{"_id":"5ff7438e8ebc3e34462c6786","slug":"women-will-become-self-sufficient-by-rearing-poultry-through-bihar-model-baghpat-news-mrt51926831","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिहार मॉडल से मुर्गी पालन कर आत्मनिर्भर बनेगी महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिहार मॉडल से मुर्गी पालन कर आत्मनिर्भर बनेगी महिलाएं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
32 महिलाओं को मुर्गी पालन व्यवसाय से जुड़ने के लिए 50-50 चूजे बांटे
संवाद न्यूज एजेंसी
रमाला। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत सूप गांव में बृहस्पतिवार को 32 महिलाओं को मुर्गी पालन व्यवसाय से जुड़ने के लिए 50-50 चूजे वितरित किए। चयनित महिलाओं को मदर यूनिट से चूजे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
शासन ने महिलाओं को मुर्गी पालन व्यवसाय से जोड़ने की कवायद शुरू की है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत मुर्गी पालन योजना शुरू की गई है। आदर्श महिला ग्राम संगठन समूह सखी कविता ने बताया कि छपरौली ब्लॉक में सैकड़ों महिला समूह हैं। क्लस्टर के रूप में आसपास के गांवों की महिलाओं को इसमें चयनित किया जाना है। बताया कि बिहार मॉडल की तर्ज पर क्षेत्र की महिलाएं मुर्गी पालन कर आत्मनिर्भर बनेगी। एक यूनिट में करीब पांच हजार रुपये का खर्च आएगा। चूजों को तैयार करने का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। योजना से महिलाएं आत्मनिर्भर बन अपनी आजीविका चला सकेगी। चूजों को पहले 28 दिन मदर यूनिट में रखा जाएगा। पहले चरण में महिलाओं को 50-50 चूजे दिए हैं। डेढ़ साल में कुल 150-150 चूजे दिए जाएंगे।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
रमाला। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत सूप गांव में बृहस्पतिवार को 32 महिलाओं को मुर्गी पालन व्यवसाय से जुड़ने के लिए 50-50 चूजे वितरित किए। चयनित महिलाओं को मदर यूनिट से चूजे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
शासन ने महिलाओं को मुर्गी पालन व्यवसाय से जोड़ने की कवायद शुरू की है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत मुर्गी पालन योजना शुरू की गई है। आदर्श महिला ग्राम संगठन समूह सखी कविता ने बताया कि छपरौली ब्लॉक में सैकड़ों महिला समूह हैं। क्लस्टर के रूप में आसपास के गांवों की महिलाओं को इसमें चयनित किया जाना है। बताया कि बिहार मॉडल की तर्ज पर क्षेत्र की महिलाएं मुर्गी पालन कर आत्मनिर्भर बनेगी। एक यूनिट में करीब पांच हजार रुपये का खर्च आएगा। चूजों को तैयार करने का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। योजना से महिलाएं आत्मनिर्भर बन अपनी आजीविका चला सकेगी। चूजों को पहले 28 दिन मदर यूनिट में रखा जाएगा। पहले चरण में महिलाओं को 50-50 चूजे दिए हैं। डेढ़ साल में कुल 150-150 चूजे दिए जाएंगे।
विज्ञापन