{"_id":"6938819818ae7451b406e441","slug":"the-lakhshagriha-dargah-of-barnawa-from-the-mahabharata-period-is-on-the-governments-umeed-portal-baghpat-news-c-28-1-bag1001-143225-2025-12-10","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Baghpat: सरकार के उम्मीद पोर्टल पर लाक्षागृह को दरगाह दिखाए जाने पर आपत्ति, जबकि कोर्ट पहले ही कर चुका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Baghpat: सरकार के उम्मीद पोर्टल पर लाक्षागृह को दरगाह दिखाए जाने पर आपत्ति, जबकि कोर्ट पहले ही कर चुका खारिज
Wed, 10 Dec 2025 01:37 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Dec 2025 01:37 AM IST
सार
बागपत के बरनावा स्थित महाभारतकालीन लाक्षागृह को सरकार के उम्मीद पोर्टल पर दरगाह के रूप में दर्ज कर दिया गया है। जबकि 5 फरवरी 2024 को अदालत ने इसे लाक्षागृह मानते हुए दरगाह वाला दावा निरस्त कर दिया था। गुरुकुल प्रबंधन ने आपत्ति जताई है।
विज्ञापन
बरनावा लाक्षागृह सरकारी उम्मीद पोर्टल पर दरगाह की खबर से संबंधित फोटो। बरनावा स्थित लाक्षाग
विस्तार
महाभारतकालीन बरनावा का लाक्षागृह सरकार के उम्मीद पोर्टल पर दरगाह दर्ज कर दिया गया है, जबकि पांच फरवरी 2024 को न्यायालय ने इसे महाभारतकालीन लाक्षागृह मानते दरगाह बताने वाली याचिका को निरस्त कर दिया था। मुस्लिम पक्ष की अपील पर मामला दोबारा से न्यायालय में चल रहा है मगर पोर्टल पर लाक्षागृह को दरगाह दर्ज करने पर गुरुकुल के पदाधिकारियों ने आपत्ति जताई है।
विज्ञापन
बरनावा के रहने वाले मुकीम खान ने वर्ष 1970 में मेरठ की अदालत में वाद दायर किया था। इसमें लाक्षागृह गुरुकुल के संस्थापक ब्रह्मचारी कृष्णदत्त महाराज को प्रतिवादी बनाया गया था। याचिका में कहा गया था कि बरनावा में प्राचीन टीले पर खसरा संख्या 3377 की 36 बीघा 6 बिस्से 8 बिस्वांसी जमीन है। इसमें उन्होंने लाक्षागृह को दरगाह, बदरुद्दीन की मजार और कब्रिस्तान होने का दावा किया था।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: Meerut: सऊदी अरब से लौटा पति, पत्नी ने साथ जाने से किया इनकार, बोली- खूब कमाया; बताओ आखिर किस पर लुटाया?
विज्ञापन
वर्ष 1997 में बागपत के जिला बनने पर यह मुकदमा मेरठ से यहां के न्यायालय में ट्रांसफर हुआ था। हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों ने अपने दावे को सही साबित करने के लिए न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए। इस प्रकरण में सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम ने पांच फरवरी 2024 को प्राचीन टीले को लाक्षागृह माना और मुस्लिम पक्ष के दावे को खारिज कर दिया।
इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने जिला एवं सत्र न्यायालय में निर्णय के खिलाफ अपील दायर कराई, जिसकी सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय प्रथम में चल रही है। अब देशभर में वक्फ की सभी संपत्तियां सरकार के उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करने के आदेश दिए गए तो लाक्षागृह को दरगाह बताकर उसपर दर्ज कर दिया गया।
इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने जिला एवं सत्र न्यायालय में निर्णय के खिलाफ अपील दायर कराई, जिसकी सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय प्रथम में चल रही है। अब देशभर में वक्फ की सभी संपत्तियां सरकार के उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करने के आदेश दिए गए तो लाक्षागृह को दरगाह बताकर उसपर दर्ज कर दिया गया।