{"_id":"131-47338","slug":"Bahraich-47338-131","type":"story","status":"publish","title_hn":"चप्पे-चप्पे पर रहेगी सीसीटीवी कैमरे की नजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चप्पे-चप्पे पर रहेगी सीसीटीवी कैमरे की नजर
Bahraich
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
बहराइच। पैगंबर इस्लाम हजरत मोहम्मद के नवासे व हजरत अली के लखते जिगर इमाम हुसैन की यौमे शहादत का दिन रविवार को गमगमीन माहौल में मनेगा। इस मौके पर गांव, शहर और कस्बों में अलम, ताबूत और ताजिये का जुलूस निकलेगा। जुलूस में दुलदुल आकर्षण का केंद्र रहेगा। जुलूस निकलने के पूर्व मजलिस होगी। जबकि जुलूस में शामिल अंजुमनों के सदस्य व अन्य लोग कमां और जंजीरों से मातम करेंगे। मोहर्रम के जुलूस की निगरानी के लिए शहर में चार स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
मोहर्रम के 10वें दिन रविवार को इमाम हुसैन की याद में विभिन्न समुदायों के लोग अपने-अपने अंदाज में अजादारी व ताजियादारी करते हैं। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। फिदा अब्बास ने बताया कि रविवार को अजाखाना-ए मोहसिनया दुलदुल हाउस से प्रात: 9 बजे जुलूस निकलेगा। जुलूस निकलने के पूर्व मजलिस होगी। जिसे मौलाना मोहम्मद ताहिर संबोधित करेंगे। मजलिस के बाद अलम, ताबूत, ताजिये और दुलदुल का जुलूस परंपरागत तरीके से निकलेगा।
यह जुलूस मीराखेलपुरा, कबाबची गली, मुसलिम मुसाफिरखाना, अमीरमाह, काजीपुरा होते सैयदबाड़ा पहुंचेगा। सैदबाड़े में कुछ क्षण जुलूस ठहरेगा। इसके बाद पुन: सिया जामा मसजिद होते हुए कर्बला की ओर रवाना होगा। सिया जामा मसजिद से गहवारा-ए हजरत अली असगर बरामद होगा। इमामबाड़ा नबाब साहब से कमां, जंजीर और छुरियों का मातम शुरू होगा। यह जुलूस चांदपुरा, कासिमपुरा, मिशन अस्पताल, झिंगहाघाट, रामलीला मैदान के सामने से होते हुए कर्बला पहुंचेगा। यहां जुलूस का समापन होगा।
विज्ञापन
जुलूस की होगी वीडियोग्राफी
पुलिस अधीक्षक जीपी कनौजिया ने बताया कि मोहर्रम जुलूस के मद्देनजर सभी थानाध्यक्षों को अलर्ट किया गया है। संवेदनशील स्थलों पर पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं। जुलूस की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी पुलिस क्षेत्राधिकारी भी व्यवस्था पर नजर रखेंगे।
650 वर्ष पुरानी ताजिया की जियारत को उमड़े अकीदतमंद
दरगाह शरीफ के निकट एक आस्ताने में रखी चांदी व सोने से निर्मित ताजिया 650 वर्ष पुराना इतिहास समेटे हुए है। बलरामपुर स्टेट की ओर से इस ताजिये को दरगाह शरीफ को दान किया गया था। सोने व चांदी से निर्मित यह ताजिया बेशकीमती है। मोहर्रम के चलते इस ताजिये की एक झलक पाने के लिए लोग उमड़ रहे हैं। सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह से चंद कदम की दूरी पर दरगाह शरीफ परिक्षेत्र में ही मोहम्मद सलीम उर्फ मुन्ना बाबा का मकान है। इस मकान में चांदी व सोने से निर्मित ताजिया रखी हुई है। मुन्ना बाबा ने बताया कि वर्ष 2002-03 में उनके पास दरगाह शरीफ का याजदा माही ठेका था। उस दौरान बलरामपुर स्टेट के एक अकीदतमंद गाजी की दरगाह पर जियारत करने के लिए आए थे। उन्होंने साढ़े चार किलो चांदी से निर्मित एक ताजिया अपने पास होने की बात बताई। यह भी कहा था कि वह इस ताजिये की देखभाल नहीं कर पा रहे हैं। इस पर मुन्ना बाबा ने उस ताजिया को गाजी के दरबार के सुपुर्द करने की बात कही थी। अकीदतमंद ने ताजिया गाजी की दरगाह में लाकर भेंट कर दिया था। इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने के लिए मुन्ना बाबा ने अपने पास मौजूद ढाई सौ ग्राम सोना भी ताजिये में लगवा दिया था।
