फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Wounds from Corona will not heal for a lifetime

कोरोना का एक साल : जीवन भर नहीं भरेंगे कोरोना से मिले जख्म

Sun, 21 Mar 2021 12:35 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Mar 2021 12:35 AM IST
विज्ञापन
Wounds from Corona will not heal for a lifetime
बागपत में 27 मार्च 2020 को बंद पडा गांधी बाजार का फाइल फोटो - फोटो : BAGHPAT
- लोगों को नसीब नहीं हुए अपनों के अंतिम दर्शन
विज्ञापन

- इलाज के लिए भी झेलनी पड़ी थी मुसीबतें
बागपत। कोरोना ने लोगों को ऐसा दर्द दिया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। कोरोना काल में काफी लोग अपनों से बिछुड़ गए। कई परिवार अपनों को अंतिम कंधा तक नहीं दे पाए। कई लोग अन्य बीमारियों का इलाज न मिलने के कारण अपनों के बीच से चले गए। कोरोना संक्रमितों को इलाज कराने के लिए मुसीबतें झेलनी पड़ी। बीमारी में अपनों की सेवा भी लोग नहीं कर पाए। समय गुजरता गया, मगर दर्द जैसे लोगों के सीने में ठहर सा गया है। एक साल बीतने के बाद भी लोग कोरोना से मिले जख्मों को भूला नहीं पा रहे हैं।
जिले में कोराना से पहली मौत ढिकौली गांव के व्यक्ति की 26 मई 2020 को दिल्ली के अस्पताल में हुई थी। उनके शव के अंतिम दर्शन उनके परिवार वाले भी नहीं कर पाए। दिल्ली में ही विद्युत शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
विज्ञापन

नगर के भजन विहार निवासी अरविंद गोयल के सीने में कोरोना से पिता को खोने का दर्द है। इनकी माता निर्मला देवी व पिता सुरेंद्र गोयल कोरोना संक्रमित हो गए थे। जिनको मेडिकल में भर्ती कराया गया था। सही उपचार न मिलने के कारण उनके पिता की आंखों की रोशनी चली गई। उन्होंने अपने पिता को फरीदाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई, मगर उपचार के दौरान दो अक्तूबर को उनके पिता का निधन हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

मां के अंतिम दर्शन का जीवन भर रहेगा मलाल
- कस्बा अमीनगर सराय के एडवोकेट मोनू का कहना है कि मां जमसीद का कोरोना काल में निधन हो गया था। मेरठ से स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके शव को लेकर कस्बा पहुंची। अंतिम दर्शन तक नहीं करने दिए गए। पार्थिव शरीर को दफनाने के लिए जेसीबी से गड्ढा खोदा गया।
सरकार से नहीं मिली मदद
अरविंद गोयल का कहना है कि पिता के इलाज में 35 लाख रुपये का खर्च आया था। उन्होंने सरकार से सहायता के लिए आवेदन किया था। कुछ दिन पूर्व सर्वे के लिए उनके घर टीम आई थी, जो यह कहकर चली गई कि वह आयकर दाता हैं, जिसके कारण उन्हें सहायता नहीं मिलेगी।
जिले में संक्रमण से 36 लोगों की हुई मौत
जिले में कोरोना संक्रमण से 36 लोगों की मौत हुई, और 2339 लोग संक्रमित हुए। इनमें से 2303 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके है।
महामारी ने बदला पढ़ाई का चलन
बड़ौत। कोरोना काल ने शिक्षा का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया। 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू और 23 मार्च से 12 राज्यों के 100 जिलों में 31 मार्च तक लॉकडाउन लगाया गया था। जिसके बाद छात्रों के स्कूल-कॉलेज छूट गए। सरकार ने शिक्षा प्रभावित न हो इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की। इस व्यवस्था में संसाधन न होने के कारण गरीब परिवारों के बच्चे काफी पीछे छूट गए। अंत में स्कूल-कॉलेजों ने ई-लर्निंग और मीटिंग एप से छात्रों की कक्षाएं चलाकर पढ़ाने का प्रयास किया।
शिक्षक और स्कूल संचालकों ने खुद को बदला
- कोरोना काल के दौरान स्कूल प्रबंधन व शिक्षकों ने जहां खुद को बच्चों के लिए ढालने का प्रयास किया, वहीं इस महामारी के दौर में कुछ स्कूल संचालकों ने अभिभावकों के सहयोग में फीस माफी की। वहीं अधिकतर बड़े स्कूलों ने फीस में कोई कमी नहीं की। अभिभावक आंदोलन करके थक गए।

ये बोले प्रधानाचार्य-
- कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई कराई। हर एक बच्चे की समस्याओं को फोन कॉल पर प्राथमिकता से सुलझाने का प्रयास किया। रणवीर सिंह, प्रधानाचार्य- वनस्थली पब्लिक स्कूल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed