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Bahraich News: छोड़ा गया 3.6 लाख क्यूसेक पानी, सरयू लाल निशान से 49 सेमी ऊपर
Thu, 11 Jul 2024 02:42 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Thu, 11 Jul 2024 02:42 AM IST
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महसी के कोड़वा में घट रहा बाढ़ का पानी।
बहराइच/महसी/मिहींपुरवा। बारिश थमने के साथ ही सरयू के जलस्तर में भले ही कमी आई हो लेकिन अब भी सरयू खतरे के निशान से 49 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। तीनों बैराजों से पानी छोड़े जाने का सिलसिला लगातार जारी है। जिससे बाढ़ प्रभावित गांवों के लाखों लोगों की धुकधुकी बढ़ी है। सभी कुछ दिनों तक बारिश न होने की प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं, जिन गांवों में बाढ़ का पानी घुसा था, वहां कीचड़, रास्तों के कटने और राशन भीगने से लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
बीते तीन दिनों से बारिश न होने से सरयू के जलस्तर में तेजी से कमी आई है। जिन गांवों में बाढ़ का पानी दाखिल हुआ था, वहां से बाढ़ का पानी तेजी से वापस हो रहा है। बावजूद इसके बाढ़ प्रभावित लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र से बाढ़ का पानी तो निकल गया है, लेकिन आम लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। बाढ़ के पानी से दर्जनों कच्चे रास्ते जगह-जगह से कट गए हैं और आवागमन बाधित है।
वहीं, मझरा, गिरगिट्टी, जोगिनिया आदि गांवों में नदी का जलस्तर घटने से कटान तेज हो गई है, जिससे ग्रामीणों में दहशत है। लोगों की खाने-पीने की चीजें पानी से खराब होने व कीचड़ से ग्रामीण परेशान हैं। एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की फसल, घर व खेती को हुए नुकसान का राजस्व टीमें सर्वे कर रही हैं। पात्र लोगों को शासन से मदद दिलाई जाएगी।
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दो दर्जन गांवों में अब भी भरा है बाढ़ का पानी
महसी तहसील क्षेत्र में बाढ़ का पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को भी तहसील क्षेत्र के पंचदेवरी, गरेटी, मैकुपुरवा, खोजवा, रामसहायपुरवा, बदनपुरवा, दुबहा, कोटिया, लीलापुरवा, केवलपुर, मुरौवा, पिंपरी, कोढवा, पिपरा, कायमपुर, जरमापुर, टिकुरी, कुरमिनपुरवा समेत दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी भरा रहा। हांलांकि, पहले की अपेक्षा बाढ़ के पानी में कुछ कमी होने की बात ग्रामीण कह रहे हैं। लेकिन दुश्वारियां अभी भी बनी हुईं हैं। रास्तों पर पानी भरने से जहां आवागमन प्रभावित है, वहीं किसानों की धान की नर्सरी चौपट होने का भी खतरा बना हुआ है। तहसीलदार महसी रविकांत द्विवेदी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व कर्मियों द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। लोगों के स्वास्थ्य से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
पानी छोड़े जाने का सिलसिला जारी
जिले के तीनों बैराजों से सरयू में पानी छोड़े जाने का सिलसिला अनवरत जारी है। बुधवार को सुबह शारदा बैराज से 2,30,676, गिरिजा बैराज से 1,28,600 और सरयू बैराज से 1,937 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। तीनों बैराजों से कुल 3.6 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जिससे सुबह एल्गिन ब्रिज पर मंगलवार की अपेक्षा सरयू खतरे के निशान से दो सेंटीमीटर अधिक बढ़ गई। मंगलवार को 53 सेमीमीटर की अपेक्षा सुबह सरयू खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर ऊपर रही। हांलांकि, शाम को जलसतर में कमी आई और शाम को सरयू एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 49 सेंटीमीटर ऊपर रही। शाम को एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान 106.07 की अपेक्षा सरयू का जलस्तर 106.56 दर्ज किया गया।
मंडराया संक्रामक बीमारियों का खतरा
