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अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने फूंका चीन का झंडा
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बहराइच में शहीद उद्यान के बाहर चीन का पुतला फूंकते अखिल भारतीय साहित्य परिषद के पदाधिकारी।
- फोटो : BAHRAICH
बहराइच। श्रीराम जानकी मंदिर हमजापुरा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से चीन के विरुद्ध प्रदर्शन तथा वीर शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि समारोह पर विचार गोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसके बाद शहीद पार्क पर चीन का झंडा फूंकते हुए केंद्र सरकार से करारा जवाब दिए जाने की मांग की गई।
सभा की अध्यक्षता गुरुप्रसाद सिंह जायसवाल ने की तथा आर पंडित मशरिकी मुख्य अतिथि रहे। साहित्य परिषद के महामंत्री रमेश चंद्र तिवारी की वाणी वंदना के बाद गोष्ठी शुरू हुई। उन्होंने कविता पढ़ते हुए कहा, मानवता का दुश्मन चीन, होगा अब अस्तित्व विहीन। तमन्ना बहराइची ने रचना सुनाई, वतन की आन के खातिर दिया है जां शहीदों ने, ऐसे वीर सपूतों को बारंबार नमन मेरा। अर्पिता मिश्रा ने पढ़ा, इस काल की करवट रोक सके उस महाकाल को बुलाती हूं, अब तो पुकार सुन लो भगवन तुमको पुकार लगाती हूं। कवि सुरेश सैनिक ने पढ़ा, इधर बीजिंग उधर लश्कर लिए तलवार बैठे हैं, लिए हम शांति का परचम हृदय को मार बैठे हैं।
आशुतोष श्रीवास्तव ने पढ़ा, काल सिर पर क्यों नचाना चाहते हो, सब मिटाकर क्या बचाना चाहते हो। शिवकुमार सिंह रैकवार ने पढ़ा, अये रे धृष्ट चीन एक इंच भूमि भारत की हड़प न पैहौ छप्पन इंची सीने से, कई देहैं बीजिंग मुक्त जिंग पिंग कमीने से। राजेश मलिक ने, धरती की गोद पुस्तक से वीर शहीदों के संबंध में लघु कथा सुनाई। कार्यक्रम संयोजक गुलाब चंद्र जायसवाल ने पढ़ा, बलिदानी वीरों का अब बलिदान व्यर्थ न जाएगा , बूंद-बूंद उनके लहू का जन-जन में रंग लाएगा। सन बासठ की भूलों का अब भूल सुधार जरुरी है, सूत ब्याज के साथ चीन से मोदी मूल्य चुकाएगा। इनके अतिरिक्त रवि सिंह, शिवनाथ शिखर, राकेश दुबे, कुणाल आदि ने अपनी अपनी रचनाएं सुनाईं। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की बहराइच शाखा ने शहीद स्मारक पर चीन के राष्ट्रपति व उसके झंडे का पुतला फूंका।
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हिंद जागरण मंच के जिलाध्यक्ष धनंजय सिंह ने कहा कि चीनी यदि इस भूल में है कि भारत में अभी भी सफेद कबूतर उड़ाने वाले बैठे हैं तो वह स्वयं को अपडेट कर ले। गुरुप्रसाद सिंह जायसवाल ने कहा कि चीन हमारा प्राचीन शत्रु रहा है। इसकी ही चाल से आज भारत-नेपाल मैत्री को भी धक्का लगा है। सभी ने चीन के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर आयुष जायसवाल, वीरेंद्र जायसवाल, अरविंद शुक्ल, अश्वनी वर्मा, विवेक पाठक, अमित कश्यप आदि मौजूद रहे।
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सभा की अध्यक्षता गुरुप्रसाद सिंह जायसवाल ने की तथा आर पंडित मशरिकी मुख्य अतिथि रहे। साहित्य परिषद के महामंत्री रमेश चंद्र तिवारी की वाणी वंदना के बाद गोष्ठी शुरू हुई। उन्होंने कविता पढ़ते हुए कहा, मानवता का दुश्मन चीन, होगा अब अस्तित्व विहीन। तमन्ना बहराइची ने रचना सुनाई, वतन की आन के खातिर दिया है जां शहीदों ने, ऐसे वीर सपूतों को बारंबार नमन मेरा। अर्पिता मिश्रा ने पढ़ा, इस काल की करवट रोक सके उस महाकाल को बुलाती हूं, अब तो पुकार सुन लो भगवन तुमको पुकार लगाती हूं। कवि सुरेश सैनिक ने पढ़ा, इधर बीजिंग उधर लश्कर लिए तलवार बैठे हैं, लिए हम शांति का परचम हृदय को मार बैठे हैं।
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आशुतोष श्रीवास्तव ने पढ़ा, काल सिर पर क्यों नचाना चाहते हो, सब मिटाकर क्या बचाना चाहते हो। शिवकुमार सिंह रैकवार ने पढ़ा, अये रे धृष्ट चीन एक इंच भूमि भारत की हड़प न पैहौ छप्पन इंची सीने से, कई देहैं बीजिंग मुक्त जिंग पिंग कमीने से। राजेश मलिक ने, धरती की गोद पुस्तक से वीर शहीदों के संबंध में लघु कथा सुनाई। कार्यक्रम संयोजक गुलाब चंद्र जायसवाल ने पढ़ा, बलिदानी वीरों का अब बलिदान व्यर्थ न जाएगा , बूंद-बूंद उनके लहू का जन-जन में रंग लाएगा। सन बासठ की भूलों का अब भूल सुधार जरुरी है, सूत ब्याज के साथ चीन से मोदी मूल्य चुकाएगा। इनके अतिरिक्त रवि सिंह, शिवनाथ शिखर, राकेश दुबे, कुणाल आदि ने अपनी अपनी रचनाएं सुनाईं। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की बहराइच शाखा ने शहीद स्मारक पर चीन के राष्ट्रपति व उसके झंडे का पुतला फूंका।
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हिंद जागरण मंच के जिलाध्यक्ष धनंजय सिंह ने कहा कि चीनी यदि इस भूल में है कि भारत में अभी भी सफेद कबूतर उड़ाने वाले बैठे हैं तो वह स्वयं को अपडेट कर ले। गुरुप्रसाद सिंह जायसवाल ने कहा कि चीन हमारा प्राचीन शत्रु रहा है। इसकी ही चाल से आज भारत-नेपाल मैत्री को भी धक्का लगा है। सभी ने चीन के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर आयुष जायसवाल, वीरेंद्र जायसवाल, अरविंद शुक्ल, अश्वनी वर्मा, विवेक पाठक, अमित कश्यप आदि मौजूद रहे।