{"_id":"5d0915608ebc3e22806b14b9","slug":"156087637110-bahraich-news60","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रचंड गर्मी में जिला अस्पताल व सीएचसी की पेयजल सुविधाएं ध्वस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रचंड गर्मी में जिला अस्पताल व सीएचसी की पेयजल सुविधाएं ध्वस्त
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बहराइच। सूरज की तपिश इस दौरान किसी भी इंसान की हलक सुखाने के लिए काफी है। हलक को तर करने के लिए शीतल जल ही आसरा है, लेकिन भीषण गर्मी के बाद भी जिला अस्पताल में पेयजल की सुविधाएं बदहाल हैं। मरीज व तीमारदार पानी की एक-एक बूंद के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। चालू हालत में सिर्फ एक हैंडपंप लोगों का सहारा है। यहां लगे वाटर कूलर भी खराब पड़े हैं। वहीं, जिले के सीएचसी व पीएचसी पर भी पेयजल की सुविधाएं बदतर हैं। इससे अस्पतालों में पहुंचने वाले रोगी और उनके तीमारदार बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
जिला अस्पताल में पेयजल की सुविधा के लिए नेत्र वार्ड, हड्डी वार्ड, इमरजेंसी ओपीडी के सामने व चिल्ड्रेन वार्ड के पास इंडिया मार्का हैंडपंप स्थापित हैं। इसके अलावा चिल्ड्रेन वार्ड, जनरल वार्ड तीन, इमरजेंसी ओपीडी के पास वाटर कूलर स्थापित हैं।
इसमें इमरजेंसी ओपीडी के पास स्थापित हैंडपंप व जनरल वार्ड तीन के पास लगा वाटर कूलर चालू हालत में है, लेकिन पानी पीने योग्य नहीं है। यहां तीमारदार नहाने, कपड़ा धोने का काम निपटाते हैं। अन्य हैँडपंप व वाटर कूलर खराब पड़े हैँ। हैंडपंप व वाटर कूलरों के इर्द-गिर्द गंदगी इतनी है कि गंध से खड़े हो पाना भी दुश्वार है। तीमारदारों को पीने का पानी लाने के लिए परिसर स्थित डॉक्टरों के घरों तक पहुंचना पड़ता है, जिससे कई बार मारपीट तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में तीमारदारों को बाजार से पानी की पाउच खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है।
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अस्पताल में सप्लाई का पानी पीने योग्य नहीं
जिला अस्पताल में वार्ड, ओपीडी व ऑपरेशन थिएटर में पानी की सप्लाई के लिए छतों पर टंकियां स्थापित हैं। लेकिन टंकियों को अस्पताल प्रशासन ने ढकने की जरूरत नहीं समझी, जिससे सप्लाई के पानी का इस्तेमाल हाथ धोने व अन्य कामों में किया जा रहा है। ऐसे में मरीजों में दूषित पानी पीकर और बीमार होने की आशंका बनी रहती है। इस बात की तस्दीक नाम न छापने की शर्त पर अस्पताल के डॉक्टर व कर्मी भी करते हैं।
जिला अस्पताल
बहराइच का जिला अस्पताल मंडल का मॉडल अस्पताल हैं, लेकिन यहां पेयजल सुविधाएं बदहाल हैं। परिसर में स्थापित चार हैंडपंपों में सिर्फ एक चालू हालत में है। जिस पर तीमारदारों की भीड़ जुटी रहती है। वाटर कूलर भी खराब पड़े हैं। जो एक वाटर कूलर सही है भी उससे गंदा पानी निकल रहा है। इस पानी का इस्तेमाल तीमारदार कपड़ा धोने में कर रहे हैं। पेयजल के लिए लोगों को निजी दुकानों से पानी की बोतल या पाउच खरीदना पड़ता है।
कैसरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
