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1874 महिलाएं एनीमिक, गर्भ पर खतरा
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Thu, 04 Feb 2016 10:24 PM IST
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बहराइच। तराई में कुपोषण व शिशु-मातृ मृत्युदर एक गंभीर समस्या है। कमोबेश यही स्थिति सूबे के अन्य जिलों की भी है। इस समस्या के जड़ तक पहुंचने व उसे खत्म करने के लिए शासन की ओर से हर जिले में मातृत्व सप्ताह का आयोजन किया।
स्वास्थ्य महकमे ने भी कार्यक्रम की सफलता के लिए लक्ष्य निर्धारित किए और पूर्ति के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम आयोजित कराया।
इस दौरान 33 हजार 55 गर्भवती महिलाओं की सेहत जांची गई। जांच से जो परिणाम सामने आए हैं, उससे स्वास्थ्य योजनाओं की पोल खुल गई है।
एक हजार 874 महिलाओं की सेहत व उनके गर्भ में पल रहे शिशु पर खतरा मंडरा रहा है। फिलहाल, विभाग ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर नजर रखने का दावा किया है।
27 जनवरी से तीन फरवरी तक आयोजित मातृत्व सप्ताह में विभाग ने जिले के 14 ब्लॉकों में 35 हजार 858 गर्भवती महिलाओं की सेहत जांचने का लक्ष्य रखा था। 33 हजार 55 महिलाओं की जांच हुई है।
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इस दौरान गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण बढ़ाने पर खासा जोर दिया गया। वजन की जांच, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, शुगर, टिटनस की जांच की गई और उन्हें आयरन गोली वितरित करते हुए पोषण संबंधित सलाह दी गई।
जांच में एक हजार 874 महिलाएं ऐसी सामने आई हैं, जिनमें खून की कमी है और इसी कारण उनका गर्भ भी खतरे में है। ऐसी महिलाओं को चिह्नित कर लिया गया है। डॉक्टरों ने इन हाई रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं को नियमित इलाज व परामर्श के लिए हाई सेंटरों को रेफर कर दिया है।
आज मनाया जाएगा एचआरपी डे
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी से पीड़ित एक हजार 874 महिलाओं के इलाज व उन्हें चिकित्सकीय परामर्श के लिए सीएचसी व जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
ऐसे में पांच फरवरी को जिले के सभी सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी डे (एचआरपी) मनाया जाएगा।
इस दौरान गर्भवती महिलाओं का इलाज होगा और उन्हें प्रसव की जटिलता से अवगत कराया जाएगा। नियमित अंतराल पर चेकअप के लिए सलाह दी जाएगी। आशा व एएनएम को इन एचआरपी महिलाओं पर विशेष नजर रखने की हिदायत दी गई है।
अतिरिक्त पुष्टाहार दिया जाएगा : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केबी जैन ने बताया कि मातृत्व सप्ताह के तहत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया है। स्वास्थ्य एवं पोषण की जांच हुई। उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध कराई गई।
एक हजार 874 महिलाएं एचआरपी से पीड़ित हैं। इन महिलाओं पर आशाओं व एएनएम के माध्यम से नियमित अंतराल पर नजर रखी जाएगी। उन्हें एंटीनेटल चेकअप के साथ अतिरिक्त पुष्टहार दिया जाएगा।
उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य सेवायें मुहैया कराया जाएगा। इससे संस्थागत प्रसव में बढ़ोत्तरी होगी और ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवसों में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।
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स्वास्थ्य महकमे ने भी कार्यक्रम की सफलता के लिए लक्ष्य निर्धारित किए और पूर्ति के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम आयोजित कराया।
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इस दौरान 33 हजार 55 गर्भवती महिलाओं की सेहत जांची गई। जांच से जो परिणाम सामने आए हैं, उससे स्वास्थ्य योजनाओं की पोल खुल गई है।
एक हजार 874 महिलाओं की सेहत व उनके गर्भ में पल रहे शिशु पर खतरा मंडरा रहा है। फिलहाल, विभाग ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर नजर रखने का दावा किया है।
27 जनवरी से तीन फरवरी तक आयोजित मातृत्व सप्ताह में विभाग ने जिले के 14 ब्लॉकों में 35 हजार 858 गर्भवती महिलाओं की सेहत जांचने का लक्ष्य रखा था। 33 हजार 55 महिलाओं की जांच हुई है।
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इस दौरान गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण बढ़ाने पर खासा जोर दिया गया। वजन की जांच, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, शुगर, टिटनस की जांच की गई और उन्हें आयरन गोली वितरित करते हुए पोषण संबंधित सलाह दी गई।
जांच में एक हजार 874 महिलाएं ऐसी सामने आई हैं, जिनमें खून की कमी है और इसी कारण उनका गर्भ भी खतरे में है। ऐसी महिलाओं को चिह्नित कर लिया गया है। डॉक्टरों ने इन हाई रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं को नियमित इलाज व परामर्श के लिए हाई सेंटरों को रेफर कर दिया है।
आज मनाया जाएगा एचआरपी डे
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी से पीड़ित एक हजार 874 महिलाओं के इलाज व उन्हें चिकित्सकीय परामर्श के लिए सीएचसी व जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
ऐसे में पांच फरवरी को जिले के सभी सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी डे (एचआरपी) मनाया जाएगा।
इस दौरान गर्भवती महिलाओं का इलाज होगा और उन्हें प्रसव की जटिलता से अवगत कराया जाएगा। नियमित अंतराल पर चेकअप के लिए सलाह दी जाएगी। आशा व एएनएम को इन एचआरपी महिलाओं पर विशेष नजर रखने की हिदायत दी गई है।
अतिरिक्त पुष्टाहार दिया जाएगा : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केबी जैन ने बताया कि मातृत्व सप्ताह के तहत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया है। स्वास्थ्य एवं पोषण की जांच हुई। उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध कराई गई।
एक हजार 874 महिलाएं एचआरपी से पीड़ित हैं। इन महिलाओं पर आशाओं व एएनएम के माध्यम से नियमित अंतराल पर नजर रखी जाएगी। उन्हें एंटीनेटल चेकअप के साथ अतिरिक्त पुष्टहार दिया जाएगा।
उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य सेवायें मुहैया कराया जाएगा। इससे संस्थागत प्रसव में बढ़ोत्तरी होगी और ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवसों में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।