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...तो 1377 मतदाता कहां करेंगे वोट
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Fri, 10 Jul 2015 10:15 PM IST
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बिछिया (बहराइच)। पंचायत चुनाव की तैयारी के मद्देनजर इस समय मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से सटी विशुनापुर ग्राम पंचायत इस बार परिसीमन के बाद दो फाड़ में बंट गई है, जिसके चलते इस ग्राम पंचायत से जुड़े तीन वनग्रामों के 1377 मतदाता मझधार में फंस गए हैं।
सूची में इनके नाम नहीं दर्ज किए गए हैं। वन ग्रामीण बताकर बीएलओ किनारा कस रहे हैं, जबकि पिछले पंचायत चुनाव में इन वन ग्रामों के ग्रामीण चुनाव लड़ चुके हैं।
मतदान भी कर चुके हैं। बीडीओ ने इस मामले में हाथ खड़े कर लिए हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में सात वन ग्राम हैं। इन वनग्रामों के बाशिंदों को पहले न तो वोट करने का अधिकार था न ही चुनाव लड़ने का।
आधे दशक पूर्व शासन के हस्तक्षेप पर वन ग्रामीणों के नाम आसपास की ग्राम पंचायतों में दर्ज कर उन्हें मतदान का अधिकार प्रदान किया गया।
इसी के तहत वनग्राम बिछिया, भवानीपुर और कतर्नियाघाट के 1377 मतदाताओं का नाम ग्राम पंचायत विशुनापुर में जोड़ा गया था लेकिन इस बार परिसीमन के दौरान आबादी अधिक होने के चलते विशुनापुर ग्राम पंचायत दो फाड़ में बंट गई।
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विशुनापुर के अलावा आंबा ग्राम को पंचायत का दर्जा दे दिया गया लेकिन बिछिया, भवानीपुर और कतर्नियाघाट के वनग्रामों में निवास करने वाले मतदाताओं को किसी भी ग्राम पंचायत में नहीं जोड़ा गया।
पहले मतदाता सूची का प्रकाशन हो चुका है। इस समय मतदाता पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है। लेकिन, बीएलओ वन ग्रामीणों का नाम जोड़ने को तैयार नहीं हैं।
इससे इन गांवों के मतदाताओं की मुसीबत बन गई है। गांव निवासी सरोज यादव, सरोज गुप्ता, हबीबुर्रहमान समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों के दरवाजे खटखटाए लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला।
मतदाता सूची में नाम न दर्ज होने के चलते सभी 1377 मतदाता इस बार पंचायत चुनाव में वोट देने से वंचित रह जाएंगे।
शुक्रवार को ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी मिहींपुरवा नागेंद्रमोहनराम त्रिपाठी से वार्ता की तो उन्होंने भी हाथ खड़ा कर दिया। बोले कि वनग्राम को राजस्व ग्राम में नहीं जोड़ा सकता, इसके लिए शासन स्तर पर वार्ता चल रही है।
जांच के दिए निर्देश : एडीएम
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विद्याशंकर सिंह का कहना है कि वन ग्रामीणों का मामला सामने आया है।
किस तरह से वन ग्रामीणों को पहले राजस्व ग्राम से जोड़ा गया था, इसकी जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से सटी विशुनापुर ग्राम पंचायत इस बार परिसीमन के बाद दो फाड़ में बंट गई है, जिसके चलते इस ग्राम पंचायत से जुड़े तीन वनग्रामों के 1377 मतदाता मझधार में फंस गए हैं।
सूची में इनके नाम नहीं दर्ज किए गए हैं। वन ग्रामीण बताकर बीएलओ किनारा कस रहे हैं, जबकि पिछले पंचायत चुनाव में इन वन ग्रामों के ग्रामीण चुनाव लड़ चुके हैं।
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मतदान भी कर चुके हैं। बीडीओ ने इस मामले में हाथ खड़े कर लिए हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में सात वन ग्राम हैं। इन वनग्रामों के बाशिंदों को पहले न तो वोट करने का अधिकार था न ही चुनाव लड़ने का।
आधे दशक पूर्व शासन के हस्तक्षेप पर वन ग्रामीणों के नाम आसपास की ग्राम पंचायतों में दर्ज कर उन्हें मतदान का अधिकार प्रदान किया गया।
इसी के तहत वनग्राम बिछिया, भवानीपुर और कतर्नियाघाट के 1377 मतदाताओं का नाम ग्राम पंचायत विशुनापुर में जोड़ा गया था लेकिन इस बार परिसीमन के दौरान आबादी अधिक होने के चलते विशुनापुर ग्राम पंचायत दो फाड़ में बंट गई।
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विशुनापुर के अलावा आंबा ग्राम को पंचायत का दर्जा दे दिया गया लेकिन बिछिया, भवानीपुर और कतर्नियाघाट के वनग्रामों में निवास करने वाले मतदाताओं को किसी भी ग्राम पंचायत में नहीं जोड़ा गया।
पहले मतदाता सूची का प्रकाशन हो चुका है। इस समय मतदाता पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है। लेकिन, बीएलओ वन ग्रामीणों का नाम जोड़ने को तैयार नहीं हैं।
इससे इन गांवों के मतदाताओं की मुसीबत बन गई है। गांव निवासी सरोज यादव, सरोज गुप्ता, हबीबुर्रहमान समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों के दरवाजे खटखटाए लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला।
मतदाता सूची में नाम न दर्ज होने के चलते सभी 1377 मतदाता इस बार पंचायत चुनाव में वोट देने से वंचित रह जाएंगे।
शुक्रवार को ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी मिहींपुरवा नागेंद्रमोहनराम त्रिपाठी से वार्ता की तो उन्होंने भी हाथ खड़ा कर दिया। बोले कि वनग्राम को राजस्व ग्राम में नहीं जोड़ा सकता, इसके लिए शासन स्तर पर वार्ता चल रही है।
जांच के दिए निर्देश : एडीएम
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विद्याशंकर सिंह का कहना है कि वन ग्रामीणों का मामला सामने आया है।
किस तरह से वन ग्रामीणों को पहले राजस्व ग्राम से जोड़ा गया था, इसकी जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।