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ओपन जिम लगवाने में अफसरों ने बनाई अपनी जेब की सेहत
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बागपत के सिसाना गांव में लगाया गया ओपन जिम
- फोटो : BAGHPAT
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- 10 माह पूर्व शुरू हुई थी जनपद के गांवों में ओपन जिम लगाने की शुरूआत
- 100 गांवों में अभी तक लगाए गए ओपन जिम, एक जिम का खर्चा 1.90 लाख रुपये तक
- 01 लाख रुपये से ज्यादा के बजट के काम की निविदा प्रकाशित कराना जरूरी
- 01 ही फर्म से बिना निविदा जारी किए ओपन जिम बनवाकर किया जा रहा भुगतान
- सामान की मूल कीमत से ज्यादा का भुगतान किया जा रहा, सीडीओ ने खुद कहा कि गोलमाल हो रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। गांवों में हो रहे विकास कार्यों में गबन नहीं रुक रहा है। अब ओपन जिम लगवाने में गबन किए जाने का मामला सामने आया है। एक ही फर्म से बिना निविदा जारी किए जिम तैयार कराकर भुगतान किया जा रहा है। यहीं नहीं, सामान की मूल कीमत से ज्यादा का भुगतान किया गया। एक लाख रुपय से ज्यादा के बजट की निविदा प्रकाशित करने के नियम की भी धज्जियां उड़ाई गई है। सीडीओ ने खुद ही ओपन जिम लगवाने में गोलमाल किए जाने की बात कही है। इस संबंध में पत्र भी जारी कर दिया है।
जनपद के गांवों में करीब दस महीने पहले ओपन जिम लगवाने की शुरूआत की गई थी। इन ओपन जिम को कुछ गांवों में खेल मैदान में लगवाया गया था जबकि जहां खेल मैदान के लिए जगह नहीं है वहां सरकारी जगह में लगवाया गया है। अभी तक करीब 100 गांवों में ओपन जिम लग चुके है और उनका भुगतान करना भी शुरू कर दिया गया है। ओपन जिम में पांच मशीनें लगाई जा रही है, जिनका भुगतान 1.90 लाख से दो लाख रुपये तक किया जा रहा है। इसमें सीडीओ रंजीत सिंह ने गोलमाल होने की बात कहते हुए पांच मार्च को पत्र जारी कर दिया।
सीडीओ ने बताया कि एक ही फर्म से सभी जगह जिम का सामान लगवाकर नियम विरुद्ध भुगतान किया जा रहा है। एक लाख रुपये से अधिक का सामान खरीदने के लिए निविदा जारी करके प्रकाशित कराना होता है। निविदा को प्रकाशित भी नहीं कराया गया। सामान का भुगतान मूल कीमत से ज्यादा किया जा रहा है। इस तरह से लाखों रुपये का गोलमाल अभी तक होने की बात कही जा रही है। इसकी जांच होने के बाद स्थिति साफ होगी।
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पांच महीने पहले पत्र जारी करके खुद भूल गए सीडीओ
सीडीओ रंजीत सिंह ने पांच महीने पहले एक पत्र जारी किया था। इसमें कहा गया था कि ओपन जिम का सामान ऐसी कंपनी से खरीदा जाए, जो सभी नियमों को पूरा करती हो। इस पत्र के जारी करने के बाद ही अधिकतर गांवों में जिम लगे है। मगर, इसका किसी भी तरह पालन नहीं किया गया। अब दोबारा इस पत्र के अनुसार किए गए कार्यों का परखा जा रहा है।
वाटर कूलर और डस्टबिन की खरीद में भी इसी तरह हुआ था घोटाला
इसी तरह पहले वाटर कूलर और डस्टबिन की खरीद में घोटाला हो चुका है। गांवों में वाटर कूलर व डस्टबिन को मूल कीमत से कई गुना ज्यादा में खरीदा हुआ बताया गया और रुपये भी निकाल लिए गए। इसकी जांच शुरू हुई तो घोटाला सामने आ गया। उसे भी अधिकारी दबाए हुए है।
