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जंगल से लकड़ी काट कर ट्रेनों से तस्करी

Tue, 28 Oct 2014 05:31 AM IST
Bahraich
Bahraich Updated Tue, 28 Oct 2014 05:31 AM IST
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बहराइच। कतर्नियाघाट वन क्षेत्र से कीमती साखू व सागौन की लकड़ियां काटकर ट्रेन से तस्करी की जा रही है। ट्रेन के डिब्बों में लकड़ी छिपाकर उसे ठिकाने पर पहुंचाया जाता है। जीआरपी के जवान ट्रेनों में स्कॉर्ट के रूप में मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद लकड़ी तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। वन विभाग भी बेबस दिख रहा है।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र साल और सागौन का जंगल हैं। जंगल के बीच से होकर ही गोंडा मैलानी प्रखंड की रेल लाइन गुजरती है। मिहींपुरवा, निशानगाड़ा, बिछिया, रायबोझा, मुर्तिहा रेलवे स्टेशन जंगल के मध्य स्थित है। इन रेलवे स्टेशनों पर जब ट्रेन पहुंचती है तो लकड़ी माफिया चोरी छिपे बेशकीमती लकड़ी को ट्रेनों के डिब्बों में छिपाकर तस्करी को अंजाम देते हैं। कुछ लकड़ी माफिया रेलवे स्टेशन के पास वैक्यूम लगाकर ट्रेनों को रोक कर कीमती लकड़ियों को लादने से भी बाज नहीं आते हैं। लकड़ी की इस खेप को बहराइच, रिसिया, नानपारा और लखीमपुर पहुंचाया जा रहा है। लकड़हारों द्वारा लकड़ी के बोटों को छिपाने के लिए लकड़हारे ट्रेन की बोगियों में शौचालय व सीट का सहारा लेते हैं, जिससे यात्रियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यात्री अगर विरोध करते हैं तो लकड़हारे विवाद पर उतारू हो जाते हैं। ट्रेन में जीआरपी स्कॉर्ट भी चलता है, फिर भी तस्करी पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। इस मामले में डीएफओ आशीष तिवारी का कहना है कि लकड़हारों पर अंकुश के लिए निरंतर अभियान चल रहा है। रेलवे स्टेशन पर रेंज अधिकारियों को नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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