बहराइच-लखनऊ मार्ग पर स्थित कैसरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रतिदिन औसतन दो सौ से तीन सौ पचास मरीज इलाज की आस में पहुंचते हैं। यहां पेयजल के लिए वाटर कूलर की सुविधा नदारद है। हैंडपंप खराब हैं। ऐसे में मरीजों व तीमारदारों को पानी का इंतजाम बाहर बाजार में लगे हैंडपंप या पानी के पाउच को खरीद कर करना पड़ता है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय
मिहींपुरवा विकास खंड अंतर्गत उर्रा में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर पेयजल की सुविधा के लिए एक हैंडपंप स्थापित है। लेकिन वह अरसा पूर्व खराब हो गया था। इसके बाद जल निगम के कर्मचारी दो साल पूर्व हैंडपंप को उखाड़ ले गए थे। लेकिन अब तक हैंडपंप की स्थापना नहीं हो सकी है। चिकित्सालय के बगल में स्थित मंडी परिसर में लगे हैंडपंप से यहां आने वाले रोगियों व तीमारदारों का काम चलता था। लेकिन वह भी खराब पड़ा है।
रीबोर के लिए लिखा गया पत्र
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीके सिंह ने बताया कि खराब हैंडपंपों को रीबोर किए जाने के लिए जल निगम को पत्र लिखा गया है। पेयजल व्यवस्था शीघ्र ही दुरुस्त कर ली जाएंगी। अस्पताल के सभी वाटर कूलर पर बोझ अधिक है, जिससे वह बराबर पानी नहीं दे पा रहे। व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की कोशिश हो रही है।
दुरुस्त कराए जाएंगे स्वास्थ्य केंद्रों के हैंडपंप
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेश सिंह का कहना है कि गर्मी के पूर्व हैंडपंप सही करवाए गए थे। जो हैंडपंप खराब हुए हैं, उन्हें पुन: दुरुस्त कराया जाएगा। इस मामले में जल निगम को पत्र लिखेंगे।
दवा खरीदें या पानी, समझ में नहीं आ रहा
जिला अस्पताल में मरीज की देखरेख के लिए आए महसी निवासी गोपाल ने कहा कि हैंडपंप का पानी बदबूदार निकल रहा। एक घूंट पीते ही उबकायी छूट रही है। ऐसे में बाजार से पाउच और बोतल का पानी खरीदना पड़ रहा है। तेजवापुर निवासी तीमारदार राधेश्याम और गौरीशंकर ने कहा कि दवा खरीदें या पानी समझ में नहीं आ रहा। वाटर कूलर से ठंडा छोड़िए सादा पानी भी नहीं मिल पा रहा। एक हैंडपंप सही है। उस पर इतनी भीड़ कि पानी ले नहीं मिलता। ऐसे में बाजार से पानी खरीदना मजबूरी है।
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जिला अस्पताल में पेयजल की सुविधा के लिए नेत्र वार्ड, हड्डी वार्ड, इमरजेंसी ओपीडी के सामने व चिल्ड्रेन वार्ड के पास इंडिया मार्का हैंडपंप स्थापित हैं। इसके अलावा चिल्ड्रेन वार्ड, जनरल वार्ड तीन, इमरजेंसी ओपीडी के पास वाटर कूलर स्थापित हैं।
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इसमें इमरजेंसी ओपीडी के पास स्थापित हैंडपंप व जनरल वार्ड तीन के पास लगा वाटर कूलर चालू हालत में है, लेकिन पानी पीने योग्य नहीं है। यहां तीमारदार नहाने, कपड़ा धोने का काम निपटाते हैं। अन्य हैँडपंप व वाटर कूलर खराब पड़े हैँ। हैंडपंप व वाटर कूलरों के इर्द-गिर्द गंदगी इतनी है कि गंध से खड़े हो पाना भी दुश्वार है। तीमारदारों को पीने का पानी लाने के लिए परिसर स्थित डॉक्टरों के घरों तक पहुंचना पड़ता है, जिससे कई बार मारपीट तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में तीमारदारों को बाजार से पानी की पाउच खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है।
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अस्पताल में सप्लाई का पानी पीने योग्य नहीं
