फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   What gone to Pakistan, foreign in own country, Noorjahan

पाकिस्तान क्या गई, अपने ही देश में बेगानी हो गई नूरजहां

Sat, 02 Sep 2017 01:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Sat, 02 Sep 2017 01:06 AM IST
विज्ञापन
What gone to Pakistan, foreign in own country, Noorjahan
बागपत स्थित केतीपुरा मोहल्ले में बेटे के साथ नूरजहां। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नूरजहां की उम्र 62 साल है। क्रांतिधरा मेरठ में जन्म लिया। सिवालखास में पली-बढ़ी। शादी हुई बागपत में। लेकिन बचपन में मां-बाप के साथ एक बार पाकिस्तान जाना उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी खता बन गई।
विज्ञापन


कराची में वालिद के इंतकाल के बाद वह मां के साथ पांच साल की उम्र में वापस लौट आई। लेकिन तब तक वह पाकिस्तानी नागरिक बन चुकी थी। अब पिछले पचपन साल से अपने ही वतन की नागरिकता के लिए तड़प रही है। कहती हैं कि जिस मिट्टी में पैदा हुई, आखिर पचपन साल बाद भी नागरिकता क्यों नहीं मिली। 
विज्ञापन


नागरिकता के पेंच और बेबस जिंदगी की यह कहानी शुरू होती है मेरठ के मोहल्ला बनी सराय से। वर्ष 1959 में यहां का इमामुदीन अपनी पत्नी आशिया और तीन साल की बेटी नूरजहां के साथ पाकिस्तान के कराची चला गया। वहीं की नागरिकता ली और जिंदगी बसर करने लगा। लेकिन वर्ष 1961 में इमामुदीन का इंतकाल हो गया। आशिया अकेली हुई तो सिवालखास से उसका भाई जाकर मां-बेटी को फिर से अपने वतन ले आया।
विज्ञापन
विज्ञापन


तब नूरजहां की उम्र थी पांच साल। पेंच यह था कि यह परिवार वापस आ गया। लेकिन अब वह पाकिस्तानी नागरिक थे। पांच साल की नूरजहां बड़ी होती गई और उसके वीजा की अवधि बढ़ती गई। उसका बागपत के केतीपुरा के हनीफ के साथ निकाह किया गया। 

अब नूरजहां की उम्र करीब 62 साल है। वह लांग टर्म वीजा पर ही रहती आ रही है। उसके पति का भी इंतकाल हो चुका है। लेकिन 55 साल बाद भी उसे अपने ही वतन की नागरिकता नहीं मिली। परिवार के लोग भी परेशान हैं।  

अब तो मिले नागरिकता 
बागपत। भतीजा इरशाद अक्सर नूरजहां को पाकिस्तानी कहकर चिढ़ाता है। वह कहती है कि वह तो जन्म से हिंदुस्तानी है। उसका जीवन की हर सांस यहीं पर बीती है। बेटे रहीश, नफीस, अनीश, अतीक कहते हैं कि उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन उनकी मां को अब हिंदुस्तान की नागरिकता मिल जानी चाहिए, ताकि उम्र के इस दौर मेें वह बगैर किसी झंझट के रह सकें। इरशाद कहता है कि सरकार अपनी जांच करें, लेकिन अब तो नागरिकता मिल जानी चाहिए।


रग-रग में बसा हिंदुस्तान 
नूरजहां कहती है कि उसे न पाकिस्तान जाना याद है और न ही आना। जब से होश संभाला घर में वीजा, पुलिस, नागरिकता यही सब सुनती रही। अब घर की तीसरी पीढ़ी चल पड़ी है। कहती है कि अब तो यह झंझट खत्म ही होना चाहिए। क्या जांच अब तक पूरी नहीं हुई।  
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed