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Baghpat News: 27 साल बाद पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा त्रिलोक तीर्थ धाम
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- पहले चरण में विकसित करने के लिए शासन से 75 लाख रुपये मंजूर किए
- बड़ागांव के जैन तीर्थ धाम का धार्मिक के साथ ही पर्यटन महत्व बढ़ेगा
फोटो 24
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। बड़ागांव में स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम को 27 साल बाद पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए शासन ने 75 लाख रुपये मंजूर किए हैं। यह जैन समाज के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है और यहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। इसके विकसित होने से धार्मिक के साथ ही यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
आचार्य विद्याभूषण सन्मति सागर महाराज दो जुलाई 1997 को पद विहार करते हुए बड़ागांव पहुंचे तो उन्होंने जैन समाज के लोगों के बीच इस धाम के निर्माण की योजना रखी। इसके लिए सितंबर 1998 में तत्कालीन गवर्नर सूरजभान ने भूमि पूजन किया और इसका अधिकतर निर्माण कुछ साल बाद हो गया मगर कार्य वर्ष 2015 तक चलता रहा। इस तरह वर्ष 1998 में इसको केवल धार्मिक महत्व को देखते हुए विकसित किया गया मगर अब धार्मिक के साथ ही पर्यटन महत्व को देखते हुए विकसित करने की योजना है। इसके लिए जल्द कार्य शुरू कराया जाएगा।
- भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा हुई थी जमीन के अंदर से प्राप्त
त्रिलोकतीर्थ तीर्थ धाम मंदिर समिति के प्रबंधक त्रिलोकचंद जैन बताते हैं कि यहां सौ साल पहले भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा जमीन के अंदर से प्राप्त हुई थी। इस घटना के बाद से यह धाम जैन श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बन गया और यहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। धाम में कुल 468 जिनालय की रचना की गई है और सबसे ऊपर 31 फीट ऊंची 1008 भगवान आदिनाथ की अष्टधातु की प्रतिमा विराजमान है। धाम के मुख्यद्वार पर उर्ध्वलोक, मध्यलोक और अधोलोक (नर्कलोक) का चित्रण किया गया है जो मनुष्य के कर्मों का फल दर्शाता है।
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-- हमारी समिति की जल्द बैठक होगी और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए क्या-क्या कार्य होंगे, उनपर बातचीत की जाएगी। त्रिलोक तीर्थ धाम का बड़ा धार्मिक महत्व है और इसके पर्यटन के रूप में विकसित होने से लोग घूमने आ सकेंगे। - त्रिलोकचंद जैन, प्रबंधक त्रिलोक तीर्थ धाम मंदिर समिति
-- त्रिलोक तीर्थ धाम को पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए शासन से 75 लाख रुपये का बजट मंजूर हुआ है। वहां जल्द ही कार्य शुरू कराया जाएगा। - पंकज वर्मा, एडीएम
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- बड़ागांव के जैन तीर्थ धाम का धार्मिक के साथ ही पर्यटन महत्व बढ़ेगा
फोटो 24
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। बड़ागांव में स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम को 27 साल बाद पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए शासन ने 75 लाख रुपये मंजूर किए हैं। यह जैन समाज के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है और यहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। इसके विकसित होने से धार्मिक के साथ ही यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
आचार्य विद्याभूषण सन्मति सागर महाराज दो जुलाई 1997 को पद विहार करते हुए बड़ागांव पहुंचे तो उन्होंने जैन समाज के लोगों के बीच इस धाम के निर्माण की योजना रखी। इसके लिए सितंबर 1998 में तत्कालीन गवर्नर सूरजभान ने भूमि पूजन किया और इसका अधिकतर निर्माण कुछ साल बाद हो गया मगर कार्य वर्ष 2015 तक चलता रहा। इस तरह वर्ष 1998 में इसको केवल धार्मिक महत्व को देखते हुए विकसित किया गया मगर अब धार्मिक के साथ ही पर्यटन महत्व को देखते हुए विकसित करने की योजना है। इसके लिए जल्द कार्य शुरू कराया जाएगा।
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- भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा हुई थी जमीन के अंदर से प्राप्त
त्रिलोकतीर्थ तीर्थ धाम मंदिर समिति के प्रबंधक त्रिलोकचंद जैन बताते हैं कि यहां सौ साल पहले भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा जमीन के अंदर से प्राप्त हुई थी। इस घटना के बाद से यह धाम जैन श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बन गया और यहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। धाम में कुल 468 जिनालय की रचना की गई है और सबसे ऊपर 31 फीट ऊंची 1008 भगवान आदिनाथ की अष्टधातु की प्रतिमा विराजमान है। धाम के मुख्यद्वार पर उर्ध्वलोक, मध्यलोक और अधोलोक (नर्कलोक) का चित्रण किया गया है जो मनुष्य के कर्मों का फल दर्शाता है।
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