जिला अस्पताल में वार्ड, ओपीडी व ऑपरेशन थिएटर में पानी की सप्लाई के लिए छतों पर टंकियां स्थापित हैं। लेकिन टंकियों को अस्पताल प्रशासन ने ढकने की जरूरत नहीं समझी, जिससे सप्लाई के पानी का इस्तेमाल हाथ धोने व अन्य कामों में किया जा रहा है। ऐसे में मरीजों में दूषित पानी पीकर और बीमार होने की आशंका बनी रहती है। इस बात की तस्दीक नाम न छापने की शर्त पर अस्पताल के डॉक्टर व कर्मी भी करते हैं।
जिला अस्पताल
बहराइच का जिला अस्पताल मंडल का मॉडल अस्पताल हैं, लेकिन यहां पेयजल सुविधाएं बदहाल हैं। परिसर में स्थापित चार हैंडपंपों में सिर्फ एक चालू हालत में है। जिस पर तीमारदारों की भीड़ जुटी रहती है। वाटर कूलर भी खराब पड़े हैं। जो एक वाटर कूलर सही है भी उससे गंदा पानी निकल रहा है। इस पानी का इस्तेमाल तीमारदार कपड़ा धोने में कर रहे हैं। पेयजल के लिए लोगों को निजी दुकानों से पानी की बोतल या पाउच खरीदना पड़ता है।
कैसरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
बहराइच-लखनऊ मार्ग पर स्थित कैसरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रतिदिन औसतन दो सौ से तीन सौ पचास मरीज इलाज की आस में पहुंचते हैं। यहां पेयजल के लिए वाटर कूलर की सुविधा नदारद है। हैंडपंप खराब हैं। ऐसे में मरीजों व तीमारदारों को पानी का इंतजाम बाहर बाजार में लगे हैंडपंप या पानी के पाउच को खरीद कर करना पड़ता है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय
मिहींपुरवा विकास खंड अंतर्गत उर्रा में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर पेयजल की सुविधा के लिए एक हैंडपंप स्थापित है। लेकिन वह अरसा पूर्व खराब हो गया था। इसके बाद जल निगम के कर्मचारी दो साल पूर्व हैंडपंप को उखाड़ ले गए थे। लेकिन अब तक हैंडपंप की स्थापना नहीं हो सकी है। चिकित्सालय के बगल में स्थित मंडी परिसर में लगे हैंडपंप से यहां आने वाले रोगियों व तीमारदारों का काम चलता था। लेकिन वह भी खराब पड़ा है।
रीबोर के लिए लिखा गया पत्र
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीके सिंह ने बताया कि खराब हैंडपंपों को रीबोर किए जाने के लिए जल निगम को पत्र लिखा गया है। पेयजल व्यवस्था शीघ्र ही दुरुस्त कर ली जाएंगी। अस्पताल के सभी वाटर कूलर पर बोझ अधिक है, जिससे वह बराबर पानी नहीं दे पा रहे। व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की कोशिश हो रही है।
दुरुस्त कराए जाएंगे स्वास्थ्य केंद्रों के हैंडपंप
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेश सिंह का कहना है कि गर्मी के पूर्व हैंडपंप सही करवाए गए थे। जो हैंडपंप खराब हुए हैं, उन्हें पुन: दुरुस्त कराया जाएगा। इस मामले में जल निगम को पत्र लिखेंगे।
दवा खरीदें या पानी, समझ में नहीं आ रहा
जिला अस्पताल में मरीज की देखरेख के लिए आए महसी निवासी गोपाल ने कहा कि हैंडपंप का पानी बदबूदार निकल रहा। एक घूंट पीते ही उबकायी छूट रही है। ऐसे में बाजार से पाउच और बोतल का पानी खरीदना पड़ रहा है। तेजवापुर निवासी तीमारदार राधेश्याम और गौरीशंकर ने कहा कि दवा खरीदें या पानी समझ में नहीं आ रहा। वाटर कूलर से ठंडा छोड़िए सादा पानी भी नहीं मिल पा रहा। एक हैंडपंप सही है। उस पर इतनी भीड़ कि पानी ले नहीं मिलता। ऐसे में बाजार से पानी खरीदना मजबूरी है।