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सियासी कॅरियर में चूक साबित होगी 'धमकी’

Thu, 09 Jun 2016 01:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Thu, 09 Jun 2016 01:07 AM IST
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'threat' will be mistake in political career
पत्रकारों से बातचीत करते कुलदीप उज्ज्वल। इस दौरान उनकी पत्नी भी मौजूद रही। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
छात्र राजनीति से नाम कमाने के बाद अब सत्ता के ट्रैक पर दौड़ने का डॉ. कुलदीप उज्ज्वल का ख्वाब दरकता नजर आ रहा है। धमकी देने की बात से अब भले ही वह पलट गए हो, लेकिन वक्त निकल चुका है। कुर्सी चली गई और अब उन्हें बागपत से टिकट बचाने के लिए भी संघर्ष करना होगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को उनके तीखे बोल नहीं भाए। छात्र राजनीतिक का तौर-तरीका ही उन्हें ले डूबा।
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ग्राम सचिव के तबादले अटके थे, लेकिन यह मुद्दा इतना बड़ा नहीं था कि कलक्ट्रेट में तांडव ही मचाना पड़ जाए। छात्र जीवन से राजनीति सीखने वाले डॉ. कुलदीप उज्ज्वल के सपने सत्ता के सिरमौर बनने तक के रहे हैं। सरकार ने दो बार मौका दिया, लेकिन वह दूसरी बार भी रास्ता नहीं बना सके।  हालांकि अब डॉ. कुलदीप उज्ज्वल कह रहे हैं कि रिकॉर्डिंग में उनकी आवाज नहीं है।
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लेकिन अब केवल सांप निकलने के बाद लकीर पीटने जैसी  बात ही रह गई है। परवान चढ़ते राजनीतिक कॅरियर के लिए डीपीआरओ को धमकाना सबसे बड़ी चूक साबित होगी। राज्य मद्य निषेद्य परिषद की कुर्सी जाने के बाद उनके लिए टिकट बचाना आसान नहीं होगा। विरोधी खेमा पहले ही उन्हें टिकट दिए जाने से नाराज है।
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टिकट कटा तो जाहिर है कि उनकी राजनीति का ग्राफ सिमटकर ही रह जाएगा। असलियत में जिले में सपा की कईं गुटों में बंटी राजनीति में भी डॉ. उज्ज्वल समन्वय नहीं कर पा रहे हैं। इससे भी उन्हें नुकसान हुआ है।

 दूसरी बार गई डॉ. उज्ज्वल की कुर्सी 
बागपत। सपा नेता डॉ.  कुलदीप उज्ज्वल की कुर्सी जाने का यह  पहला मामला नहीं है। 25 अक्तूबर, 2014 को उन्हें रिमोर्ट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के चेयरमैन पद से हटाया था। दोबारा दो जून, 2015 को डॉ. उज्ज्वल की ताजपोशी राज्य मद्य निषेध परिषद के चेयरमैन पद पर की गई, लेकिन करीब एक साल बाद ही उन्हें दोबारा हटा दिया गया। इसके अलावा उन्हें इसी साल 25 मार्च को बागपत से प्रत्याशी भी घोषित किया गया था।

 कुर्सी जाने से पहले इस बार भी बरसे धर्मपाल
यह इत्तेफाक ही कहा जाएगा कि डॉ. कुलदीप उज्ज्वल की कुर्सी जाने से पहले उनके पिता बयानों को लेकर विवादित हो जाते हैं। अक्तूबर 2014 में उनके पिता चौधरी धर्मपाल ने मवी कलां गांव में गोकशी के मामले में दरोगा के साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार किया था।

तब उनके खिलाफ तस्करा डाल दिया गया था। अब कलक्ट्रेट में हंगामे के दौरान भी कुलदीप के पिता ने ही तथाकथित भ्रष्टाचार का रजिस्टर लहराया। इस बार भी डॉ. कुलदीप की कुर्सी चली गई।

 दो सपा नेताओं पर कार्रवाई की तैयारी
डीपीआरओ के मोबाइल से रिकॉर्डिंग लीक होने का मामला अब लखनऊ में उछल रहा है। सपा हाईकमान को बागपत के भरोसेमंद पदाधिकारियों ने दो नाम भेजे हैं। यही वह दो नाम है, जिन्होंने इस पूरे मामले की पटकथा तैयार की। रिपोर्ट भेजी है कि इन्होंने ही डीपीआरओ को उकसाया। इन दोनों पर सपा विरोधी लामबंदी करने का आरोप लगाया है। जल्द ही कार्रवाई हो सकती है।

क्या रालोद में जाने वाले थे डॉ. कुलदीप
बागपत। सपा नेता डॉ. कुलदीप उज्ज्वल की शिकायतों में उनके पार्टी छोड़ने की शिकायत भी लखनऊ  भेजी गई है। सपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के अलावा चिट्ठी भेजकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अवगत कराया था कि वह रालोद में जाने वाले हैं, इसलिए सपा को बदनाम करने में जुटे हैं।

अब आवाज से ही मुकरे कुलदीप
बागपत। बागपत से सपा के प्रत्याशी डॉ. कुलदीप उज्ज्वल कुर्सी जाते ही डीपीआरओ को धमकाने और डीएम को अपशब्द कहने के मामले में पलट गए हैं। उज्ज्वल ने कहा रिकॉर्डिंग में उनकी आवाज ही नहीं है। यह किसी शुभचिंतक की आवाज है। वह जनता की सेवा करते रहेंगे।

बुधवार को सपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा जो रिकॉर्डिंग वायरल हो रही है, इसमें उनकी आवाज नहीं है। डीएम ह्दय शंकर तिवारी से वह इसकी जांच की मांग कर चुके हैं।

डीपीआरओ या डीएम इसकी असलियत बता सकते हैं। उन्हें जांच करानी चाहिए। पुलिस-प्रशासन को सच्चाई का खुलासा करना चाहिए। पद चले जाने का अफसोस नहीं है। वह बगैर किसी पद के भी पार्टी के लिए काम करेंगे। महात्मा गांधी, शहीद भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद का उदाहरण देते हुए बोले,  इन लोगों के पास भी कोई पद तक नहीं था।


पार्टी के फैसले का वह सम्मान करते हैं। जिस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहा हूं, उस क्षेत्र की जनता का शोषण नहीं होने दूंगा। जरूरत पड़ने पर वह जनता के लिए और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पीछे हटने वाले नहीं है।
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