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रानीपुरवा में दलित परिवार ने किया धर्मांतरण, ईसाई धर्म प्रचारक गिरफ्तार
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रुपईडीहा (बहराइच)। भारत-नेपाल सीमा से सटे रानीपुरवा गांव में एक दलित ने पत्नी के इलाज के लिए परिवार समेत धर्मांतरण कर लिया। इसका खुलासा होने पर सोमवार को हड़कंप मच गया।
पुलिस, खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ हिंदू संगठनों के लोग भी गांव पहुंचे। परिवार को समझाया। पुलिस ने सीमा क्षेत्र में सक्रिय ईसाई धर्म प्रचारक को गिरफ्तार कर जांच शुरू की है। इस मामले में केस दर्ज कर किया गया है।
सीमावर्ती क्षेत्र में धर्मांतरण थम नहीं रहा है। ईसाई मिशनरियां चोरी, छिपे दलित व गरीब परिवारों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन करवा रही हैं।
रुपईडीहा थाना अंतर्गत रानीपुरवा गांव निवासी रमेश गौतम ने परिवार समेत ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया। वह प्रत्येक शनिवार व रविवार को प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए नेपाल सीमा पर स्थित जैसपुर के चर्च में जाता है।
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इसका खुलासा सोमवार को होने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सकते में आ गईं। हिंदू संगठनों के लोग भी भौचक रह गए।
आननफानन में रुपईडीहा थाने के प्रभारी निरीक्षक मधुपनाथ मिश्र, खुफिया एजेंसियों के अधिकारी व हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों ने रमेश के घर पहुंचकर हकीकत जानने की कोशिश की।
पता चला कि पत्नी अरसे से बीमार है। चार माह पहले सीमा पर स्थित एक मिशन अस्पताल के कर्मचारी धर्मेंद्र सिंह ने उसे धर्म परिवर्तन करने की सलाह दी। कहा कि लाभ होने पर वह आगे निर्णय लें।
रमेश का कहना है कि नेपाल के जैसपुर में स्थित चर्च में परिवार समेत वह जाने लगा। धर्मेंद्र के बताए अनुरूप प्रार्थनाएं हुईं।
इसके बाद लाभ होने पर उसने घर में स्थित देवी-देवताओं के फोटो और प्रतिमाओं को लपेटकर रख दिया। रमेश का कहना है कि तब से वह निरंतर नेपाल के चर्च में प्रार्थना सभा कर रहा है।
प्रभारी थानाध्यक्ष मधुपनाथ मिश्र व खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने रमेश को समझाया। हिंदू संगठनों के रमेश अमलानी, रतन अग्रवाल के अलावा अन्य पदाधिकारियों ने भी रमेश से बातचीत की।
लेकिन उसने सोचकर बताने की बात कही। हालांकि, रमेश द्वारा यह सब लिखित देने के बाद पुलिस ने ईसाई धर्म प्रचारक धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ धारा 295ए/153ए के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण रवींद्र कुमार सिंह ने बताया कि मामले पर नजर रखी जा रही है।
‘धर्म परिवर्तन के लिए पैसे का दिया था लालच’
रमेश ने बताया कि चार माह पहले पत्नी आरती को दिखाने के लिए वह सीमा पर स्थित मिशन अस्पताल गया था। वहीं पर धर्मेंद्र से मुलाकात हुई थी।
उसने ईसाई धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि घर से कैलेंडर आदि हटाकर यीशू की पूजा करो, लाभ होगा। रमेश के मुताबिक धर्मेंद्र ने पत्नी के गले में पड़ी ताबीज को निलकवाकर फेंकवा दिया था। पैसे का भी लालच दिया था।
नेपाल में मकान किराये पर लेकर रह रहा था आरोपी
अपर पुलिस अधीक्षक रवींद्र कुमार सिंह ने बताया कि धर्मेंद्र सिंह दिल्ली के स्वरूप नगर का निवासी है। वह रुपईडीहा में स्थित प्रेम सेवा मिशन हॉस्पिटल में काम करता है।
यह हॉस्पिटल क्रिस्चियन द्वारा संचालित किया जाता है। उन्होंने कहा कि रमेश की शिकायत के बाद आरोपी धर्मेंद्र को हॉस्पिटल के सामने से गिरफ्तार किया गया है। वर्तमान में धर्मेंद्र नेपाल के जैसपुर में मकान किराये पर लेकर रह रहा है।
परिवार में हैं चार सदस्य
