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अस्पताल में स्टाफ की कमी पर रेलवे अनजान
Bahraich
Updated Wed, 22 Jan 2014 05:45 AM IST
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बहराइच/नानपारा। गोंडा-मैलानी व नेपालगंज प्रखंड के 17 रेलवे स्टेशनों के रेलकर्मियों व यात्रियों के सेहत का जिम्मा महज नानपारा जंक्शन पर स्थापित हेल्थ यूनिट का है। यहां भी कर्मचारियों की कमी है। प्रतिमाह 500 मरीजों के इलाज का दारोमदार एक संविदा चिकित्सक समेत चार कर्मचारियों पर है।
प्रखंड के अन्य रेलवे स्टेशनों पर मुख्यालय के निर्देश पर ही मेडिकल कैंप लगाए जाते हैं। सर्दी, जुकाम, बुखार जैसे सामान्य रोगों को छोड़ अन्य गंभीर रोगों के मरीजों को गोंडा और बादशाह नगर, लखनऊ रेलवे अस्पताल रेफर करने की मजबूरी होती है। कुछ मरीजों को जिला अस्पताल व सीएचसी भी भेज दिया जाता है। गोंडा-मैलानी और नेपालगंज प्रखंड की कुल लंबाई दो सौ किलोमीटर है। यहां के 17 रेलवे स्टेशनों के यात्रियों व रेल कर्मियों के इलाज के लिए नानपारा जंक्शन पर तीन दशक पूर्व हेल्थ यूनिट स्थापित की गई थी। इस यूनिट का भवन तो काफी भव्य बनाया गया। लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कोई कदम नहीं उठाए गए। इस यूनिट में संविदा चिकित्सक चंद्रभान वर्मा के साथ फार्मासिस्ट मोहम्मद इस्माइल, ड्रेसर देशराज और अटेंडेंट शमी मोहम्मद की तैनाती है। सफाई कर्मी सुशील कुमार ने कुछ माह पूर्व इस्तीफा दे दिया है। इससे अस्पताल में सफाई भी नहीं होती है। यहां पर महज दो बेड ही हैं। इसके अलावा इमरजेंसी किट व दवाएं उपलब्ध रहती हैं। इन दवाओं के स्टॉक की जांच प्रतिमाह लखनऊ से आने वाली टीम करती है। ऑपरेशन की व्यवस्था यहां नहीं है।
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प्रखंड के अन्य रेलवे स्टेशनों पर मुख्यालय के निर्देश पर ही मेडिकल कैंप लगाए जाते हैं। सर्दी, जुकाम, बुखार जैसे सामान्य रोगों को छोड़ अन्य गंभीर रोगों के मरीजों को गोंडा और बादशाह नगर, लखनऊ रेलवे अस्पताल रेफर करने की मजबूरी होती है। कुछ मरीजों को जिला अस्पताल व सीएचसी भी भेज दिया जाता है। गोंडा-मैलानी और नेपालगंज प्रखंड की कुल लंबाई दो सौ किलोमीटर है। यहां के 17 रेलवे स्टेशनों के यात्रियों व रेल कर्मियों के इलाज के लिए नानपारा जंक्शन पर तीन दशक पूर्व हेल्थ यूनिट स्थापित की गई थी। इस यूनिट का भवन तो काफी भव्य बनाया गया। लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कोई कदम नहीं उठाए गए। इस यूनिट में संविदा चिकित्सक चंद्रभान वर्मा के साथ फार्मासिस्ट मोहम्मद इस्माइल, ड्रेसर देशराज और अटेंडेंट शमी मोहम्मद की तैनाती है। सफाई कर्मी सुशील कुमार ने कुछ माह पूर्व इस्तीफा दे दिया है। इससे अस्पताल में सफाई भी नहीं होती है। यहां पर महज दो बेड ही हैं। इसके अलावा इमरजेंसी किट व दवाएं उपलब्ध रहती हैं। इन दवाओं के स्टॉक की जांच प्रतिमाह लखनऊ से आने वाली टीम करती है। ऑपरेशन की व्यवस्था यहां नहीं है।
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