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आधे बाढ़ पीड़ित निकले फर्जी
Bahraich
Updated Mon, 15 Sep 2014 05:30 AM IST
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नानपारा (बहराइच)। बलहा विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों की सूची बनाने में जमकर खेल खेला गया है। इसका खुलासा तब हुआ जब जिलाधिकारी ने एक अलग टीम बनाकर रैंडम सर्वेक्षण कराया। बरेली, लखनऊ और सुल्तानपुर के डिप्टी कलेक्टर की अगुवाई में टीम गठित की गई थी। टीम ने जो रिपोर्ट सौंपी है, उससे प्रशासन के होश उड़ गए हैं। यह खुलासा हुआ है कि सभी गांवों में 45 से 55 फीसदी अपात्र सूची में शामिल किए गए हैं। इन सबके घर-द्वार सुरक्षित हैं लेकिन मुआवजे के लाभ के लिए इन्हें भी बाढ़ पीड़ित बना दिया गया।
नानपारा तहसील क्षेत्र के मिहींपुरवा विकासखंड में 15 अगस्त को आई बाढ़ ने एक सप्ताह में खूब कहर बरपाया। बाढ़ खत्म होने के बाद जिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह ने गांव में बाढ़ से हुए नुकसान का ब्यौरा इकट्ठा करने के लिए तीन सदस्यीय 145 टीमें बनाई थीं। प्रत्येेक टीम में एक जेई, एक लेखपाल और एक पंचायत सचिव को शामिल किया गया था। लेकिन, इस टीम ने सर्वेक्षण कार्य शुरू किया तो टीम के सर्वेक्षण पर उंगलियां उठने लगीं। चारों तरफ से शिकायतों का दौर शुरू हो गया। जैसे-तैसे टीमों ने अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट उपजिलाधिकारी नानपारा को सौंपी। इसके बाद ग्रामीणों की शिकायत के मद्देनजर जिलाधिकारी के आदेश पर एसडीएम ने रैंडम चेकिंग की तीन टीमें बनाईं। इनमें बरेली, लखनऊ और सुल्तानपुर के डिप्टी कलेक्टर को नेतृत्व सौंपा गया। टीम में डिप्टी कलेक्टर के अलावा खंड विकास अधिकारी और अधिशासी अभियंता शामिल थे। टीम को शुरुआती दौर की सर्वेक्षण सूची सौंपकर 10 प्रतिशत गांव के व्यक्तियों का सर्वे करने को कहा गया। विकासखंड शिवपुर के ग्राम बसंतापुर मेें रैंडम चेकिंग टीम के डिप्टी कलेक्टर बरेली रामशंकर, बीडीओ महसी रामकिशोर व अधिशासी अभियंता सरयू केएन यादव ने 92 व्यक्तियों के घरों की जांच की, जिसमें 40 व्यक्तियों के सर्वेक्षण रिपोर्ट में भिन्नता मिली।
दूसरी टीम में डिप्टी कलेक्टर लखनऊ रामकुमार गौतम, बीडीओ मिहींपुरवा नागेंद्रमोहन राम त्रिपाठी और अधिशासी अभियंता देवेश शुक्ला की टीम ने ग्राम पड़रिया में 39, सर्रा कला में 38 और सोगवा के 77 परिवारों का सर्वेक्षण किया। इनमें 85 व्यक्ति अपात्र मिले। डिप्टी कलेक्टर सुल्तानपुर रामअभिलाख, बीडीओ बलहा हरीशचंद्र और अधिशासी अभियंता शशिकांत विद्यार्थी ने मटिहा में 70, अमवा हुसैनपुर में 20, लक्ष्मणपुर मटेही में 44 परिवारों की जांच की जिसमें 74 व्यक्ति अपात्र मिले।
