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किसान आंदोलन से आसान हुई जिला पंचायत अध्यक्ष पद की राह

Sun, 04 Jul 2021 11:42 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jul 2021 11:42 PM IST
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The path to the post of District Panchayat President became easier due to the farmers' movement
- जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जे से रालोद नेताओं में उत्साह
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- मान रहे विधानसभा चुनावों पर भी इस जीत का होगा सकारात्मक असर
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। किसान आंदोलन से रालोद को संजीवनी मिली है। बागपत में भी किसान आंदोलन का काफी असर देखने को मिला है। इसके बलबूते ही रालोद की जिला पंचायत अध्यक्ष पद तक पहुंचने की राह आसान हो गई। इस पद पर रालोद का कब्जा होने से पार्टी के कार्यकर्ताओं का उत्साह काफी बढ़ा है। जिसका सकारात्मक असर आने वाले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। वर्तमान हालात को देखते हुए रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ने की आस लगाए बैठे नेताओं की बांछें भी खिली हुई हैं।
किसान आंदोलन को सात माह से अधिक का समय बीत चुका है। आंदोलन की शुरूआत से ही रालोद, भाकियू और सपा ने इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। जिले में जगह-जगह धरना-प्रदर्शन हुए। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने जगह-जगह किसान पंचायत कर प्रदेश और केंद्र सरकार को जमकर घेरा। किसान पंचायतों में अपेक्षा से अधिक भीड़ भी जुटी। रालोद को किसान आंदोलन का फायदा भी हुआ। जिला पंचायत के चुनाव में सबसे अधिक सात सदस्य रालोद के जीते। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद चुनाव में सदस्यों के उत्पीड़न को लेकर रालोद को कई बार सड़क पर उतरना पड़ा। इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। रालोद नेताओं की एकजुटता और आक्रामकता से पुलिस-प्रशासन को भी बैकफुट पर जाना पड़ा। आखिरकार तमाम उठापटक के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर रालोद की ममता जयकिशोर काबिज हो गई।
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जयंत के अध्यक्ष बनने पर बढ़ने लगा कुनबा
विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। हाल ही में जयंत चौधरी के रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं। इसके बाद से ही दूसरे दल छोड़कर रालोद में शामिल होने वालों की संख्या में तेजी आई है। यह भी पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत है। माना जा रहा है कि किसान आंदोलन के बाद से रालोद के बढ़ते जनाधार के मद्देनजर कई जिलों में स्थापित नेताओं ने रालोद का रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि रालोद का कुनबा लगातार बढ़ रहा है।
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भाजपा के लिए चिंता का सबब
किसान आंदोलन भाजपा के लिए चिंता का सबब बना है। जिला पंचायत चुनाव के नतीजों ने पार्टी को इसका अहसास हो गया। पार्टी के 20 सदस्यों में से महज चार ही जीत दर्ज कर पाए। ज्यादातर प्रत्याशियों की हार किसान आंदोलन को ही माना जा रहा है। किसान आंदोलन का असर विधानसभा चुनावों पर कितना पड़ेगा, अभी इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। फिर भी माना जा रहा है कि आने वाले चुनाव भाजपा की कड़ी अग्नि परीक्षा साबित होंगे। ऐसे में भाजपा के रणनीतिकारों को विधानसभा चुनावों के लिए अलग रणनीति पर विचार करना होगा।

निश्चित रूप से किसान आंदोलन से रालोद का जनाधार काफी बढ़ा है। जयंत चौधरी के नेतृत्व में पार्टी के नेताओं ने किसानों के बीच जाकर उन्हें कृषि कानूनों की खामियां बताईं। भाजपा सरकार से सभी वर्गों का मोह भंग हो चुका है। जिला पंचायत चुनाव में भाजपा ने जिस तरह सत्ता का दुरुपयोग किया है, वह शर्मनाक है। आने वाले विधानसभा चुनाव में रालोद का प्रदर्शन अभूतपूर्व रहेगा और भाजपा को मुंह की खानी पड़ेगी। - यशवीर सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष रालोद।
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