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‘कोई हो सकता नहीं, वतन से ऊंचा’
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 15 Aug 2016 01:24 AM IST
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बागपत में आयोजित कवि सम्मेलन में रचनाएं पेश करते कवि।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगर पालिका के तत्वावधान में आयोजित कौमी एकता मुशायरा और कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक रचना पेश की। इसमें देश की एकता, अखंडता और भाईचारे पर काव्य पाठ किया।
शनिवार की रात में एक बैंक्वट हॉल में आयोजित मुशायरे एवं कवि सम्मेललन की अध्यक्षता पालिकाध्यक्ष राजूद्दीन ने की। इसमें आचार्य प्रमोद कृष्णम की सरपरस्ती में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री कोकब हमीद, सपा जिलाध्यक्ष डॉ एसपी यादव रहे।
संयोजक डॉ. सुदर्शन चंद्रा ने बताया देर रात तक कार्यक्रम चला। मुजफ्फरनगर से पहुंचे अरशद जिया के शेर 'निकली है धुन में कौन सी गर्दिश की बीन से, घबराके सांप जाने लगे आस्तीन से’ को सराहा गया।
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शायरा सबा बलरामपुरी के शेर 'तलाश करती रही मैं मगर नहीं आया, कोई भी तुझसा जहां में नजर नहीं आया’ स्वतंत्रता दिवस पर बागपत के शायर जिया बागपती ने 'कद किसी का भी रहे चाहे गगन से ऊंचा, कोई हो सकता नहीं अपने वतन से ऊंचा’ सुनाकर खूब दाद बटोरी। मेरठ से पहुंची कवि तुषा शर्मा की रचना 'जो दिल पे गुजरेगा वो लब पे होगा, जो लब पे होगा वो हम कहेंगे’ सुनाकर वाहवाही लूटी।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने मिल जुलकर रहने का आह्वान किया। उनकी रचना 'मोहब्बत के हंसी सपने आंखों में सजा लो तुम, बड़े ही काम का नुस्खा है बशर्ते आजमा लो तुम, ये झगड़ा तेरे मेरे का अपने आप मिट जाए, तुम्हें अपना बना लें हम, हमें अपना बना लो तुम’ सुनाकर प्रशंसा बटोरी।
मोहन मुंतजिर, अजहर हसनपुरी, नफीस देवबंदी, डॉ. नदीम शाद, नकहत अमरोही, सबा अजीज, सज्जाद झंझट, जहाज देवबंदी और नदीम फर्रूख ने भी कलाम पेश किए।
पालिकाध्यक्ष ने शायरों और कवियों का आभार जताया। जिला बार संघ के अध्यक्ष जयवीर सिंह तोमर, कोहिनूर, वीरेंद्र आर्य एडवोकेट, इरशाद, इकबाल खान, असद खान, मेहरबान, सिराजुद्दीन, नौशाद अली, नंद लाल, यूसुफ, अजहर और अफजाल फारुखी मौजूद रहे।
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शनिवार की रात में एक बैंक्वट हॉल में आयोजित मुशायरे एवं कवि सम्मेललन की अध्यक्षता पालिकाध्यक्ष राजूद्दीन ने की। इसमें आचार्य प्रमोद कृष्णम की सरपरस्ती में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री कोकब हमीद, सपा जिलाध्यक्ष डॉ एसपी यादव रहे।
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संयोजक डॉ. सुदर्शन चंद्रा ने बताया देर रात तक कार्यक्रम चला। मुजफ्फरनगर से पहुंचे अरशद जिया के शेर 'निकली है धुन में कौन सी गर्दिश की बीन से, घबराके सांप जाने लगे आस्तीन से’ को सराहा गया।
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शायरा सबा बलरामपुरी के शेर 'तलाश करती रही मैं मगर नहीं आया, कोई भी तुझसा जहां में नजर नहीं आया’ स्वतंत्रता दिवस पर बागपत के शायर जिया बागपती ने 'कद किसी का भी रहे चाहे गगन से ऊंचा, कोई हो सकता नहीं अपने वतन से ऊंचा’ सुनाकर खूब दाद बटोरी। मेरठ से पहुंची कवि तुषा शर्मा की रचना 'जो दिल पे गुजरेगा वो लब पे होगा, जो लब पे होगा वो हम कहेंगे’ सुनाकर वाहवाही लूटी।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने मिल जुलकर रहने का आह्वान किया। उनकी रचना 'मोहब्बत के हंसी सपने आंखों में सजा लो तुम, बड़े ही काम का नुस्खा है बशर्ते आजमा लो तुम, ये झगड़ा तेरे मेरे का अपने आप मिट जाए, तुम्हें अपना बना लें हम, हमें अपना बना लो तुम’ सुनाकर प्रशंसा बटोरी।
मोहन मुंतजिर, अजहर हसनपुरी, नफीस देवबंदी, डॉ. नदीम शाद, नकहत अमरोही, सबा अजीज, सज्जाद झंझट, जहाज देवबंदी और नदीम फर्रूख ने भी कलाम पेश किए।
पालिकाध्यक्ष ने शायरों और कवियों का आभार जताया। जिला बार संघ के अध्यक्ष जयवीर सिंह तोमर, कोहिनूर, वीरेंद्र आर्य एडवोकेट, इरशाद, इकबाल खान, असद खान, मेहरबान, सिराजुद्दीन, नौशाद अली, नंद लाल, यूसुफ, अजहर और अफजाल फारुखी मौजूद रहे।