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झोलाछाप के इंजेक्शन लगाते ही मासूम की मौत
Bahraich
Updated Sat, 27 Sep 2014 05:30 AM IST
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खैरीघाट (बहराइच)। रायपुर चौराहे पर एक झोलाछाप के इंजेक्शन लगाते ही मासूम ने दम तोड़ दिया। परिवारीजन उससे कुछ पूछ पाते कि इतने में झोलाछाप भाग निकला। परिवार के लोग शव लेकर थाने पहुंच गए। इस मामले में मृतक के पिता की तहरीर पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
खैरीघाट थाना क्षेत्र अंतर्गत बख्तावरपुरवा दर्जीपुर गांव निवासी नंदकिशोर के पुत्र बबलू (8 माह) बीमार चल रहा था। उसे बुखार व पेट दर्द की शिकायत थी। गांव के चिकित्सक से नंदकिशोर बेटे का इलाज करा रहा था लेकिन लाभ नहीं हुआ। इस पर गुरुवार को वह बेटे को लेकर रायपुर चौराहे पर स्थित एक झोलाछाप की क्लीनिक पर पहुंचा। उसने जैसे ही बच्चे को इंजेक्शन लगाया, बच्चा छटपटाने लगा और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया। परिवारीजन जब तक कुछ समझ पाते तब तक झोलाछाप भाग निकला। परिवार के लोग बच्चे का शव लेकर थाने पहुंच गए।
थानाध्यक्ष मोहम्मद यासीन ने बताया कि मृत बालक के पिता ने दूजीपुरवा बौंडी निवासी झोलाछाप अमिरका को नामजद करते हुए तहरीर दी है। मृतक के पिता की तहरीर पर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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कंपाउंडर की लापरवाही से गई किशोरी की जान
जमुनहा (श्रावस्ती)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मल्हीपुर में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही से बुधवार रात एक बालिका की की जान चली गई। कंपाउंडर बच्ची को डिप लगाकर चला गया लेकिन फिर उसे निकालने नहीं आया। पिता अस्पताल में जब स्वास्थ्यकर्मी खोजने लगा तभी बच्ची ने दम तोड़ दिया। मल्हीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बहोरवा निवासी मिट्ठू की पुत्री गोलू (10) को तेज बुखार की शिकायत पर बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मल्हीपुर में भर्ती कराया गया था। यहां तैनात कंपाउंडर निसार अहमद ने उसे डिप लगाया। लेकिन, इसके बाद कोई चिकित्सक और न ही व कंपाउंडर गोलू को देखने नहीं आया। डिप खत्म होने पर मिट्ठू रात करीब एक बजे से दो बजे के बीच चिकित्सक व कंपाउंडर की तलाश में भटकता रहा लेकिन कोई नहीं मिला। जब मिट्ठू वापस लौटा तो गोलू की मौत हो चुकी थी। मिट्ठू ने फिर खुद ही गोलू के हाथ में लगा वीगो निकाला। इससे आक्रोशित परिवारीजनों ने जब इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही तो कंपाउंडर ने हर संभव सहायता दिलाने का आश्वासन देकर उन्हें घर भेज दिया। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एमपी कसौंधन का कहना है कि यदि परिवारीजनों की ओर से प्रकरण की लिखित शिकायत की जाती है तो इसकी जांच कराकर दोषी कंपाउंडर के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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खैरीघाट थाना क्षेत्र अंतर्गत बख्तावरपुरवा दर्जीपुर गांव निवासी नंदकिशोर के पुत्र बबलू (8 माह) बीमार चल रहा था। उसे बुखार व पेट दर्द की शिकायत थी। गांव के चिकित्सक से नंदकिशोर बेटे का इलाज करा रहा था लेकिन लाभ नहीं हुआ। इस पर गुरुवार को वह बेटे को लेकर रायपुर चौराहे पर स्थित एक झोलाछाप की क्लीनिक पर पहुंचा। उसने जैसे ही बच्चे को इंजेक्शन लगाया, बच्चा छटपटाने लगा और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया। परिवारीजन जब तक कुछ समझ पाते तब तक झोलाछाप भाग निकला। परिवार के लोग बच्चे का शव लेकर थाने पहुंच गए।
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थानाध्यक्ष मोहम्मद यासीन ने बताया कि मृत बालक के पिता ने दूजीपुरवा बौंडी निवासी झोलाछाप अमिरका को नामजद करते हुए तहरीर दी है। मृतक के पिता की तहरीर पर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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कंपाउंडर की लापरवाही से गई किशोरी की जान
जमुनहा (श्रावस्ती)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मल्हीपुर में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही से बुधवार रात एक बालिका की की जान चली गई। कंपाउंडर बच्ची को डिप लगाकर चला गया लेकिन फिर उसे निकालने नहीं आया। पिता अस्पताल में जब स्वास्थ्यकर्मी खोजने लगा तभी बच्ची ने दम तोड़ दिया। मल्हीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बहोरवा निवासी मिट्ठू की पुत्री गोलू (10) को तेज बुखार की शिकायत पर बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मल्हीपुर में भर्ती कराया गया था। यहां तैनात कंपाउंडर निसार अहमद ने उसे डिप लगाया। लेकिन, इसके बाद कोई चिकित्सक और न ही व कंपाउंडर गोलू को देखने नहीं आया। डिप खत्म होने पर मिट्ठू रात करीब एक बजे से दो बजे के बीच चिकित्सक व कंपाउंडर की तलाश में भटकता रहा लेकिन कोई नहीं मिला। जब मिट्ठू वापस लौटा तो गोलू की मौत हो चुकी थी। मिट्ठू ने फिर खुद ही गोलू के हाथ में लगा वीगो निकाला। इससे आक्रोशित परिवारीजनों ने जब इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही तो कंपाउंडर ने हर संभव सहायता दिलाने का आश्वासन देकर उन्हें घर भेज दिया। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एमपी कसौंधन का कहना है कि यदि परिवारीजनों की ओर से प्रकरण की लिखित शिकायत की जाती है तो इसकी जांच कराकर दोषी कंपाउंडर के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।