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दिव्यांग परीक्षण शिविर में चिकित्सकों के इंतजार में बैठे रहे दिव्यांग
Updated Tue, 20 Jun 2017 03:04 AM IST
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परीक्षण शिविर में डॉक्टरों के इंतजार में बैठे रहे दिव्यांग
पूरा दिन बीतने के बाद भी चिकित्सक व अधिकारी नहीं पहुंचे
बिना परीक्षण के वापस लौट गए दिव्यांग
पयागपुर (बहराइच)। पयागपुर ब्लॉक मुख्यालय पर सोमवार को दिव्यांग परीक्षण व पंजीयन शिविर आयोजित हुआ। जिसमें भारी अव्यवस्था रही। शिविर में न तो चिकित्सक पहुंचे और न अधिकारी। जिससे दिव्यांगों का न तो परीक्षण हो सका और न ही उन्हें प्रमाण पत्र मिल सका। अधिकारियों की इस हीलाहवाली पर दिव्यांग क्षुब्ध दिखे।
तहसील स्तरीय कार्यक्रम में जिला स्तरीय एक भी अधिकारी व चिकित्सक नहीं पहुंचा। जिससे दिव्यांग सुबह से दोपहर तीन बजे तक चिकित्सकों के इंतजार में धूप में बैठे रहे। दिव्यांग विभाग के एकमात्र लिपिक संतोष शुक्ला अपने सहयोगी के साथ पहुंचे। उन्होंने सिर्फ दिव्यांगजनों का पंजीयन किया। लेकिन चिकित्सकों के नहीं आने से न तो दिव्यांगों का परीक्षण हो सका न ही प्रमाण पत्र जारी हुआ। डॉक्टरों के शिविर में न पहुंचने पर दिव्यांगों व उनके परिवारीजनों में आक्रोश दिखा। विभाग की ओर से शिविर स्थल पर न तो टेंट की व्यवस्था थी न ही पानी। बड़े पैमाने पर अव्यवस्थाएं दिखीं।
शिविर में आई ग्राम खुनौरा की सुनीता, लहरौरा के रामनरेश, हंसुवापारा के रामप्यारे, गोकुल प्रसाद, गंगवल के राजकुमार समेत 100 से अधिक दिव्यांग निराश होकर बिना परीक्षण के घर वापस लौट गए। सभी ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की बात कही है। इस बारे में खंड विकास अधिकारी अमित कुमार मिश्र से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह अवकाश पर हैं, उन्हें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है।
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पूरा दिन बीतने के बाद भी चिकित्सक व अधिकारी नहीं पहुंचे
बिना परीक्षण के वापस लौट गए दिव्यांग
पयागपुर (बहराइच)। पयागपुर ब्लॉक मुख्यालय पर सोमवार को दिव्यांग परीक्षण व पंजीयन शिविर आयोजित हुआ। जिसमें भारी अव्यवस्था रही। शिविर में न तो चिकित्सक पहुंचे और न अधिकारी। जिससे दिव्यांगों का न तो परीक्षण हो सका और न ही उन्हें प्रमाण पत्र मिल सका। अधिकारियों की इस हीलाहवाली पर दिव्यांग क्षुब्ध दिखे।
तहसील स्तरीय कार्यक्रम में जिला स्तरीय एक भी अधिकारी व चिकित्सक नहीं पहुंचा। जिससे दिव्यांग सुबह से दोपहर तीन बजे तक चिकित्सकों के इंतजार में धूप में बैठे रहे। दिव्यांग विभाग के एकमात्र लिपिक संतोष शुक्ला अपने सहयोगी के साथ पहुंचे। उन्होंने सिर्फ दिव्यांगजनों का पंजीयन किया। लेकिन चिकित्सकों के नहीं आने से न तो दिव्यांगों का परीक्षण हो सका न ही प्रमाण पत्र जारी हुआ। डॉक्टरों के शिविर में न पहुंचने पर दिव्यांगों व उनके परिवारीजनों में आक्रोश दिखा। विभाग की ओर से शिविर स्थल पर न तो टेंट की व्यवस्था थी न ही पानी। बड़े पैमाने पर अव्यवस्थाएं दिखीं।
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शिविर में आई ग्राम खुनौरा की सुनीता, लहरौरा के रामनरेश, हंसुवापारा के रामप्यारे, गोकुल प्रसाद, गंगवल के राजकुमार समेत 100 से अधिक दिव्यांग निराश होकर बिना परीक्षण के घर वापस लौट गए। सभी ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की बात कही है। इस बारे में खंड विकास अधिकारी अमित कुमार मिश्र से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह अवकाश पर हैं, उन्हें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है।
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