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नई तबादला नीति से 3600 गैर जनपद शिक्षकों के अरमान पर फिरा पानी
Updated Thu, 15 Jun 2017 12:20 AM IST
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3600 शिक्षकों के अरमानों पर फिरा पानी
नई तबादला नीति से महज 170 शिक्षक ही करवा पाएंगे तबादला
अमर उजाला ब्यूरो
बहराइच। बेसिक शिक्षा विभाग की नई तबादला नीति के चलते जिले के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे 3600 गैर जनपद के शिक्षकों के अरमानों पर पानी फिर गया है। पांच साल पूरा न होने के चलते उनका स्थानांतरण नहीं हो सकेगा। महज 170 शिक्षक ही नई तबादला नीति के दायरे में आ रहे हैं। आवेदन करने पर उन्हें स्थानांतरण का लाभ मिल सकेगा।
जिले के 14 विकास खंडों में 2470 प्राथमिक और 983 जूनियर विद्यालय स्थापित हैं। इन स्कूलों में 379729 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इस छात्र संख्या के सापेक्ष जिले में लगभग 13 हजार शिक्षकों की जरूरत है। इनमें हेड मास्टर और सहायक अध्यापक शामिल हैं। नई शिक्षा नीति के तहत 30 छात्र पर एक शिक्षक की अनिवार्यता है। इसके तहत अब तक स्कूलों में मानक पूरे नहीं हुए हैं। प्राथमिक विद्यालयों में 6800 और जूनियर विद्यालयों में 2200 शिक्षक तैनात हैं। गौरतलब हो कि जिले में 3900 शिक्षकों की भर्ती हुई है। इनमें मौजूदा शिक्षकों में 3770 शिक्षक मऊ, मेरठ, गाजियाबाद, इटावा, कानपुर, आगरा, बुलंदशहर, फतेहपुर, बाराबंकी, आजमगढ़, सीतापुर, बलिया, गोरखपुर आदि जनपदों के हैं। मेरिट लिस्ट कम होने के चलते इन जिलों के आवेदकों को बहराइच के प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति मिल गई। मुश्किल से दो से तीन साल बीत रहे हैं। यह शिक्षक अपने जिले में जाने को आतुर हैं। पुरानी तबादला नीति के तहत सभी अपने स्थानांतरण की तैयारी में जुटे थे। नई तबादला नीति जारी होने के बाद सभी की आशाओं पर पानी फिर गया है। मुश्किल से 170 शिक्षक ऐसे हैं जो नई तबादला नीति के दायरे में आ रहे हैं। ऐसे में 3600 शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं हो सकेगा।
अभी चार हजार शिक्षकों की जरूरत
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री विजय उपाध्याय का कहना है कि प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में छात्र संख्या के सापेक्ष 13 हजार शिक्षकों की जरूरत है। जबकि जिले में महज नौ हजार शिक्षक तैनात हैं। चार हजार शिक्षकों की जरूरत है। अगर स्थानांतरण हुआ तो और शिक्षक कम होंगे। ऐसे में प्राथमिक और जूनियर शिक्षा व्यवस्था चरमराएगी।
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नई स्थानांतरण नीति लागू की गई है, लेकिन उससे लाभ नहीं होने वाला। जनपद के अंदर जो स्थानांतरण होने हैं, उनमें भी अगड़े और पिछड़े विकास खंड की सूची बनाई जाएगी। ऐसे में शिक्षक जहां के तहां रह जाएंगे। नई स्थानांतरण नीति में काफी कमियां हैं। ऐसे में जिले के सिर्फ 170 शिक्षक ही लाभान्वित होंगे। अगर अन्य शिक्षकों का स्थानांतरण हुआ तो शिक्षकों की भारी कमी होगी। शिक्षण व्यवस्था चरमरा जाएगी। - विजय उपाध्याय, जिला मंत्री उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ
अभी नहीं मिला आदेश, शासनादेश के अनुरूप होगी कार्रवाई
स्थानांतरण के मामले में अभी शासन का आदेश नहीं मिला है। नई स्थानांतरण नीति के बारे में सुना जरूर है। ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। जो शिक्षक आवेदन करेंगे, उन पर विचार होगा। उनकी सेवा पुस्तिका देखी जाएगी। पांच साल की सेवा पूरा करने वाले शिक्षकों को ही लाभ मिलेगा। जनपद के अंदर स्थानांतरण के बारे में भी नियम निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई होगी।- डॉ. अमरकांत सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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नई तबादला नीति से महज 170 शिक्षक ही करवा पाएंगे तबादला