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मालूम हो कि तहसीलदार सदर धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता जावेद वसीम ने सोमइगौढ़ी गांव के 11 मजरों की सर्वेक्षण सूची तैयार कर 695 परिवारों के आवासीय व पशुशाला क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट एसडीएम को दी थी। जबकि, इस ग्राम पंचायत में 78 मकान व पशु शाला की जांच की गई तो 36 मकानों में कोई क्षति नहीं हुई है। जब 10 फीसदी रैंडम चेकिंग में इतना फर्जीवाड़ा है तो पूरे मामले की अगर जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण टीमों का खेल सामने आ जाएगा।
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नानपारा तहसील क्षेत्र के मिहींपुरवा विकासखंड में 15 अगस्त को आई बाढ़ ने एक सप्ताह में खूब कहर बरपाया। बाढ़ खत्म होने के बाद जिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह ने गांव में बाढ़ से हुए नुकसान का ब्यौरा इकट्ठा करने के लिए तीन सदस्यीय 145 टीमें बनाई थीं। प्रत्येेक टीम में एक जेई, एक लेखपाल और एक पंचायत सचिव को शामिल किया गया था। लेकिन, इस टीम ने सर्वेक्षण कार्य शुरू किया तो टीम के सर्वेक्षण पर उंगलियां उठने लगीं। चारों तरफ से शिकायतों का दौर शुरू हो गया। जैसे-तैसे टीमों ने अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट उपजिलाधिकारी नानपारा को सौंपी। इसके बाद ग्रामीणों की शिकायत के मद्देनजर जिलाधिकारी के आदेश पर एसडीएम ने रैंडम चेकिंग की तीन टीमें बनाईं। इनमें बरेली, लखनऊ और सुल्तानपुर के डिप्टी कलेक्टर को नेतृत्व सौंपा गया। टीम में डिप्टी कलेक्टर के अलावा खंड विकास अधिकारी और अधिशासी अभियंता शामिल थे। टीम को शुरुआती दौर की सर्वेक्षण सूची सौंपकर 10 प्रतिशत गांव के व्यक्तियों का सर्वे करने को कहा गया। विकासखंड शिवपुर के ग्राम बसंतापुर मेें रैंडम चेकिंग टीम के डिप्टी कलेक्टर बरेली रामशंकर, बीडीओ महसी रामकिशोर व अधिशासी अभियंता सरयू केएन यादव ने 92 व्यक्तियों के घरों की जांच की, जिसमें 40 व्यक्तियों के सर्वेक्षण रिपोर्ट में भिन्नता मिली।
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दूसरी टीम में डिप्टी कलेक्टर लखनऊ रामकुमार गौतम, बीडीओ मिहींपुरवा नागेंद्रमोहन राम त्रिपाठी और अधिशासी अभियंता देवेश शुक्ला की टीम ने ग्राम पड़रिया में 39, सर्रा कला में 38 और सोगवा के 77 परिवारों का सर्वेक्षण किया। इनमें 85 व्यक्ति अपात्र मिले। डिप्टी कलेक्टर सुल्तानपुर रामअभिलाख, बीडीओ बलहा हरीशचंद्र और अधिशासी अभियंता शशिकांत विद्यार्थी ने मटिहा में 70, अमवा हुसैनपुर में 20, लक्ष्मणपुर मटेही में 44 परिवारों की जांच की जिसमें 74 व्यक्ति अपात्र मिले।
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मालूम हो कि तहसीलदार सदर धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता जावेद वसीम ने सोमइगौढ़ी गांव के 11 मजरों की सर्वेक्षण सूची तैयार कर 695 परिवारों के आवासीय व पशुशाला क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट एसडीएम को दी थी। जबकि, इस ग्राम पंचायत में 78 मकान व पशु शाला की जांच की गई तो 36 मकानों में कोई क्षति नहीं हुई है। जब 10 फीसदी रैंडम चेकिंग में इतना फर्जीवाड़ा है तो पूरे मामले की अगर जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण टीमों का खेल सामने आ जाएगा।