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घड़ियालों की नई पीढ़ी ने सुरक्षित घर में खोली आंखें
Bahraich
Updated Wed, 19 Nov 2014 05:30 AM IST
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बहराइच/मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में घड़ियालों को संरक्षित करने के लिए वन विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। गेरुआ नदी के नावघाट स्थित टैंकों को कुकरैल की तर्ज पर घड़ियाल प्रजनन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रथम चरण में पांच टैंकों में घड़ियाल के 36 बच्चों को संरक्षित किया गया है। इनकी चहलकदमी पर्यटक भी देख सकेंगे। बच्चों के बड़े होने पर घड़ियालों की एक खेप कुकरैल (लखनऊ) भी भेजी जाएगी।
कतर्नियाघाट की गेरुआ नदी के पानी को घड़ियालों के लिए काफी मुफीद माना जाता है। अन्य नदियों की अपेक्षा गेरुआ नदी में घड़ियालों का कुनबा तेजी से विकसित होता है। हर वर्ष नदी के टापू पर मादा घड़ियाल द्वारा बनाए गए घोसलों में घड़ियालों के अंडों से औसतन 1200 से 1500 घड़ियाल के बच्चे निकलते हैं। इन बच्चों को सीधे नदी में छोड़ दिया जाता है। लेकिन, अधिकांश बच्चों को नर घड़ियाल व अन्य जलीय जीव अपना निवाला बना लेते हैं, जिसके चलते प्रतिवर्ष अंडों से काफी संख्या में बच्चों के निकलने के बाद भी घड़ियालों की संख्या लगभग 250 के आसपास ही बनी हुई है। प्रजनन की बेहतर स्थिति होने के बाद भी नन्हे घड़ियालों का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। इससे चिंतित वन विभाग ने तीन दशक से बंद पड़े घड़ियाल प्रजनन केंद्र को फिर विकसित किया गया है। प्रजनन केंद्र भवन का निर्माण तो छह माह पहले ही हो गया था लेकिन केंद्र में स्थापित 10 में से पांच टैंकों में पानी भरवाकर उनमें प्रथम चरण में घड़ियाल के 36 बच्चों को संरक्षित किया गया है।
कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि घड़ियाल के बच्चों के संरक्षण और आने वाले पर्यटकों को घड़ियाल की सुरक्षा और संरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए प्रजनन केंद्र को नए सिरे से विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि लखनऊ के कुकरैल घड़ियाल प्रजनन केंद्र की तर्ज पर ही कतर्निया में भी काम हो रहा है। अगर परीक्षण सफल रहा तो और पांच टैंकों में भी घड़ियाल के बच्चों को संरक्षित करवाएंगे।
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कतर्नियाघाट की गेरुआ नदी के पानी को घड़ियालों के लिए काफी मुफीद माना जाता है। अन्य नदियों की अपेक्षा गेरुआ नदी में घड़ियालों का कुनबा तेजी से विकसित होता है। हर वर्ष नदी के टापू पर मादा घड़ियाल द्वारा बनाए गए घोसलों में घड़ियालों के अंडों से औसतन 1200 से 1500 घड़ियाल के बच्चे निकलते हैं। इन बच्चों को सीधे नदी में छोड़ दिया जाता है। लेकिन, अधिकांश बच्चों को नर घड़ियाल व अन्य जलीय जीव अपना निवाला बना लेते हैं, जिसके चलते प्रतिवर्ष अंडों से काफी संख्या में बच्चों के निकलने के बाद भी घड़ियालों की संख्या लगभग 250 के आसपास ही बनी हुई है। प्रजनन की बेहतर स्थिति होने के बाद भी नन्हे घड़ियालों का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। इससे चिंतित वन विभाग ने तीन दशक से बंद पड़े घड़ियाल प्रजनन केंद्र को फिर विकसित किया गया है। प्रजनन केंद्र भवन का निर्माण तो छह माह पहले ही हो गया था लेकिन केंद्र में स्थापित 10 में से पांच टैंकों में पानी भरवाकर उनमें प्रथम चरण में घड़ियाल के 36 बच्चों को संरक्षित किया गया है।
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कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि घड़ियाल के बच्चों के संरक्षण और आने वाले पर्यटकों को घड़ियाल की सुरक्षा और संरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए प्रजनन केंद्र को नए सिरे से विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि लखनऊ के कुकरैल घड़ियाल प्रजनन केंद्र की तर्ज पर ही कतर्निया में भी काम हो रहा है। अगर परीक्षण सफल रहा तो और पांच टैंकों में भी घड़ियाल के बच्चों को संरक्षित करवाएंगे।
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