किताबों की ओट में वोट की चोट: बच्चों के लिए आईं पुस्तकों से बना दिए मतदान बूथ, खड़ी की ढाई फीट की दीवार
केंद्र व प्रदेश सरकार बच्चों की पढ़ाई पर सालाना करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन बागपत जनपद में अफसर सरकार की मेहनत को पलीता लगा रहे हैं। लापरवाही का आलम यह है कि इन किताबों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
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उत्तर प्रदेश के बड़ौत में कुछ माह पहले बच्चों को बांटने के लिए आई किताबें अब तक बड़ौली बीआरसी पर धूल फांक रहीं थी, लेकिन आज होने वाले ग्राम प्रधान के चुनाव में उन्हें दीवार स्वरूप रखकर दो अलग-अलग बूथ बना दिए गए, जिनकी ओट में मतदाता वोट की चोट कर रहे हैं।
राज्य चुनाव आयोग के निर्देशों पर बुधवार को बड़ौली गांव में ग्राम प्रधान राजेंद्र की मौत के बाद काफी समय से रिक्त पड़े ग्राम प्रधान पद पर चुनाव हो रहा है।
ताज्जुब की बात यह है कि प्राथमिक पाठशाला नंबर-1 में बने एक कमरे में दो अलग-अलग बूथ बीआरसी बड़ौली पर काफी समय पहले बच्चों की पढ़ाई के लिए भेजी गई किताबें से बना दिए गए।
इन किताबों को नगर व देहात क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बांटने के लिए भेजा गया था। अब तक ये किताबें बीआरसी पर धूल फांकती रहीं और अब इन किताबों को चुनाव में इस्तेमाल किया जा रहा है।
एक कमरे में किताबों की दीवार से बनाए दो बूथ
बीआरसी बड़ौली पर स्थित प्राथमिक पाठशाला नंबर-1 के एक कमरे में रखी किताबों से बीचो-बीच तकरीबन दो से ढाई फीट की दीवार बनाई गई और बाद में उक्त दीवार पर तिरपाल ढक दी गई, ताकि किताबें नजर न आएं।
किताबों की दीवार से अब एक कमरे में दो बूथ बनाए गए हैं। इनमें एक बूथ संख्या है 199 व दूसरी बूथ संख्या है 201। दोनों ही बूथों पर अलग-अलग वार्ड भी अंकित कर दिए गए हैं। दोनों बूथों पर मतदान जारी है। बूथ संख्या 199 पर वार्ड नंबर 4 और बूथ संख्या 201 पर वार्ड संख्या 15 के वोटर मतदान करने पहुंचेंगे।
आखिर किसकी है लापरवाही?
वैसे इस पूरे प्रकरण में शिक्षा विभाग की लापरवाही तो उजागर हुई है, क्योंकि जो किताबें विद्यालयों में बंटने थी, उन किताबों को बीआरसी पर धूल फांकने के लिए रख दिया गया था। दूसरी लापरवाही चुनाव केन्द्र पर इस्तेमाल।