रमेश काफी गरीब है। वह मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता है। रमेश के घर में उसकी पत्नी आरती, पुत्र शिवम (6) व पुत्री रूपा (8) हैं।
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पुलिस, खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ हिंदू संगठनों के लोग भी गांव पहुंचे। परिवार को समझाया। पुलिस ने सीमा क्षेत्र में सक्रिय ईसाई धर्म प्रचारक को गिरफ्तार कर जांच शुरू की है। इस मामले में केस दर्ज कर किया गया है।
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सीमावर्ती क्षेत्र में धर्मांतरण थम नहीं रहा है। ईसाई मिशनरियां चोरी, छिपे दलित व गरीब परिवारों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन करवा रही हैं।
रुपईडीहा थाना अंतर्गत रानीपुरवा गांव निवासी रमेश गौतम ने परिवार समेत ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया। वह प्रत्येक शनिवार व रविवार को प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए नेपाल सीमा पर स्थित जैसपुर के चर्च में जाता है।
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इसका खुलासा सोमवार को होने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सकते में आ गईं। हिंदू संगठनों के लोग भी भौचक रह गए।
आननफानन में रुपईडीहा थाने के प्रभारी निरीक्षक मधुपनाथ मिश्र, खुफिया एजेंसियों के अधिकारी व हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों ने रमेश के घर पहुंचकर हकीकत जानने की कोशिश की।
पता चला कि पत्नी अरसे से बीमार है। चार माह पहले सीमा पर स्थित एक मिशन अस्पताल के कर्मचारी धर्मेंद्र सिंह ने उसे धर्म परिवर्तन करने की सलाह दी। कहा कि लाभ होने पर वह आगे निर्णय लें।
रमेश का कहना है कि नेपाल के जैसपुर में स्थित चर्च में परिवार समेत वह जाने लगा। धर्मेंद्र के बताए अनुरूप प्रार्थनाएं हुईं।
इसके बाद लाभ होने पर उसने घर में स्थित देवी-देवताओं के फोटो और प्रतिमाओं को लपेटकर रख दिया। रमेश का कहना है कि तब से वह निरंतर नेपाल के चर्च में प्रार्थना सभा कर रहा है।
प्रभारी थानाध्यक्ष मधुपनाथ मिश्र व खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने रमेश को समझाया। हिंदू संगठनों के रमेश अमलानी, रतन अग्रवाल के अलावा अन्य पदाधिकारियों ने भी रमेश से बातचीत की।
लेकिन उसने सोचकर बताने की बात कही। हालांकि, रमेश द्वारा यह सब लिखित देने के बाद पुलिस ने ईसाई धर्म प्रचारक धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ धारा 295ए/153ए के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण रवींद्र कुमार सिंह ने बताया कि मामले पर नजर रखी जा रही है।
‘धर्म परिवर्तन के लिए पैसे का दिया था लालच’
रमेश ने बताया कि चार माह पहले पत्नी आरती को दिखाने के लिए वह सीमा पर स्थित मिशन अस्पताल गया था। वहीं पर धर्मेंद्र से मुलाकात हुई थी।
उसने ईसाई धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि घर से कैलेंडर आदि हटाकर यीशू की पूजा करो, लाभ होगा। रमेश के मुताबिक धर्मेंद्र ने पत्नी के गले में पड़ी ताबीज को निलकवाकर फेंकवा दिया था। पैसे का भी लालच दिया था।
नेपाल में मकान किराये पर लेकर रह रहा था आरोपी
अपर पुलिस अधीक्षक रवींद्र कुमार सिंह ने बताया कि धर्मेंद्र सिंह दिल्ली के स्वरूप नगर का निवासी है। वह रुपईडीहा में स्थित प्रेम सेवा मिशन हॉस्पिटल में काम करता है।
यह हॉस्पिटल क्रिस्चियन द्वारा संचालित किया जाता है। उन्होंने कहा कि रमेश की शिकायत के बाद आरोपी धर्मेंद्र को हॉस्पिटल के सामने से गिरफ्तार किया गया है। वर्तमान में धर्मेंद्र नेपाल के जैसपुर में मकान किराये पर लेकर रह रहा है।
परिवार में हैं चार सदस्य
रमेश काफी गरीब है। वह मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता है। रमेश के घर में उसकी पत्नी आरती, पुत्र शिवम (6) व पुत्री रूपा (8) हैं।