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Baghpat News: तिलवाड़ा टीले पर पुरावशेषों को समेटने का काम शुरू हुआ
Mon, 21 Apr 2025 12:08 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Mon, 21 Apr 2025 12:08 AM IST
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तिलवाड़ा टीले पर पाॅलीथिन से ढके पुरावशेष। संवाद
बड़ौत(बागपत)। तिलवाड़ा के आला टीले पर उत्खनन पर विराम लगने के बाद निकले पुरावशेषों को पुरातत्वविदों ने समेटने का काम शुरू कर दिया है। वहीं कुर्डी के ऐतिहासिक प्राचीन टीले पर खोदाई शुरू होने का ग्रामीणों को इंतजार हैं। जहां करीब डेढ़ माह से खोदाई बंद है।
तिलवाड़ा गांव स्थित आला टीले पर दिसंबर 2024 से एएसआई द्वारा उत्खनन शुरू किया गया था। खोदाई में यहां पर मनकें, दाह संस्कार के समय प्रयोग में होने वाला सामान व चबूतरा भी मिला हैं। इससे सटे कुछ मिट्टी के बर्तन मिले हैं।
प्राथमिक शोध करने के बाद पुरातत्वविदों ने यहां पर शवाधान केंद्र होने की पुष्टि कर दी। इसके अलावा ताबूतनुमा आकृति, तांबे की प्लेट, कुछ महत्वपूर्ण मृदभांड, हडि्डयां भी मिली हैं।
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फिलहाल टीले पर खोदाई का काम पूरा हो चुका है। अब पुरातत्वविदों ने पुरावशेषों को समेटने का काम शुरू कर दिया हैं। उधर, कुर्डी टीले पर भारतीय विरासत संस्थान के महानिदेशक एवं कुलपति डॉ़ बुद्ध रश्मि मणि के निर्देशन में 20 जनवरी को उत्खनन कार्य शुरू कर दिया गया था। यहां पर 12 ट्रेंच बनाकर खोदाई शुरू की गई थी।
टीले की ऊपरी सतह पर फैले कुछ पुरावशेषों को पुरातत्वविदों ने करीब चार हजार साल पुराना बताया था। मगर, खोदाई के दौरान यहां पर कोई खास सफलता नहीं मिली। करीब डेढ़ माह से टीले पर खोदाई बंद है। ग्रामीणों को दोबारा से खोदाई शुरू होने का इंतजार है। ताकि टीले का राज सामने आ सके। लेकिन अभी खोदाई शुरू होने की कोई तिथि निर्धारित नहीं है।
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तिलवाड़ा गांव स्थित आला टीले पर दिसंबर 2024 से एएसआई द्वारा उत्खनन शुरू किया गया था। खोदाई में यहां पर मनकें, दाह संस्कार के समय प्रयोग में होने वाला सामान व चबूतरा भी मिला हैं। इससे सटे कुछ मिट्टी के बर्तन मिले हैं।
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प्राथमिक शोध करने के बाद पुरातत्वविदों ने यहां पर शवाधान केंद्र होने की पुष्टि कर दी। इसके अलावा ताबूतनुमा आकृति, तांबे की प्लेट, कुछ महत्वपूर्ण मृदभांड, हडि्डयां भी मिली हैं।
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फिलहाल टीले पर खोदाई का काम पूरा हो चुका है। अब पुरातत्वविदों ने पुरावशेषों को समेटने का काम शुरू कर दिया हैं। उधर, कुर्डी टीले पर भारतीय विरासत संस्थान के महानिदेशक एवं कुलपति डॉ़ बुद्ध रश्मि मणि के निर्देशन में 20 जनवरी को उत्खनन कार्य शुरू कर दिया गया था। यहां पर 12 ट्रेंच बनाकर खोदाई शुरू की गई थी।
टीले की ऊपरी सतह पर फैले कुछ पुरावशेषों को पुरातत्वविदों ने करीब चार हजार साल पुराना बताया था। मगर, खोदाई के दौरान यहां पर कोई खास सफलता नहीं मिली। करीब डेढ़ माह से टीले पर खोदाई बंद है। ग्रामीणों को दोबारा से खोदाई शुरू होने का इंतजार है। ताकि टीले का राज सामने आ सके। लेकिन अभी खोदाई शुरू होने की कोई तिथि निर्धारित नहीं है।