकी तबियत खराब होती चली गई और रविवार की देर रात उनका देहांत हो गया। वह अपने पीछे तीन बेटे व एक बेटी को छोड़ गए हैं। एक बेटा महाराष्ट्र में आईएएस के पद पर तैनात है। रंजीतपुर गांव में ही एसडीएम सदर सौरभ गंगवार की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
विज्ञापन
किसानों के खेतों में फसल बर्बाद कर रहे बेसहारा जानवरों का आतंक देखने के बाद प्रगतिशील किसान ने शासन को बैलों का बधियाकरण करने के लिए पत्र लिखा था। वह हर बैठक में किसानों की समस्या को बेबाकी से उठाते थे। किसानों के हक की लड़ाई में साथ रहते थे। इसलिए उन्हेें किसानों का मसीहा कहा जाता था।
पांच जुलाई 1975 को नानपारा से लोकतंत्र सेनानी हनुमान शर्मा की गिरफ्तारी हुई थी। उनके ऊपर आरोप लगाया गया था कि यह रेलवे की पटरी उखाड़ रहे थे। उस समय डीआईआर व मीसा लगाया गया। उनको बहराइच से गोरखपुर, बहराइच से लखनऊ, लखनऊ से बरेली, बरेली से आगरा, आगरा से लखनऊ व लखनऊ से अलीगढ़ जेल में स्थानांतरित किया जाता रहा।