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Baghpat News: विकास को तरस रहे गांव, खातों में नहीं बजट की कमी
Fri, 15 Nov 2024 11:25 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Fri, 15 Nov 2024 11:25 PM IST
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बागपत। गांव विकास को तरस रहे हैं, जबकि खातों में बजट की कोई कमी नहीं है। हालात यह है कि प्रधानों व सचिवों का विकास कार्यों की तरफ कोई ध्यान नहीं है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है और वह समस्याओं से जूझ रहे हैं।
इस तरह का कोई एक गांव नहीं है, बल्कि ऐसे काफी गांव है। इन गांवों में जहां खाते बजट से भरे पड़े हैं, वहीं गांवों में समस्याओं के अंबार भी लगे हुए हैं। सबसे ज्यादा समस्या तालाब की सफाई न होने से लेकर गलियों में जलभराव की हो रही है। कई गांव तो ऐसे है, जहां नालियां व खड़ंजे तक उखड़े पड़े हैं। यह हाल तब है, जब प्रधान व सचिव इन्हीं रास्तों से निकलते हैं। उनकी लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। लुहारी में 22.90 लाख, बावली में 25.63 लाख, कोताना में 21.16 लाख, मौजिजाबाद नांगल में 11.75 लाख का बजट खाते में हैं।
- बावली के खाते में 25.63 लाख, फिर भी समस्याओं का अंबार
बावली गांव के खाते में 25 लाख 63 हजार रुपये खाते में होने के बाद भी समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। गांव में जहां नाली व खड़ंजे उखड़े पड़े हैं वहीं जलभराव की समस्या का समाधान तक नहीं किया जा रहा है। ऐसे गांव में विकास कार्य ठप हो चुके हैं और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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- कोताना के खाते में 21.16 लाख का बजट
कोताना गांव के खाते में कोताना में 21 लाख 16 हजार रुपये होने के बाद भी सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहां खड़ी ई-रिक्शा भी दो साल से धूल फांक रही है। गांव का विकास बाधित हो चुका है। गांव में जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
- मौजिजाबाद नांगल में 11.75 लाख, नहीं हो रहे कार्य
मौजिजाबाद नांगल में 11 लाख 75 हजार रुपये होने के बाद गांव में सफाई तक नहीं की जा रही है। गांव में ऐसे कई मार्ग है जो कई साल से नहीं बने है। यहां बरसात के मौसम में जलभराव होने से ग्रामीणों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। शिकायत के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। बजट होने के बाद भी मार्गों का निर्माण नहीं हो रहा है।
- लुहारी के खाते में 22.90 लाख, कार्य पड़े अधूरे
लुहारी के खाते में 22 लाख 90 हजार रुपये होने के बाद भी कार्य अधूरे पड़े है। हैंडपंप रिबोर होने से लेकर मार्गों का निर्माण कार्य नहीं हुआ। तालाब की सफाई तो दूर की बात गांव की गलियों में सफाई तक नहीं होती है। ऐसे में ग्रामीण परेशान है।
- गांव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से खराब है। मार्गों का निर्माण नहीं हो रहा है और खाते में बजट होने के बाद भी प्रधान व सचिव कार्य नहीं करा रहे हैं। ऐसे बजट का क्या फायदा जो गांव के विकास में काम नहीं आ सकता। - दीपक चौधरी, मौजिजाबाद नांगल
- प्रधान व सचिव गांव के विकास पर ध्यान नहीं दे रहे है। नाली व खड़ंजे टूटे पड़े है। दो साल से ई-रिक्शा खाली प्लॉट में खड़ी हुई धूल फांक रही है। ऐसे में गांव के मार्गों पर ही कूड़ा बिखरा पड़ा है। - मिंटू, कोताना
- गांव के मार्गों पर जलभराव होने के कारण ग्रामीणों का निकलना मुश्किल हो रहा है। गांव के विकास पर बजट तक खर्च नहीं किया जा रहा है, जिससे गांव का विकास रुका पड़ा हुआ है। - सन्नी, बावली
- गांव में बजट है और फिर भी खर्च नहीं हो रहा। अधिकारी भी बजट खर्च के लिए ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांव में मार्गों का निर्माण, नाली, सफाई व्यवस्था, हैंडपंप रिबोर आदि कार्य ठप पड़े है। - सुधीर, लुहारी
