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कैमरे लगाने के लिए 120 स्थान चिन्हित

Mon, 10 Apr 2017 10:18 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
अमर उजाला/बहराइच Updated Mon, 10 Apr 2017 10:18 PM IST
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120 places marked for camera placement
जंगल में बैठा बाघ - फोटो : अमर उजाला
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में विचरण करने वाले वनराजों की गतिविधियां ऑटोमैटिक कैमरों में कैद होंगी। इसके लिए वन क्षेत्र में 120 स्थानों का चयन किया गया है। संरक्षित वन क्षेत्र में दो चरणों में कैमरे लगाए जाएंगे। डेढ़ माह में कैमरा ट्रैपिंग कार्य पूरा होगा। इसके बाद रिपोर्ट पर्यावरण वन मंत्रालय को भेजी जाएगी। 
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह वन क्षेत्र में सात रेजों में विभक्त है। इनमें मोतीपुर, ककरहा, मुर्तिहा, निशानगाड़ा, रमपुरवा, सुजौली और कतर्नियाघाट वन रेंज शामिल हैं। संरक्षित वन क्षेत्र के मुर्तिहा, निशानगाड़ा और कतर्नियाघाट रेंज ऐसे हैं, जिनकी आबोहवा बाघ और तेंदुओं को अधिक रास आती है। जिसके चलते इन तीनों रेजों में अधिकांशत: बाघों की दहाड़ सुनाई पड़ती है।
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ककरहा और मोतीपुर समेत अन्य वन रेंज में भी बाघ की आहट मिलती रहती हैं। इन रेंजों में बाघों की गिनती के लिए वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने कमान संभाली है। बाघों की गिनती कैमरा ट्रैपिंग के तहत ऑटोमैटिक थर्मों सेंसर कैमरों से की जाएगी। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह ने बताया कि 120 स्थान चिन्हित किए गए हैं। 20 अप्रैल तक चिन्हित सभी स्थानों पर ऑटोमैटिक थर्मो सेंसर कैमरे दो चरणों में लगाए जाएंगे।
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डेढ़ माह में कैमरा ट्रैपिंग विधि से बाघों की गतिविधियों को कैमरे में कैद किया जाएगा। जून के प्रथम पखवारे में ट्रैपिंग की रिपोर्ट पर्यावरण वन मंत्रालय को भेजी जाएगी। वन मंत्रालय ट्रैपिंग क्लिप का अध्ययन करने के बाद बाघों की गिनती को सार्वजनिक करेगा।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि 120 स्थानों पर 240 ऑटोमैटिक कैमरे लगेंगे। एक कैमरे से दूसरे कैमरा स्थल की दूरी दो किलोमीटर रखी जाएगी। ऑटोमैटिक कैमरों ने जंगल में क्या गतिविधियां चिप में कैद कीं। इसके लिए हर तीसरे दिन कैमरों से चिप निकालकर उसे कंप्यूटर में डाउनलोड कर सीडी बनाई जाएगी। यह सिलसिला डेढ़ माह चलेगा। 

परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने कहा कि देहरादून वाइल्ड लाइफ सेंटर के बाघ गणना विशेषज्ञ प्रणव चंचलानी और आशीष विष्टा कतर्नियाघाट में होने वाले कैमरा ट्रैपिंग में तकनीकी मदद करेंगे। इस टीम में सहायक परियोजनाधिकारी कंधई लाल और वह स्वयं भी रहेंगे। 

कैमरा ट्रैपिंग बाघों की गणना की अत्याधुनिक तकनीक है। एक बाघ की टेरीटरी (आवास परिक्षेत्र)15 वर्ग किलोमीटर माना जाता है। उसी टेरीटरी में इस बार दो किलोमीटर के अंतराल पर कैमरे लगाए जाएंगे। यह कैमरे सामने से गुजरने वाले बाघ की तस्वीर कैद कर लेंगे। प्रत्येक बाघ की धारियां अलग होती हैं। इन्हीं धारियों के सहारे बाघों की संख्या का आंकलन किया जाएगा। 



बाघों की गणना एक नजर में-
-वर्ष 2005 में डब्ल्यूआईआई ने बाघों की गणना की थी। 58 बाघ मिले थे। 
-2007-08 में वन विभाग ने गणना की तैयारीकी थी। लेकिन बरसात के कारण गणना स्थगित हुई थी।
-वर्ष 2011 में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने कैमरा ट्रैपिंग के द्वारा 40 स्थानों पर कैमरे लगाकर बाघों की गिनती की। जिसमें प्रति 100 वर्ग किलोमीटर घनत्व में 6.53 बाघ होने की पुष्टि हुई। इसके तहत बाघों की संख्या 35 के ग्राफ तक पहुंची। 
- वर्ष 2014 में हुए ट्रैपिंग में बाघों की संख्या 45 के आसपास होने का अनुमान लगा था।
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