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Bahraich News: दो किमी की कठिन डगर, अभिभावकों को लग रहा डर, कैसे स्कूल भेजें बच्चे
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विलय के लिए प्रस्तावित स्कूल।
- फोटो : विलय के लिए प्रस्तावित स्कूल।
तेजवापुर (बहराइच)। शासन द्वारा शुरू की गई परिषदीय विद्यालयों के मर्जर की कवायद सैकड़ों बच्चोंं के शिक्षण कार्य में बाधा बनती दिख रही है। मर्ज किए गए विद्यालय की दूरी अधिक होने से अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है और अधिकांश अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।
तेजवापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत खसहा मोहम्मदपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय टेपरा टेपरी का विलय गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय आंबेडकर नगर में प्रस्तावित है। विलय की सूचना के बाद से ही टेपरा में शिक्षणरत 60 बच्चों की शिक्षा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ज्यादातर अभिभावक बच्चोंं को आंबेडकर नगर गांव स्थित विद्यालय भेजने की पक्ष में नहीं है। उन्हें महसी क्षेत्र में व्याप्त हिंसक जानवरों व कुत्तों का भय सता रहा है। साथ ही रास्ते में पड़ने वाले बाग व गन्ने के खेतोंं को लेकर भी अभिभावक डरे हुए हैं।
खूनी भेड़ियों का डर
ग्राम पंचायत खसहा मोहम्मद निवासी सिताबी ने बताया कि महसी तहसील क्षेत्र भेड़िया प्रभावित है और भेड़ियों ने एक दर्जन से अधिक बच्चोंं को निवाला बनाया है। ऐसे में घर के छोटे-छोटे बच्चों को दो किलोमीटर दूर सुनसान रास्ते से पढ़ने नहीं भेज सकते।
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नारे को चोट
गांव निवासी भगवानी ने बताया कि सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। ऐसे में बेटियों के लिए घर के पास विद्यालय का प्रबंध करना चाहिए। लेकिन मर्जर के नाम पर दो किमी दूर भेजने को कह रही हैं। ऐसे में इतनी दूर भेजना मुश्किल होगा।
गरीबी पर प्रहार, निजी स्कूल को बढ़ावा
गांव निवासी जगदंबा प्रसाद ने बताया कि गांव में स्कूल होने से बच्चे आसानी से पढ़ने चले जाते थे और उन्हें खाना भी मिलता है, लेकिन अब दो किलोमीटर दूर जाने की बात कही जा रही है। जो कहीं न कहीं निजी स्कूलों को बढ़ावा देने वाला है। घर के बच्चों को इतनी दूर नहीं भेजेंगे। गांव में पढ़ाएंगे।
कुत्तों व अपराधियों का भय
गांव निवासी कुसुमा ने बताया कि कुत्तों ने कई बच्चों को मार डाला है। वहीं, मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र में बच्चियों को शिकार बनाने वाला अपराधी भी पकड़ा जा चुका है। ऐसे में बच्चियों को इतनी दूर भेजना जोखिम भरा है। बड़ी हो जाएंगी तो पढ़ाई कर लेंगी।
मानक के अनुरूप जहां बच्चों की संख्या कम होगी, उनको ही विलय के श्रेणी रखा जाएगा। जहां संख्या पर्याप्त है, उनका विलय नहीं किया जाएगा। विलय वाले स्कूलोंं में बच्चों को भेजने के लिए अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। -सुंदर लाल, खंड शिक्षा अधिकारी
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तेजवापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत खसहा मोहम्मदपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय टेपरा टेपरी का विलय गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय आंबेडकर नगर में प्रस्तावित है। विलय की सूचना के बाद से ही टेपरा में शिक्षणरत 60 बच्चों की शिक्षा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ज्यादातर अभिभावक बच्चोंं को आंबेडकर नगर गांव स्थित विद्यालय भेजने की पक्ष में नहीं है। उन्हें महसी क्षेत्र में व्याप्त हिंसक जानवरों व कुत्तों का भय सता रहा है। साथ ही रास्ते में पड़ने वाले बाग व गन्ने के खेतोंं को लेकर भी अभिभावक डरे हुए हैं।
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खूनी भेड़ियों का डर
ग्राम पंचायत खसहा मोहम्मद निवासी सिताबी ने बताया कि महसी तहसील क्षेत्र भेड़िया प्रभावित है और भेड़ियों ने एक दर्जन से अधिक बच्चोंं को निवाला बनाया है। ऐसे में घर के छोटे-छोटे बच्चों को दो किलोमीटर दूर सुनसान रास्ते से पढ़ने नहीं भेज सकते।
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नारे को चोट
गांव निवासी भगवानी ने बताया कि सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। ऐसे में बेटियों के लिए घर के पास विद्यालय का प्रबंध करना चाहिए। लेकिन मर्जर के नाम पर दो किमी दूर भेजने को कह रही हैं। ऐसे में इतनी दूर भेजना मुश्किल होगा।
गरीबी पर प्रहार, निजी स्कूल को बढ़ावा
गांव निवासी जगदंबा प्रसाद ने बताया कि गांव में स्कूल होने से बच्चे आसानी से पढ़ने चले जाते थे और उन्हें खाना भी मिलता है, लेकिन अब दो किलोमीटर दूर जाने की बात कही जा रही है। जो कहीं न कहीं निजी स्कूलों को बढ़ावा देने वाला है। घर के बच्चों को इतनी दूर नहीं भेजेंगे। गांव में पढ़ाएंगे।
कुत्तों व अपराधियों का भय
गांव निवासी कुसुमा ने बताया कि कुत्तों ने कई बच्चों को मार डाला है। वहीं, मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र में बच्चियों को शिकार बनाने वाला अपराधी भी पकड़ा जा चुका है। ऐसे में बच्चियों को इतनी दूर भेजना जोखिम भरा है। बड़ी हो जाएंगी तो पढ़ाई कर लेंगी।
मानक के अनुरूप जहां बच्चों की संख्या कम होगी, उनको ही विलय के श्रेणी रखा जाएगा। जहां संख्या पर्याप्त है, उनका विलय नहीं किया जाएगा। विलय वाले स्कूलोंं में बच्चों को भेजने के लिए अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। -सुंदर लाल, खंड शिक्षा अधिकारी