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विद्यालय भवन न होने से पेड़ की छांव में पढ़ रहे छात्र
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मटेरा (बहराइच)। क्षेत्र के तीन गांवों में प्राथमिक विद्यालय के भवन जर्जर हैं। बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। इस मामले में शिक्षकों ने अधिकारियों को जानकारी दी।
कई बार रिपोर्ट भी भेजी लेकिन अब तक नवीन भवन नहीं बन सका है। बरसात के दिनों में इन स्कूलों का शिक्षण कार्य ठप रहता है या फिर आसपास के घरों में स्कूल लगता है। तीनों विद्यालय के 470 से अधिक छात्र-छात्राएं प्रभावित हैं।
जिले में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पटरी पर नहीं लौट पा रही हैं। कहीं विद्यालय में शिक्षक नहीं हैं तो कहीं शिक्षक हैं तो भवन नहीं है। इससे विद्यालय पढ़ने जाने वाले छात्र काफी परेशान हैं।
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विकासखंड रिसिया के प्राथमिक विद्यालय गंगापुरवा में 100 छात्र नामांकित हैं। यहां पर प्रधानाध्यापक मारूफ, सहायक अध्यापक सुनीता व प्रीती की तैनाती है।
लेकिन विद्यालय का भवन काफी पहले खंडहर में तब्दील हो गया। इससे इस विद्यालय के छात्र पेड़ की छांव में पढ़ने को मजबूर हैं। प्रतिदिन शिक्षिकाएं पेड़ के नीचे बच्चों को पढ़ा रही हैं।
कुछ यही हाल प्राथमिक विद्यालय नेवाज व गोंदूभार की है। नेवाज के शिक्षक रविचंद्र वर्मा ने बताया कि 125 छात्र नामांकित हैं। भवन जर्जर होने के कारण छात्रों को खुले में पढ़ाना पड़ता है।
गोंदूभार विद्यालय की प्रधानाध्यापक अंजनी कुमारी ने बताया कि 230 छात्र विद्यालय में पढ़ते हैं। लेकिन भवन काफी पुराना होने के साथ जर्जर है।
इससे विद्यालय के कमरों में छात्रों को न पढ़ाकर उन्हें पेड़ के नीचे पढ़ाया जा रहा है। इस मामले में शिक्षकों ने कई बार पत्राचार किया, लेकिन भवनों का निर्माण नहीं हो सका।
चुनाव बाद भवनों का होगा निर्माण
जिले के कई प्राथमिक विद्यालयों के भवन जर्जर हैं तो कई टूटे हैं। इसकी रिपोर्ट खंड शिक्षा अधिकारियों से मांगी गई थी। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। शासन की ओर से नवीन भवन निर्माण की मंजूरी मिल गई है। चुनाव के बाद इन विद्यालयों का निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।
-एसके तिवारी, बीएसए
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कई बार रिपोर्ट भी भेजी लेकिन अब तक नवीन भवन नहीं बन सका है। बरसात के दिनों में इन स्कूलों का शिक्षण कार्य ठप रहता है या फिर आसपास के घरों में स्कूल लगता है। तीनों विद्यालय के 470 से अधिक छात्र-छात्राएं प्रभावित हैं।
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जिले में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पटरी पर नहीं लौट पा रही हैं। कहीं विद्यालय में शिक्षक नहीं हैं तो कहीं शिक्षक हैं तो भवन नहीं है। इससे विद्यालय पढ़ने जाने वाले छात्र काफी परेशान हैं।
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विकासखंड रिसिया के प्राथमिक विद्यालय गंगापुरवा में 100 छात्र नामांकित हैं। यहां पर प्रधानाध्यापक मारूफ, सहायक अध्यापक सुनीता व प्रीती की तैनाती है।
लेकिन विद्यालय का भवन काफी पहले खंडहर में तब्दील हो गया। इससे इस विद्यालय के छात्र पेड़ की छांव में पढ़ने को मजबूर हैं। प्रतिदिन शिक्षिकाएं पेड़ के नीचे बच्चों को पढ़ा रही हैं।
कुछ यही हाल प्राथमिक विद्यालय नेवाज व गोंदूभार की है। नेवाज के शिक्षक रविचंद्र वर्मा ने बताया कि 125 छात्र नामांकित हैं। भवन जर्जर होने के कारण छात्रों को खुले में पढ़ाना पड़ता है।
गोंदूभार विद्यालय की प्रधानाध्यापक अंजनी कुमारी ने बताया कि 230 छात्र विद्यालय में पढ़ते हैं। लेकिन भवन काफी पुराना होने के साथ जर्जर है।
इससे विद्यालय के कमरों में छात्रों को न पढ़ाकर उन्हें पेड़ के नीचे पढ़ाया जा रहा है। इस मामले में शिक्षकों ने कई बार पत्राचार किया, लेकिन भवनों का निर्माण नहीं हो सका।
चुनाव बाद भवनों का होगा निर्माण
जिले के कई प्राथमिक विद्यालयों के भवन जर्जर हैं तो कई टूटे हैं। इसकी रिपोर्ट खंड शिक्षा अधिकारियों से मांगी गई थी। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। शासन की ओर से नवीन भवन निर्माण की मंजूरी मिल गई है। चुनाव के बाद इन विद्यालयों का निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।
-एसके तिवारी, बीएसए