{"_id":"c1c711294684c76eb2d1c01ecff19ed0","slug":"bad-effect-of-japani-inseflitis-on-73-children-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"73 मासूमों में आई ‘दिमागी’ कमजोरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
73 मासूमों में आई ‘दिमागी’ कमजोरी
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 23 Sep 2015 10:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहराइच। दिमागी बुखार से पीड़ित 73 बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो गए हैं। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में की है लेकिन महकमे के मुताबिक सिर्फ 31 बच्चे ही दिमागी बुखार से पीड़ित हैं।
ये बच्चे आने वाले दिनों में निशक्त भी हो सकते हैं। इन्हें बचाने के लिए स्वास्थ्य महकमे ने विशेष टीकाकरण अभियान चलाया। दावा है कि जिले के करीब सात लाख बच्चों को मेनिंगोकोकल मेनेनजाइटिस का टीका लगाया गया लेकिन निशक्तों की बढ़ती फौज दावों की पोल खोल रही है।
मध्य जून से सितंबर तक दिमागी बुखार का संक्रमण काल माना जाता है। लेकिन, इस स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने न तो फॉगिंग की कार्ययोजना बनाई न ही इससे निपटने के लिए इलाज का मुकम्मल इंतजाम किया गया।
विज्ञापन
नतीजन, सिर्फ अगस्त व सितंबर में ही 73 बच्चों को दिमागी बुखार ने अपने चपेट में ले लिया। शुरुआत में दिमागी बुखार के प्रकोप को स्वास्थ्य विभाग ने मानने से इंकार कर दिया लेकिन जब चिल्ड्रेन वार्ड में पीड़ितों की संख्या में अचानक इजाफा हो गया तो जांच कराने की जरूरत समझी गई।
पंद्रह दिन पहले लैब भेजे गए 46 सैंपल में से 31 बच्चों में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई। इससे स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। आनन-फानन में बीमार बच्चों व रोग की पुष्टि के आंकड़ों में सामंजस्य बैठाने के लिए 27 और नमूने लैब भेज दिए गए।
हालांकि अभी इन नमूनों के परिणाम प्राप्त नहीं हुए हैं। वहीं, 73 बच्चों की मनोदशा खराब है। डॉक्टरों का कहना है कि बीमार बच्चों की जुबान को आदेश देने वाले दिमाग में गड़बड़ी आ चुकी है। इस बात की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में भी की है। वहीं, 65 बच्चों में शारीरिक अपंगता भी दिखने लगी है।
वर्ष 2014 में अपंग हुए थे दस बच्चे
वर्ष 2014 में बहराइच में 28 बच्चे दिमागी बुखार की चपेट में आए थे। इनमें सात बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि 10 बच्चे दिमागी बुखार के चलते मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो गए थे लेकिन स्वास्थ्य विभाग को न तो इन बच्चों की मनोदशा पर तरस आया न ही इस साल दिमागी बुखार से निपटने के लिए कोई कार्ययोजना धरातल पर उतर सकी।
बच्चों के तंत्रिका तंत्र पर पड़ता असर
बहराइच में अभी तक दिमागी बुखार के में 73 केस सामने आए हैं लेकिन एलाइजा किट से हुई जांच से सिर्फ 31 रोगियों में जेई की पुष्टि हुई है। ऐसे बच्चों के दिमाग की झिल्ली में सूजन आ जाती है, जिससे तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है। ये बच्चे शारीरिक व मानसिक रूप से निशक्त भी हो सकते हैं। इसे ठीक नहीं किया जा सकता। दवाओं से सिर्फ मामूली राहत पहुंचाई जा सकती है।
-डॉ माहेश्वरी पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बहराइच
वैरीफिकेशन कराकर देंगे मुआवजा
दिमागी बुखार पीड़ित बच्चों का इलाज चल रहा है। इसके बाद भी यदि कोई बच्चा अपंग या उसकी मौत हो जाती है तो उसका वैरीफिकेशन किया जाएगा। इसके बाद पीड़ित परिवार को सरकार की तरफ से मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
- मुईन अहमद, सहायक मलेरिया अधिकारी
विज्ञापन
ये बच्चे आने वाले दिनों में निशक्त भी हो सकते हैं। इन्हें बचाने के लिए स्वास्थ्य महकमे ने विशेष टीकाकरण अभियान चलाया। दावा है कि जिले के करीब सात लाख बच्चों को मेनिंगोकोकल मेनेनजाइटिस का टीका लगाया गया लेकिन निशक्तों की बढ़ती फौज दावों की पोल खोल रही है।
विज्ञापन
मध्य जून से सितंबर तक दिमागी बुखार का संक्रमण काल माना जाता है। लेकिन, इस स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने न तो फॉगिंग की कार्ययोजना बनाई न ही इससे निपटने के लिए इलाज का मुकम्मल इंतजाम किया गया।
विज्ञापन
नतीजन, सिर्फ अगस्त व सितंबर में ही 73 बच्चों को दिमागी बुखार ने अपने चपेट में ले लिया। शुरुआत में दिमागी बुखार के प्रकोप को स्वास्थ्य विभाग ने मानने से इंकार कर दिया लेकिन जब चिल्ड्रेन वार्ड में पीड़ितों की संख्या में अचानक इजाफा हो गया तो जांच कराने की जरूरत समझी गई।
पंद्रह दिन पहले लैब भेजे गए 46 सैंपल में से 31 बच्चों में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई। इससे स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। आनन-फानन में बीमार बच्चों व रोग की पुष्टि के आंकड़ों में सामंजस्य बैठाने के लिए 27 और नमूने लैब भेज दिए गए।
हालांकि अभी इन नमूनों के परिणाम प्राप्त नहीं हुए हैं। वहीं, 73 बच्चों की मनोदशा खराब है। डॉक्टरों का कहना है कि बीमार बच्चों की जुबान को आदेश देने वाले दिमाग में गड़बड़ी आ चुकी है। इस बात की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में भी की है। वहीं, 65 बच्चों में शारीरिक अपंगता भी दिखने लगी है।
वर्ष 2014 में अपंग हुए थे दस बच्चे
वर्ष 2014 में बहराइच में 28 बच्चे दिमागी बुखार की चपेट में आए थे। इनमें सात बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि 10 बच्चे दिमागी बुखार के चलते मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो गए थे लेकिन स्वास्थ्य विभाग को न तो इन बच्चों की मनोदशा पर तरस आया न ही इस साल दिमागी बुखार से निपटने के लिए कोई कार्ययोजना धरातल पर उतर सकी।
बच्चों के तंत्रिका तंत्र पर पड़ता असर
बहराइच में अभी तक दिमागी बुखार के में 73 केस सामने आए हैं लेकिन एलाइजा किट से हुई जांच से सिर्फ 31 रोगियों में जेई की पुष्टि हुई है। ऐसे बच्चों के दिमाग की झिल्ली में सूजन आ जाती है, जिससे तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है। ये बच्चे शारीरिक व मानसिक रूप से निशक्त भी हो सकते हैं। इसे ठीक नहीं किया जा सकता। दवाओं से सिर्फ मामूली राहत पहुंचाई जा सकती है।
-डॉ माहेश्वरी पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बहराइच
वैरीफिकेशन कराकर देंगे मुआवजा
दिमागी बुखार पीड़ित बच्चों का इलाज चल रहा है। इसके बाद भी यदि कोई बच्चा अपंग या उसकी मौत हो जाती है तो उसका वैरीफिकेशन किया जाएगा। इसके बाद पीड़ित परिवार को सरकार की तरफ से मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
- मुईन अहमद, सहायक मलेरिया अधिकारी