ओपन जिम को लेकर पंचायतीराज कार्यालय से कभी कोई पत्राचार किसी बीडीओ और ग्राम पंचायतों को नहीं हुआ है। इसलिए यह मेरी जानकारी में नहीं है कि किसी ने इसमें गड़बड़ी को लेकर पत्र जारी किया है। - अमित त्यागी, जिला पंचायतीराज अधिकारी।
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- 100 गांवों में अभी तक लगाए गए ओपन जिम, एक जिम का खर्चा 1.90 लाख रुपये तक
- 01 लाख रुपये से ज्यादा के बजट के काम की निविदा प्रकाशित कराना जरूरी
- 01 ही फर्म से बिना निविदा जारी किए ओपन जिम बनवाकर किया जा रहा भुगतान
- सामान की मूल कीमत से ज्यादा का भुगतान किया जा रहा, सीडीओ ने खुद कहा कि गोलमाल हो रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। गांवों में हो रहे विकास कार्यों में गबन नहीं रुक रहा है। अब ओपन जिम लगवाने में गबन किए जाने का मामला सामने आया है। एक ही फर्म से बिना निविदा जारी किए जिम तैयार कराकर भुगतान किया जा रहा है। यहीं नहीं, सामान की मूल कीमत से ज्यादा का भुगतान किया गया। एक लाख रुपय से ज्यादा के बजट की निविदा प्रकाशित करने के नियम की भी धज्जियां उड़ाई गई है। सीडीओ ने खुद ही ओपन जिम लगवाने में गोलमाल किए जाने की बात कही है। इस संबंध में पत्र भी जारी कर दिया है।
जनपद के गांवों में करीब दस महीने पहले ओपन जिम लगवाने की शुरूआत की गई थी। इन ओपन जिम को कुछ गांवों में खेल मैदान में लगवाया गया था जबकि जहां खेल मैदान के लिए जगह नहीं है वहां सरकारी जगह में लगवाया गया है। अभी तक करीब 100 गांवों में ओपन जिम लग चुके है और उनका भुगतान करना भी शुरू कर दिया गया है। ओपन जिम में पांच मशीनें लगाई जा रही है, जिनका भुगतान 1.90 लाख से दो लाख रुपये तक किया जा रहा है। इसमें सीडीओ रंजीत सिंह ने गोलमाल होने की बात कहते हुए पांच मार्च को पत्र जारी कर दिया।
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सीडीओ ने बताया कि एक ही फर्म से सभी जगह जिम का सामान लगवाकर नियम विरुद्ध भुगतान किया जा रहा है। एक लाख रुपये से अधिक का सामान खरीदने के लिए निविदा जारी करके प्रकाशित कराना होता है। निविदा को प्रकाशित भी नहीं कराया गया। सामान का भुगतान मूल कीमत से ज्यादा किया जा रहा है। इस तरह से लाखों रुपये का गोलमाल अभी तक होने की बात कही जा रही है। इसकी जांच होने के बाद स्थिति साफ होगी।
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पांच महीने पहले पत्र जारी करके खुद भूल गए सीडीओ
सीडीओ रंजीत सिंह ने पांच महीने पहले एक पत्र जारी किया था। इसमें कहा गया था कि ओपन जिम का सामान ऐसी कंपनी से खरीदा जाए, जो सभी नियमों को पूरा करती हो। इस पत्र के जारी करने के बाद ही अधिकतर गांवों में जिम लगे है। मगर, इसका किसी भी तरह पालन नहीं किया गया। अब दोबारा इस पत्र के अनुसार किए गए कार्यों का परखा जा रहा है।
वाटर कूलर और डस्टबिन की खरीद में भी इसी तरह हुआ था घोटाला
इसी तरह पहले वाटर कूलर और डस्टबिन की खरीद में घोटाला हो चुका है। गांवों में वाटर कूलर व डस्टबिन को मूल कीमत से कई गुना ज्यादा में खरीदा हुआ बताया गया और रुपये भी निकाल लिए गए। इसकी जांच शुरू हुई तो घोटाला सामने आ गया। उसे भी अधिकारी दबाए हुए है।
ओपन जिम को लेकर पंचायतीराज कार्यालय से कभी कोई पत्राचार किसी बीडीओ और ग्राम पंचायतों को नहीं हुआ है। इसलिए यह मेरी जानकारी में नहीं है कि किसी ने इसमें गड़बड़ी को लेकर पत्र जारी किया है। - अमित त्यागी, जिला पंचायतीराज अधिकारी।