अमर उजाला ब्यूरो
बहराइच। बेसिक शिक्षा विभाग की नई तबादला नीति के चलते जिले के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे 3600 गैर जनपद के शिक्षकों के अरमानों पर पानी फिर गया है। पांच साल पूरा न होने के चलते उनका स्थानांतरण नहीं हो सकेगा। महज 170 शिक्षक ही नई तबादला नीति के दायरे में आ रहे हैं। आवेदन करने पर उन्हें स्थानांतरण का लाभ मिल सकेगा।
जिले के 14 विकास खंडों में 2470 प्राथमिक और 983 जूनियर विद्यालय स्थापित हैं। इन स्कूलों में 379729 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इस छात्र संख्या के सापेक्ष जिले में लगभग 13 हजार शिक्षकों की जरूरत है। इनमें हेड मास्टर और सहायक अध्यापक शामिल हैं। नई शिक्षा नीति के तहत 30 छात्र पर एक शिक्षक की अनिवार्यता है। इसके तहत अब तक स्कूलों में मानक पूरे नहीं हुए हैं। प्राथमिक विद्यालयों में 6800 और जूनियर विद्यालयों में 2200 शिक्षक तैनात हैं। गौरतलब हो कि जिले में 3900 शिक्षकों की भर्ती हुई है। इनमें मौजूदा शिक्षकों में 3770 शिक्षक मऊ, मेरठ, गाजियाबाद, इटावा, कानपुर, आगरा, बुलंदशहर, फतेहपुर, बाराबंकी, आजमगढ़, सीतापुर, बलिया, गोरखपुर आदि जनपदों के हैं। मेरिट लिस्ट कम होने के चलते इन जिलों के आवेदकों को बहराइच के प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति मिल गई। मुश्किल से दो से तीन साल बीत रहे हैं। यह शिक्षक अपने जिले में जाने को आतुर हैं। पुरानी तबादला नीति के तहत सभी अपने स्थानांतरण की तैयारी में जुटे थे। नई तबादला नीति जारी होने के बाद सभी की आशाओं पर पानी फिर गया है। मुश्किल से 170 शिक्षक ऐसे हैं जो नई तबादला नीति के दायरे में आ रहे हैं। ऐसे में 3600 शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं हो सकेगा।
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अभी चार हजार शिक्षकों की जरूरत
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री विजय उपाध्याय का कहना है कि प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में छात्र संख्या के सापेक्ष 13 हजार शिक्षकों की जरूरत है। जबकि जिले में महज नौ हजार शिक्षक तैनात हैं। चार हजार शिक्षकों की जरूरत है। अगर स्थानांतरण हुआ तो और शिक्षक कम होंगे। ऐसे में प्राथमिक और जूनियर शिक्षा व्यवस्था चरमराएगी।
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नई स्थानांतरण नीति लागू की गई है, लेकिन उससे लाभ नहीं होने वाला। जनपद के अंदर जो स्थानांतरण होने हैं, उनमें भी अगड़े और पिछड़े विकास खंड की सूची बनाई जाएगी। ऐसे में शिक्षक जहां के तहां रह जाएंगे। नई स्थानांतरण नीति में काफी कमियां हैं। ऐसे में जिले के सिर्फ 170 शिक्षक ही लाभान्वित होंगे। अगर अन्य शिक्षकों का स्थानांतरण हुआ तो शिक्षकों की भारी कमी होगी। शिक्षण व्यवस्था चरमरा जाएगी। - विजय उपाध्याय, जिला मंत्री उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ
अभी नहीं मिला आदेश, शासनादेश के अनुरूप होगी कार्रवाई
स्थानांतरण के मामले में अभी शासन का आदेश नहीं मिला है। नई स्थानांतरण नीति के बारे में सुना जरूर है। ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। जो शिक्षक आवेदन करेंगे, उन पर विचार होगा। उनकी सेवा पुस्तिका देखी जाएगी। पांच साल की सेवा पूरा करने वाले शिक्षकों को ही लाभ मिलेगा। जनपद के अंदर स्थानांतरण के बारे में भी नियम निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई होगी।- डॉ. अमरकांत सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी