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सरकारी एजेंसियों ने खाद उठान से खड़े किए हाथ
Bahraich
Updated Mon, 01 Dec 2014 05:30 AM IST
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बहराइच। गोंडा में डीएपी चार हजार मीट्रिक टन व एनपीके पांच सौ मीट्रिक टन डंप है। लेकिन बहराइच की सरकारी एजेंसियों ने उठान से हाथ खड़े कर दिए हैं। लक्ष्य के सापेक्ष महज 17 फीसदी खाद की खेप पहुंची है। वहीं निजी सेक्टर मुनाफा कमाने की जुगत में किसानों को स्टॉक की कमी बता रहा है। लेकिन आंकड़ों में खूब खाद है। इससे किसानों को गेंहू, चना, मटर, सरसों, मसूर की बोआई करने के लिए डीएपी का संकट झेलना पड़ रहा है। खरीफ सीजन में सूखे का दंश झेल चुके किसान अब रबी फसलों की बोआई के लिए लुटने को मजबूर हैं।
35 लाख की आबादी के सापेक्ष जिले में खाद की बिक्री के लिए निजी सेक्टर व सरकारी सेक्टर में 8920 केंद्र बनाए गए हैं। यूं तो गेंहू की बोआई के लिए 15 नवंबर से 15 दिसंबर का समय उपयुक्त होता है। लेकिन पिछले दिनों आए हुदहुद तूफान के असर से बारिश हुई और वातावरण का तापमान लुढ़क गया। इसका फायदा उठाने के लिए किसानों ने सरसों, चना, मटर व गेंहू की बोआई शुरू कर दी है। खेतों में पर्याप्त नमी होने के कारण किसान गेंहू की अगैती खेती कर रहे हैं। इससे खाद-बीज की मांग बढ़ गई है। लेकिन जिले में उर्वरक संकट गहरा गया है। साधन सहकारी समितियों को कृषि विभाग ने यूरिया 39 फीसदी व डीएपी 71 फीसदी उर्वरक आपूर्ति करने का लक्ष्य दिया था। लेकिन इन सरकारी एजेंसियों ने उर्वरक उठान में कोई रूचि नहीं दिखाई है। यूरिया 17 व डीएपी महज 35 फीसदी उठाई गई। जिले में गेंहू की बोआई के लिए एक लाख 68 हजार 863 हेक्टेअर क्षेत्रफल का लक्ष्य रखा था। अभी तक जिले में 60.84 फीसदी क्षेत्र आच्छादित हो सका है। 40 फीसदी खेत खाली हैं। लेकिन अधिकतर सरकारी एजेंसियों से डीएपी व यूरिया खत्म हो चुकी है। किसान दर-बदर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। तो वहीं निजी सेक्टर ने तय लक्ष्य 39 फीसदी के सापेक्ष यूरिया 80 फीसदी व 71 फीसदी के सापेक्ष डीएपी 140 फीसदी मंगवाई है। लेकिन निजी सेक्टर भी स्टॉक की कमी बताकर किसानों को धोखा दे रहा है। उर्वरक की कालाबाजारी की जा रही है।
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35 लाख की आबादी के सापेक्ष जिले में खाद की बिक्री के लिए निजी सेक्टर व सरकारी सेक्टर में 8920 केंद्र बनाए गए हैं। यूं तो गेंहू की बोआई के लिए 15 नवंबर से 15 दिसंबर का समय उपयुक्त होता है। लेकिन पिछले दिनों आए हुदहुद तूफान के असर से बारिश हुई और वातावरण का तापमान लुढ़क गया। इसका फायदा उठाने के लिए किसानों ने सरसों, चना, मटर व गेंहू की बोआई शुरू कर दी है। खेतों में पर्याप्त नमी होने के कारण किसान गेंहू की अगैती खेती कर रहे हैं। इससे खाद-बीज की मांग बढ़ गई है। लेकिन जिले में उर्वरक संकट गहरा गया है। साधन सहकारी समितियों को कृषि विभाग ने यूरिया 39 फीसदी व डीएपी 71 फीसदी उर्वरक आपूर्ति करने का लक्ष्य दिया था। लेकिन इन सरकारी एजेंसियों ने उर्वरक उठान में कोई रूचि नहीं दिखाई है। यूरिया 17 व डीएपी महज 35 फीसदी उठाई गई। जिले में गेंहू की बोआई के लिए एक लाख 68 हजार 863 हेक्टेअर क्षेत्रफल का लक्ष्य रखा था। अभी तक जिले में 60.84 फीसदी क्षेत्र आच्छादित हो सका है। 40 फीसदी खेत खाली हैं। लेकिन अधिकतर सरकारी एजेंसियों से डीएपी व यूरिया खत्म हो चुकी है। किसान दर-बदर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। तो वहीं निजी सेक्टर ने तय लक्ष्य 39 फीसदी के सापेक्ष यूरिया 80 फीसदी व 71 फीसदी के सापेक्ष डीएपी 140 फीसदी मंगवाई है। लेकिन निजी सेक्टर भी स्टॉक की कमी बताकर किसानों को धोखा दे रहा है। उर्वरक की कालाबाजारी की जा रही है।
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