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UP: मंडी में दो रुपये किलो बिक रही गोभी, लागत निकालना भी नहीं आसान, खड़ी फसलों पर ट्रैक्टर चला रहे किसान

Wed, 06 Dec 2023 11:27 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 06 Dec 2023 11:27 AM IST
सार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फूलगोभी की खेती कर रहे किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। दाम अर्श से फर्श पर आने से किसान मायूस हैं। ऐसे में खेतों में खड़ी फसलों पर ट्रैक्टर चला रहे हैं।

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UP: Cauliflower is being sold at two rupees per kg market, farmers are driving tractors on standing crops
गोभी की फसल पर ट्रैक्टर चलाता किसान - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों में गोभी की खेती कर रहे किसान बुरे दौर से गुजर रहे हैं। फूलगोभी के खेतों में एक रुपया, मंडी में तीन रुपये किलो दाम ही किसानों को मिल पा रहा है, जबकि लोगों को घरों में आठ से दस रुपये प्रति किलो के दाम पर पहुंच रही है।

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इस हाल में किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। फूल गोभी के दाम अर्श से फर्श पर आ जाने से किसानों में मायूसी है। ऐसे में किसान खेतों में खड़ी फूलगोभी की फसल पर ट्रैक्टर चलाकर इसे नष्ट कर रहे हैं।
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मंडी में गोभी के दाम गिरे तो किसानों ने खेतों में फसल की जुताई शुरू कर दी। यहां के कई गांवों में किसानों ने फसल से मुनाफा नहीं मिलने पर ट्रैक्टर चलाकर जुताई कर डाली।
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किसानों का कहना है कि मंडी में गोभी का दाम तीन रुपये किलो तक मिल रहा है। इससे मजदूरी और किराया भी नहीं निकल रहा है। गोभी की फसल का यह हाल पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है।

गाजियाबाद की सीमा से सटे गांवों के अधिकांश किसान सब्जी की खेती कर रहे हैं। लोकी, तोरई, आलू के अलावा गोभी की खेती की जाती है। सितंबर माह में गोभी की फसल बुवाई के बाद नवंबर-दिसंबर में फसल तैयार हो जाती है और इन महीनों में शादी-विवाह शुरू होने से फसल का दाम भी अच्छा मिल जाता है।

किसानों का कहना है के पिछले तीन साल से सब्जी किसान मंदी की मार झेल रहा है। मंडी में अब गोभी का दाम तीन रुपये किलो तक हो गया है, जिससे गोभी को वहां तक लेकर जाने में ज्यादा खर्च आ जाता है। इसलिए ही खेतों में जुताई शुरू कर दी है।

एक बीघा फसल में आता है पांच से छह हजार का खर्च
किसानों का कहना है कि एक बीघा गोभी की फसल तैयार करने में 5 से 6 हजार रुपये का खर्च आता है। लगभग 20 दिन पहले मंडी में गोभी का भाव 20 से 25 रुपये प्रति किलो था, लेकिन एक सप्ताह से भाव गिरकर तीन रुपये प्रति किलो तक रह गया है।

इससे खेतों में लगाए गए मजदूरों की मजदूरी भी नहीं निकल रही है। वहीं खेत से गोभी को मंडी तक भी लेकर जाना पड़ता है। किसान गोभी की फसल की ट्रैक्टर से जुताई कर गेहूं की फसल की बुवाई की तैयारी में लग गए हैं।

गोभी का दाम गिरने से मजदूरी व मंडी तक जाने का किराया भी नहीं निकल रहा है। मजबूरी में फसल को नष्ट कराकर गेहूं की फसल के लिए खेत तैयार करना पड़ रहा है। - नूर मोहम्मद

UP: Cauliflower is being sold at two rupees per kg market, farmers are driving tractors on standing crops
किसान जाकिर - फोटो : Amar Ujala

40 बीघा में गोभी की फसल बोई गई थी, मगर मंडी में दाम गिरने से लागत निकालना दूर, मजदूरी निकालना भी मुश्किल हो गया है। घाटा होने पर फसल को नष्ट कराना पड़ रहा है। -जाहिद 

गोभी का भाव अचानक गिरने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। लागत न निकलने के कारण फसल को नष्ट करने के अलावा कोई चारा भी नहीं है। -शकील

मंडी में कोई गोभी लेकर आता है तो वह अच्छे किस्म की होने पर तीन रुपये किलो तक बिक जाती है। अब गोभी की आवक काफी कम हो गई है, क्योंकि किसानों का गोभी को मंडी तक लाने का खर्च भी नहीं निकल रहा है। -नरेश चंद कश्यप, आढ़ती

पिछले कई साल से गोभी के दाम गिर रहे हैं। दाम कम होने के कारण फसल को नष्ट करना मजबूरी है। अब गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयारा कराया जा रहा है।- जाकिर

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