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घाघरा में समाए 22 मकान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 17 Aug 2016 11:44 PM IST
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घाघरा की लहरों का कहर थम नहीं रहा है। मंगलवार रात से अब तक नदी ने कटान करते हुए कहारनपुरवा व बांसगढ़ी चुरईपुरवा गांव को भी निशाने पर ले लिया है। पूर्व प्रधान समेत 22 ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हो गए हैं। कटान से कायमपुर में प्राथमिक विद्यालय का अस्तित्व भी खत्म होने के कगार पर है। महज एक दीवार बची है।
एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। महसी तहसील के कहारनपुरवा गांव में बुधवार को आठ मकान नदी में समाहित हो गए। ग्रामीणों ने जैसे-तैसे अपनी गृहस्थी बचायी। बांसगढ़ी चुरपई पुरवा गांव भी नदी के निशाने पर आ गया है।
गांव के पूर्व प्रधान आल्हा उर्फ तेजनरायन का मकान भी नदी में समाहित हो गया है। इसके अलावा पुत्तनलाल, बुधिसागर, बांकेलाल, जगदंबा प्रसाद, श्याम नरायन, गोवर्द्धन, लालू, रामसागर, रमेश, सुशील, बांकेलाल, छोटे समेत 14 मकान कटान की भेंट चढ़े हैं। मकान के साथ खेती योग्य जमीन भी नदी की लहरों में समाहित हो रही है।
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रात से अब तक 90 बीघा खेत को नदी लील चुकी है। कैसरगंज और जरवल क्षेत्र में भी खेती योग्य जमीन में नदी कटान कर रही है। राहत व बचाव के कोई उपाय नहीं दिख रहे हैं। समाजसेवी राजेश त्रिपाठी का कहना है कि क्षेत्र के लोगों की मदद से कटान पीड़ितों के लिए भोजन आदि का इंतजाम करवाया जा रहा है। प्रशासनिक मदद पूरी तरह नाकाफी साबित हो रही है।
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एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। महसी तहसील के कहारनपुरवा गांव में बुधवार को आठ मकान नदी में समाहित हो गए। ग्रामीणों ने जैसे-तैसे अपनी गृहस्थी बचायी। बांसगढ़ी चुरपई पुरवा गांव भी नदी के निशाने पर आ गया है।
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गांव के पूर्व प्रधान आल्हा उर्फ तेजनरायन का मकान भी नदी में समाहित हो गया है। इसके अलावा पुत्तनलाल, बुधिसागर, बांकेलाल, जगदंबा प्रसाद, श्याम नरायन, गोवर्द्धन, लालू, रामसागर, रमेश, सुशील, बांकेलाल, छोटे समेत 14 मकान कटान की भेंट चढ़े हैं। मकान के साथ खेती योग्य जमीन भी नदी की लहरों में समाहित हो रही है।
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रात से अब तक 90 बीघा खेत को नदी लील चुकी है। कैसरगंज और जरवल क्षेत्र में भी खेती योग्य जमीन में नदी कटान कर रही है। राहत व बचाव के कोई उपाय नहीं दिख रहे हैं। समाजसेवी राजेश त्रिपाठी का कहना है कि क्षेत्र के लोगों की मदद से कटान पीड़ितों के लिए भोजन आदि का इंतजाम करवाया जा रहा है। प्रशासनिक मदद पूरी तरह नाकाफी साबित हो रही है।