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काम सरकारी, जेब ढीली हो रही अफसरों की

Sat, 29 Feb 2020 12:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 29 Feb 2020 12:39 AM IST
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Work is official, pockets of officers are getting loose
बड़ौत (बागपत)। यूपी बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन संचालित कराने के उद्देश्य से गठित फ्लाइंग स्कवॉड में शामिल अफसरों को परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करना महंगा पड़ रहा है। कारण है कि शासन से निरीक्षण करने के लिए वाहन के ईंधन को मात्र 18 हजार रुपये ही मिले है। जिले में चार फ्लाइंग स्क्वॉड गठित है, जिन्हें 18 दिन तक 40 से 50 किलोमीटर की दूरी तक बनाए गए परीक्षा केन्द्रों का निरीक्षण करना है। ऐसे में स्कवॉड में शामिल अफसरों को खुद की जेब ही ढीली करनी पड़ रही है।
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जिले में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए 38 परीक्षा केन्द्र बनाए गए है। सभी केन्द्रों पर सीसीटीवी और राउटर लगाए गए है। ऑनलाइन मॉनीटरिंग भी की जा रही है। केन्द्रों पर संघन चेकिंग के लिए जिला स्तर पर फ्लाइंग स्कवॉड का भी गठन किया गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक ओमदत्त और बीएसए राजीव रंजन की अगुवाई में भी एक-एक टीम गठित है। इसके अलावा राजकीय कॉलेज बासौद के प्रधानाध्यापक अंतरिक्ष कुमार और राजकीय कॉलेज गौना खेकड़ा के प्रधानाध्यापक ज्वाला प्रसाद की अगुवाई मेें भी एक-एक टीम गठित की गई है। निरीक्षण के लिए सभी को प्रशासन की ओर से एक-एक वाहन भी उपलब्ध कराया गया है। मगर, वाहन में ईंधन भरने की सबसे बड़ी समस्या है। शासन की ओर से चार फ्लाइंग स्कवॉड के वाहनों को संचालित करने के लिए महज 18 हजार रुपये का बजट ही आवंटित हुआ है। प्रत्येक टीम को महज 4500 रुपये ही तेल खर्च के नाम पर मिल रहे है। ऐसे में 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित परीक्षा केन्द्रों के निरीक्षण के लिए टीम प्रभारियों को अपनी जेब ही ढीली करनी पड़ रही है।
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परीक्षा के दौरान 100 किलोमीटर की दौड़
बड़ौत। फ्लाइंग स्क्वॉड का दो गाड़ी पशु पालन विभाग, एक सीएमओ ऑफिस और दो गाड़ियां अनुबंध के तौर पर हायर की गई है। सभी गाड़ियां बोलेरो है। औसतन नई गाड़ी 15 से 16 किलोमीटर प्रति लीटर का एवरेज देती है, लेकिन जो गाड़ी फ्लाइंग स्क्वॉड को दी गई है, उनमें से अधिकांश पुरानी हो चुकी है। इनका औसतन एवरेज करीबन 10 से 12 किलोमीटर प्रति लीटर है। ऐसे में जिला मुख्यालय से परीक्षा केन्द्र जाने के लिए एक साइड से 40 किलोमीटर की दूरी तय होती है। लौट फेर में 80 किलोमीटर सफर तय हो जाता है। कई बार तो नकल की सूचना पर एक चक्कर की बजाएं दो चक्कर भी लगाने पड़ते है। इस तरह प्रतिदिन औसतन एक गाड़ी 100 किलोमीटर दूरी तय करती है। एक गाड़ी एक लीटर में 12 से 13 किलोमीटर की दूरी तय करती है तो उसे 100 किलोमीटर दूरी करने में करीबन साढ़े आठ लीटर तेल की आवश्यकता होती है। इस समय डीजल का रेट करीबन 64 रुपये है। आठ लीटर तेल का भाव हो गया 512 रुपये। यानी एक गाड़ी को प्रतिदिन 512 रुपये की आवश्यकता है। ऐसे में परीक्षा के 18 दिन उड़नदस्ते को चेकिंग के लिए करीबन 9216 रुपये की आवश्यकता है, जबकि उन्हें आवश्यकता के अनुरूप आधी धनराशि दी गई है।
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आवश्यकता के अनुरूप कम मिली धनराशि
यह बात सही है कि आवश्यकता के अनुरूप कम धनराशि मिली है। मगर, जिला विद्यालय निरीक्षक के तौर पर शासन व जिला प्रशासन के निर्देशों पर परीक्षा को नकलविहीन संपन्न कराना विभाग का मकसद है तो काम चलाना पड़ता है। चाहे हमारी जेब से क्यों न खर्च हो जाएं।
- ओमदत्त सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक।
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