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Bahraich News: जहां कभी घर-आंगन, बगीचे और खेत थे, वहां अब बह रही मटमैले पानी की धारा

Thu, 28 Aug 2025 01:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Thu, 28 Aug 2025 01:26 AM IST
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A stream of muddy water flowing in the courtyard of the house
जानकीनगर में कटान से घर उजड़ जाने के बाद टेंट बनाकर बसर कर रहे ग्रामीण।   - स्रोत : ग्रामीण
बहराइच। महसी तहसील के जानकीनगर गांव में जहां कभी घर-आंगन, बगीचे और खेत थे, वहां अब मटमैले पानी की धारा बह रही है। नदी किनारे लोगों की भीड़ है, हाथ में गठरी, बर्तन, बिस्तर और कुछ कपड़े। आंखों के सामने अपना आशियाना डूबता देख हर कोई गमगीन है।
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सरयू की लहरें मंगलवार को रातभर गांव को काटती रहीं। जब सुबह हुई, तो पता चला कि कई घर नदी में समा चुके हैं। जिनके मकान बचे थे, वे भी दरकती जमीन देखकर कांप उठे। सुरेंद्र का घर रात में ही धारा में समा गया। वह टूटे मन से बोले, हम तो सिर्फ देख रहे थे, दीवारें एक-एक कर बह गईं, समझ ही नहीं आया कि घर कब नदी में चला गया। यही हाल संदीप, चेतराम और राजाराम का था। सभी रात में हुए कटान की आपबीती बताते हुए फफक पड़े।
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गांव में भोर होते ही कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली में गृहस्थी का सामान लादने लगा, तो कोई सिर पर बोझ उठाकर बच्चों का हाथ पकड़े गांव से दूर जाता दिखा। गांव में बुजुर्गों के कदम भारी हैं, बच्चों की आंखें डरी हुईं। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है।
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खुले आसमान तले जिंदगी
जो लोग अभी कहीं नहीं जा पाए, वे गांव के किनारे टीन-तख्त और बांस की आड़ में शरण लिए हुए हैं। महिलाएं टूटे चूल्हे पर लकड़ी जलाकर बचे-खुचे अनाज को पकाने की कोशिश कर रही हैं। किसी तरफ चूल्हे से उठते धुएं का गुबार है, तो कहीं भूख से बिलखते बच्चों की चीखें सुनाई दे रही हैं। रामावती चूल्हे पर खिचड़ी चढ़ा रही थीं। पास ही उनका तीन साल का बेटा रोहित बार-बार पूछ रहा था- मां, कब मिलेगा खाना।


बाबू, हमारे पास अब कुछ नहीं बचा

कटान से प्रभावित राजाराम गमछे में मुंह छिपाकर फफकते हुए बोले- बाबू, हमारे पास अब कुछ नहीं बचा। न जमीन, न मकान, न घर-गृहस्थी। बच्चों को कहां लेकर जाएं, कुछ समझ नहीं आता। परेशान महिलाओं की आंखें सूज गई हैं।


सरकारी मदद नदारद
सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब तक न तो कोई सरकारी राहत शिविर लगा है, न खाने-पीने का इंतजाम। ग्रामीण खुद ही जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं। उन्हें आस है कि प्रशासन जल्द ही मदद करेगा, लेकिन इंतजार लंबा होता जा रहा है।




सभी कटान पीड़ितों को मिलेगी मदद
महसी तहसील के उपजिलाधिकारी आलोक कुमार ने कहा कि जानकीनगर गांव में हो रहे कटान की रिपोर्ट राजस्व कर्मी तैयार कर रहे हैं। सभी कटान पीड़ितों को मुआवजा मिलेगा। उच्चाधिकारियों से कटान पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए भी बात की जाएगी।
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