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विधान, जाप और आराधना करने से होती है आत्मा की शुद्धि : मुनि शिवानंद
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- सरूरपुरकलां गांव के श्री1008 नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुई पूजा
फोटो-छह
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। सरूरपुरकलां गांव के श्री1008 नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को विश्व शांति के लिए पूजन किया गया। मंदिर में श्रीजी को अर्घ्य समर्पित किए गए।
जैन मंदिर में ब्रह्मचारी नमन जैन ने प्रभात आरती, अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। श्रद्धालुओं ने शांतिनाथ भगवान के चरणों में भक्ति सुमन अर्पित किए। शांतिनाथ विधान में यजमान पूर्ति जैन व रितिका जैन रहे। जैन मुनि शिवानंद महाराज ने कहा कि विधान, जाप और आराधना करने से मनुष्य की आत्मा की शुद्धि होती है। प्रत्येक जीव सुख की कामना करता है और अपने जीवन में आनंद की तलाश में रहता है, लेकिन वह धार्मिक कार्यों को भूल जाता है। इस कारण मनुष्य के जीवन में कष्ट आते हैं। यदि सुख चाहिए तो मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलना होगा। इससे मन को भी प्रसन्नता होगी। शिवानंद महाराज व प्रशमानंद महाराज ने भी प्रवचन किए। इसके बाद उन्होंने बड़ौत के लिए पद विहार किया। इस मौके पर प्रदीप जैन, कवरसैन, मनीष जैन, तन्मय जैन, नव्या जैन, अदिति जैन, अनमोल जैन आदि मौजूद रहे।
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फोटो-छह
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। सरूरपुरकलां गांव के श्री1008 नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को विश्व शांति के लिए पूजन किया गया। मंदिर में श्रीजी को अर्घ्य समर्पित किए गए।
जैन मंदिर में ब्रह्मचारी नमन जैन ने प्रभात आरती, अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। श्रद्धालुओं ने शांतिनाथ भगवान के चरणों में भक्ति सुमन अर्पित किए। शांतिनाथ विधान में यजमान पूर्ति जैन व रितिका जैन रहे। जैन मुनि शिवानंद महाराज ने कहा कि विधान, जाप और आराधना करने से मनुष्य की आत्मा की शुद्धि होती है। प्रत्येक जीव सुख की कामना करता है और अपने जीवन में आनंद की तलाश में रहता है, लेकिन वह धार्मिक कार्यों को भूल जाता है। इस कारण मनुष्य के जीवन में कष्ट आते हैं। यदि सुख चाहिए तो मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलना होगा। इससे मन को भी प्रसन्नता होगी। शिवानंद महाराज व प्रशमानंद महाराज ने भी प्रवचन किए। इसके बाद उन्होंने बड़ौत के लिए पद विहार किया। इस मौके पर प्रदीप जैन, कवरसैन, मनीष जैन, तन्मय जैन, नव्या जैन, अदिति जैन, अनमोल जैन आदि मौजूद रहे।
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