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ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर दौड़ेंगे वाहन, घंटों का सफर मिनटों में
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 01 Jan 2018 01:30 AM IST
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बागपत में बनाया गया ईस्टर्न पैरीफेरल एक्सप्रेस-वे।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नए साल की बड़ी उम्मीद है ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे। वेस्ट यूपी ही नहीं, दिल्ली और हरियाणा समेत अन्य राज्यों में वाहनों के आवागमन में भी इससे लाभ होगा। निर्माण आधा अधूरा है, लेकिन इससे वाहन गुजरने शुरू हो गए हैं। हालांकि कुंडली में ओवरब्रिज नहीं बना है।
लोकसभा चुनाव 2019 से पहले ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे शुरू होने की उम्मीद है। 135 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का करीब 21 किमी का टुकड़ा बागपत जनपद से गुजर रहा है।
यहां से कुंडली तक जाने में वाहन चालकों को करीब 20 से 25 मिनट तक लगेंगे। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि दिल्ली पर वाहनों का दबाव कम करने में एक्सप्रेस-वे लाभदायक होगा। केंद्रीय जहाजरानी, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 28 अप्रैल 2017 को निरीक्षण किया । उन्होंने बताया था कि पीएम नरेंद्र मोदी वर्ष 2018 की शुरूआत में ही हाईवे का उद्घाटन करेंगे।
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ऐसा है ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 135 किमी लंबे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य करा रहा है। इसका निर्माण 14 सितंबर 2015 को शुरू हुआ। इस पर चार बड़े पुल हैं, इनमें दो पुल यमुना नदी पर, एक हिंडन और एक आगरा में है। इसके अलावा 45 छोटे पुल, रेलवे ओवरब्रिज आठ हैं। फ्लाईओवर चार, अंडर पास की संख्या करीब तीन सौ से ज्यादा है।
कोर्ट ने जुलाई 2018 तक का दिया समय
एनएचएआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 तक अंतिम डेडलाइन तय की है, लेकिन इसे मार्च तक बनाकर चालू करने की दिशा में काम चल रहा है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का 85 से 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लाभ
दिल्ली पर वाहनों का बोझ कम होगा, प्रदूषण भी कम हो जाएगा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जाने के लिए अब लोगों को दिल्ली से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उद्योग स्थापित होंगे, इनसे क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
बागपत के 11 गांवों ने दी पेरिफेरल के लिए जमीन
बागपत। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का बागपत में करीब 20.125 किमी का टुकड़ा है। एक्सप्रेस-वे जिले के काठा, मवी कलां, खेकड़ा, रावण उर्फ बड़ा गांव, नंगला बहेड़ी, लहचौड़ा, गौना, सिंगौली तगा, सरफाबाद, आलम गिरपुर उर्फ टुकाली एवं फुलैरा गांव से होकर गुजरता है। जिले के किसानों ने 219.97 हेक्टेयर भूमि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लिए दी है। भूमि के जाने से 2221 किसान प्रभावित हुए, इनके 869 खसरा संख्या से इसके लिए जमीन ली गई है।
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लोकसभा चुनाव 2019 से पहले ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे शुरू होने की उम्मीद है। 135 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का करीब 21 किमी का टुकड़ा बागपत जनपद से गुजर रहा है।
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यहां से कुंडली तक जाने में वाहन चालकों को करीब 20 से 25 मिनट तक लगेंगे। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि दिल्ली पर वाहनों का दबाव कम करने में एक्सप्रेस-वे लाभदायक होगा। केंद्रीय जहाजरानी, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 28 अप्रैल 2017 को निरीक्षण किया । उन्होंने बताया था कि पीएम नरेंद्र मोदी वर्ष 2018 की शुरूआत में ही हाईवे का उद्घाटन करेंगे।
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ऐसा है ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 135 किमी लंबे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य करा रहा है। इसका निर्माण 14 सितंबर 2015 को शुरू हुआ। इस पर चार बड़े पुल हैं, इनमें दो पुल यमुना नदी पर, एक हिंडन और एक आगरा में है। इसके अलावा 45 छोटे पुल, रेलवे ओवरब्रिज आठ हैं। फ्लाईओवर चार, अंडर पास की संख्या करीब तीन सौ से ज्यादा है।
कोर्ट ने जुलाई 2018 तक का दिया समय
एनएचएआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 तक अंतिम डेडलाइन तय की है, लेकिन इसे मार्च तक बनाकर चालू करने की दिशा में काम चल रहा है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का 85 से 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लाभ
दिल्ली पर वाहनों का बोझ कम होगा, प्रदूषण भी कम हो जाएगा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जाने के लिए अब लोगों को दिल्ली से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उद्योग स्थापित होंगे, इनसे क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
बागपत के 11 गांवों ने दी पेरिफेरल के लिए जमीन
बागपत। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का बागपत में करीब 20.125 किमी का टुकड़ा है। एक्सप्रेस-वे जिले के काठा, मवी कलां, खेकड़ा, रावण उर्फ बड़ा गांव, नंगला बहेड़ी, लहचौड़ा, गौना, सिंगौली तगा, सरफाबाद, आलम गिरपुर उर्फ टुकाली एवं फुलैरा गांव से होकर गुजरता है। जिले के किसानों ने 219.97 हेक्टेयर भूमि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लिए दी है। भूमि के जाने से 2221 किसान प्रभावित हुए, इनके 869 खसरा संख्या से इसके लिए जमीन ली गई है।