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कतर्निया में ट्रेन से कटकर 53 वन्यजीव तोड़ चुके दम

Sat, 11 Jan 2020 12:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jan 2020 12:12 AM IST
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53 wildlife cut off by train in Katarnia
बहराइच। कतर्नियाघाट के संरक्षित वन क्षेत्र में बिछी रेल लाइन पर वन्यजीव दम तोड़ते रहे। करीब दो दशक के आंकड़ों पर गौर करें तो अभी तक ट्रेन से कटने के कारण कतर्नियाघाट के पांच बाघों की मौत हो चुकी है, जबकि एक मगरमच्छ और एक हाथी के कटने के साथ ही 53 दुर्लभ वन्यजीव भी रेलवे ट्रैक पर दम तोड़ चुके हैं। हाईकोर्ट में कतर्नियाघाट के वन्यजीवों के ट्रैक पर मरने के आंकड़े देने के बाद यह खुलासा हुआ है। अब हाईकोर्ट ने ट्रेनों को बंद किए जाने का आदेश जारी किया है, जिससे जंगली जानवरों की सुरक्षा की वन विभाग उम्मीद जता रहा है।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग करीब 553 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में बाघ, तेंदुआ, हाथी, चीतल, जंगली भालू, अजगर, हिरन, सांभर, जंगली सूकर समेत काफी संख्या में दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के अंदर से होकर रेल लाइन गुजरती है। रेल लाइन पर पहले गोकुल एक्सप्रेस समेत छह से अधिक ट्रेनों का संचालन होता था।
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जंगल से गुजरने के दौरान ट्रेनों की रफ्तार कम किए जाने के निर्देश जारी थे, मगर आए दिन रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों की चपेट में आकर वन्यजीवों के मरने की खबरें सामने आती थी। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में वर्ष 1998 से लेकर 2017 के बीच करीब 53 वन्यजीवों की मौत हो गई। कतर्नियाघाट को बाघों को संरक्षण केंद्र माना जाता है। लगभग 36 बाघों का प्रवास होने की जानकारी वन विभाग के पास है।
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कतर्नियाघाट के पांच बाघों की ट्रेन से कटने के कारण मौत हो चुकी है। जबकि एक मगरमच्छ और एक हाथी ने भी रेलवे ट्रैक पर दम तोड़ा है। एक अजगर की भी ट्रेन से कटने के कारण मौत हुई है। दो जंगली भालू और एक हिरन ने भी ट्रेन की चपेट में आकर दम तोड़ दिया था। वन विभाग की ओर से हाईकोर्ट में दायर किए गए मुकदमे में कतर्नियाघाट वन्यजीव क्षेत्र में मारे गए वन्यजीवों की सूचना पेश की गई थी। इसके अनुसार अभी तक करीब 20 चीतल, नीलगाय और जंगली सूकर की भी ट्रेन से कटने के कारण मौत होने की पुष्टि हुई है।

अब बढ़ेगा सुरक्षा का दायरा
उच्च न्यायालय की ओर से रेलवे को नानपारा-मैलानी रेल खंड पर ट्रेन का संचालन बंद किए जाने के आदेश दिए गए हैं। रेलवे ट्रैक पर आए दिन वन्यजीवों की मौत होती थी। हाईकोर्ट की ओर से वन्यजीवों के मौत के संबंध में सूचना मांगी गई थी। जिसके बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए थे। अब हाईकोर्ट ने ट्रेन बंद करने का आदेश देकर वन्यजीवों की सुरक्षा को बढ़ाए जाने का काम किया है। वन विभाग भी वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में प्रतिदिन पूरे संसाधनों के साथ जुटा हुआ है।
- जीपी सिंह, डीएफओ
कब-कब हुई बाघ की मौत
एक मई 2001- कतर्नियाघाट रेंज
26 अगस्त 2002- मोतीपुर रेंज
22 मार्च 2005- कतर्नियाघाट रेंज
पांच सितंबर 2008 कतर्नियाघाट रेंज
19 अगस्त 2017 कतर्नियाघाट रेंज
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