वर्जन : बजट खर्च कराने के लिए सचिवों व प्रधानों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। जल्द ही बजट खर्च कराकर गांवों का विकास कराया जाएगा। - अरुण अत्री, डीपीआरओ
इस तरह का कोई एक गांव नहीं है, बल्कि ऐसे काफी गांव है। इन गांवों में जहां खाते बजट से भरे पड़े हैं, वहीं गांवों में समस्याओं के अंबार भी लगे हुए हैं। सबसे ज्यादा समस्या तालाब की सफाई न होने से लेकर गलियों में जलभराव की हो रही है। कई गांव तो ऐसे है, जहां नालियां व खड़ंजे तक उखड़े पड़े हैं। यह हाल तब है, जब प्रधान व सचिव इन्हीं रास्तों से निकलते हैं। उनकी लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। लुहारी में 22.90 लाख, बावली में 25.63 लाख, कोताना में 21.16 लाख, मौजिजाबाद नांगल में 11.75 लाख का बजट खाते में हैं।
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- बावली के खाते में 25.63 लाख, फिर भी समस्याओं का अंबार
बावली गांव के खाते में 25 लाख 63 हजार रुपये खाते में होने के बाद भी समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। गांव में जहां नाली व खड़ंजे उखड़े पड़े हैं वहीं जलभराव की समस्या का समाधान तक नहीं किया जा रहा है। ऐसे गांव में विकास कार्य ठप हो चुके हैं और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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- कोताना के खाते में 21.16 लाख का बजट
कोताना गांव के खाते में कोताना में 21 लाख 16 हजार रुपये होने के बाद भी सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहां खड़ी ई-रिक्शा भी दो साल से धूल फांक रही है। गांव का विकास बाधित हो चुका है। गांव में जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
- मौजिजाबाद नांगल में 11.75 लाख, नहीं हो रहे कार्य
मौजिजाबाद नांगल में 11 लाख 75 हजार रुपये होने के बाद गांव में सफाई तक नहीं की जा रही है। गांव में ऐसे कई मार्ग है जो कई साल से नहीं बने है। यहां बरसात के मौसम में जलभराव होने से ग्रामीणों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। शिकायत के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। बजट होने के बाद भी मार्गों का निर्माण नहीं हो रहा है।
- लुहारी के खाते में 22.90 लाख, कार्य पड़े अधूरे
लुहारी के खाते में 22 लाख 90 हजार रुपये होने के बाद भी कार्य अधूरे पड़े है। हैंडपंप रिबोर होने से लेकर मार्गों का निर्माण कार्य नहीं हुआ। तालाब की सफाई तो दूर की बात गांव की गलियों में सफाई तक नहीं होती है। ऐसे में ग्रामीण परेशान है।
- गांव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से खराब है। मार्गों का निर्माण नहीं हो रहा है और खाते में बजट होने के बाद भी प्रधान व सचिव कार्य नहीं करा रहे हैं। ऐसे बजट का क्या फायदा जो गांव के विकास में काम नहीं आ सकता। - दीपक चौधरी, मौजिजाबाद नांगल
- प्रधान व सचिव गांव के विकास पर ध्यान नहीं दे रहे है। नाली व खड़ंजे टूटे पड़े है। दो साल से ई-रिक्शा खाली प्लॉट में खड़ी हुई धूल फांक रही है। ऐसे में गांव के मार्गों पर ही कूड़ा बिखरा पड़ा है। - मिंटू, कोताना
- गांव के मार्गों पर जलभराव होने के कारण ग्रामीणों का निकलना मुश्किल हो रहा है। गांव के विकास पर बजट तक खर्च नहीं किया जा रहा है, जिससे गांव का विकास रुका पड़ा हुआ है। - सन्नी, बावली
- गांव में बजट है और फिर भी खर्च नहीं हो रहा। अधिकारी भी बजट खर्च के लिए ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांव में मार्गों का निर्माण, नाली, सफाई व्यवस्था, हैंडपंप रिबोर आदि कार्य ठप पड़े है। - सुधीर, लुहारी
वर्जन : बजट खर्च कराने के लिए सचिवों व प्रधानों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। जल्द ही बजट खर्च कराकर गांवों का विकास कराया जाएगा। - अरुण अत्री, डीपीआरओ