खैरीघाट। शिवपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत अंबरपुर, तिगड़ा, शिवपुर, बौंड़ी, मांझा दरिया बुर्द, चौकसाहार, बेलामकन, बकैना, बांसगढ़ी, धनावा, बहदुरिया,गरेठी गुरुदत्त सिंह, पचदेवरी, मैकूपुरवा, अंगरौरा दुबहा आदि में बाढ़ का पानी भर गया था। जलस्तर घटने के साथ ही निकल गया है, लेकिन अपने पीछे संक्रामक बीमारियों का खतरा छोड़ गया है। गांवों के गड्ढों व खाली स्थानों में अब भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिससे मच्छरजनित बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। साथ ही लोगों के घरों व विद्यालयों में अभी भी कीचड़ की समस्या बनी हुई है। संवाद
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बीते तीन दिनों से बारिश न होने से सरयू के जलस्तर में तेजी से कमी आई है। जिन गांवों में बाढ़ का पानी दाखिल हुआ था, वहां से बाढ़ का पानी तेजी से वापस हो रहा है। बावजूद इसके बाढ़ प्रभावित लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र से बाढ़ का पानी तो निकल गया है, लेकिन आम लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। बाढ़ के पानी से दर्जनों कच्चे रास्ते जगह-जगह से कट गए हैं और आवागमन बाधित है।
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वहीं, मझरा, गिरगिट्टी, जोगिनिया आदि गांवों में नदी का जलस्तर घटने से कटान तेज हो गई है, जिससे ग्रामीणों में दहशत है। लोगों की खाने-पीने की चीजें पानी से खराब होने व कीचड़ से ग्रामीण परेशान हैं। एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की फसल, घर व खेती को हुए नुकसान का राजस्व टीमें सर्वे कर रही हैं। पात्र लोगों को शासन से मदद दिलाई जाएगी।
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दो दर्जन गांवों में अब भी भरा है बाढ़ का पानी
महसी तहसील क्षेत्र में बाढ़ का पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को भी तहसील क्षेत्र के पंचदेवरी, गरेटी, मैकुपुरवा, खोजवा, रामसहायपुरवा, बदनपुरवा, दुबहा, कोटिया, लीलापुरवा, केवलपुर, मुरौवा, पिंपरी, कोढवा, पिपरा, कायमपुर, जरमापुर, टिकुरी, कुरमिनपुरवा समेत दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी भरा रहा। हांलांकि, पहले की अपेक्षा बाढ़ के पानी में कुछ कमी होने की बात ग्रामीण कह रहे हैं। लेकिन दुश्वारियां अभी भी बनी हुईं हैं। रास्तों पर पानी भरने से जहां आवागमन प्रभावित है, वहीं किसानों की धान की नर्सरी चौपट होने का भी खतरा बना हुआ है। तहसीलदार महसी रविकांत द्विवेदी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व कर्मियों द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। लोगों के स्वास्थ्य से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
पानी छोड़े जाने का सिलसिला जारी
जिले के तीनों बैराजों से सरयू में पानी छोड़े जाने का सिलसिला अनवरत जारी है। बुधवार को सुबह शारदा बैराज से 2,30,676, गिरिजा बैराज से 1,28,600 और सरयू बैराज से 1,937 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। तीनों बैराजों से कुल 3.6 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जिससे सुबह एल्गिन ब्रिज पर मंगलवार की अपेक्षा सरयू खतरे के निशान से दो सेंटीमीटर अधिक बढ़ गई। मंगलवार को 53 सेमीमीटर की अपेक्षा सुबह सरयू खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर ऊपर रही। हांलांकि, शाम को जलसतर में कमी आई और शाम को सरयू एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 49 सेंटीमीटर ऊपर रही। शाम को एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान 106.07 की अपेक्षा सरयू का जलस्तर 106.56 दर्ज किया गया।
मंडराया संक्रामक बीमारियों का खतरा
खैरीघाट। शिवपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत अंबरपुर, तिगड़ा, शिवपुर, बौंड़ी, मांझा दरिया बुर्द, चौकसाहार, बेलामकन, बकैना, बांसगढ़ी, धनावा, बहदुरिया,गरेठी गुरुदत्त सिंह, पचदेवरी, मैकूपुरवा, अंगरौरा दुबहा आदि में बाढ़ का पानी भर गया था। जलस्तर घटने के साथ ही निकल गया है, लेकिन अपने पीछे संक्रामक बीमारियों का खतरा छोड़ गया है। गांवों के गड्ढों व खाली स्थानों में अब भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिससे मच्छरजनित बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। साथ ही लोगों के घरों व विद्यालयों में अभी भी कीचड़ की समस्या बनी हुई है। संवाद