विज्ञापन
मोहर्रम के 10वें दिन रविवार को इमाम हुसैन की याद में विभिन्न समुदायों के लोग अपने-अपने अंदाज में अजादारी व ताजियादारी करते हैं। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। फिदा अब्बास ने बताया कि रविवार को अजाखाना-ए मोहसिनया दुलदुल हाउस से प्रात: 9 बजे जुलूस निकलेगा। जुलूस निकलने के पूर्व मजलिस होगी। जिसे मौलाना मोहम्मद ताहिर संबोधित करेंगे। मजलिस के बाद अलम, ताबूत, ताजिये और दुलदुल का जुलूस परंपरागत तरीके से निकलेगा।
विज्ञापन
यह जुलूस मीराखेलपुरा, कबाबची गली, मुसलिम मुसाफिरखाना, अमीरमाह, काजीपुरा होते सैयदबाड़ा पहुंचेगा। सैदबाड़े में कुछ क्षण जुलूस ठहरेगा। इसके बाद पुन: सिया जामा मसजिद होते हुए कर्बला की ओर रवाना होगा। सिया जामा मसजिद से गहवारा-ए हजरत अली असगर बरामद होगा। इमामबाड़ा नबाब साहब से कमां, जंजीर और छुरियों का मातम शुरू होगा। यह जुलूस चांदपुरा, कासिमपुरा, मिशन अस्पताल, झिंगहाघाट, रामलीला मैदान के सामने से होते हुए कर्बला पहुंचेगा। यहां जुलूस का समापन होगा।
विज्ञापन
जुलूस की होगी वीडियोग्राफी
पुलिस अधीक्षक जीपी कनौजिया ने बताया कि मोहर्रम जुलूस के मद्देनजर सभी थानाध्यक्षों को अलर्ट किया गया है। संवेदनशील स्थलों पर पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं। जुलूस की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी पुलिस क्षेत्राधिकारी भी व्यवस्था पर नजर रखेंगे।
650 वर्ष पुरानी ताजिया की जियारत को उमड़े अकीदतमंद
दरगाह शरीफ के निकट एक आस्ताने में रखी चांदी व सोने से निर्मित ताजिया 650 वर्ष पुराना इतिहास समेटे हुए है। बलरामपुर स्टेट की ओर से इस ताजिये को दरगाह शरीफ को दान किया गया था। सोने व चांदी से निर्मित यह ताजिया बेशकीमती है। मोहर्रम के चलते इस ताजिये की एक झलक पाने के लिए लोग उमड़ रहे हैं। सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह से चंद कदम की दूरी पर दरगाह शरीफ परिक्षेत्र में ही मोहम्मद सलीम उर्फ मुन्ना बाबा का मकान है। इस मकान में चांदी व सोने से निर्मित ताजिया रखी हुई है। मुन्ना बाबा ने बताया कि वर्ष 2002-03 में उनके पास दरगाह शरीफ का याजदा माही ठेका था। उस दौरान बलरामपुर स्टेट के एक अकीदतमंद गाजी की दरगाह पर जियारत करने के लिए आए थे। उन्होंने साढ़े चार किलो चांदी से निर्मित एक ताजिया अपने पास होने की बात बताई। यह भी कहा था कि वह इस ताजिये की देखभाल नहीं कर पा रहे हैं। इस पर मुन्ना बाबा ने उस ताजिया को गाजी के दरबार के सुपुर्द करने की बात कही थी। अकीदतमंद ने ताजिया गाजी की दरगाह में लाकर भेंट कर दिया था। इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने के लिए मुन्ना बाबा ने अपने पास मौजूद ढाई सौ ग्राम सोना भी ताजिये में लगवा दिया था।