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किसान आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा बागपत

Fri, 19 Nov 2021 10:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Nov 2021 10:51 PM IST
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The farmer of Baghpat stood firmly in the movement
आंदोलन शुरू होने पर तुरंत दिल्ली के बॉर्डर पर पहुंच गए थे बागपत के किसान, सडक़ों पर भी उतरे
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जिले से खाना, दूध समेत अन्य जरूरी सामग्री भी लेकर दिल्ली के बॉर्डर पर लगातार जाते रहे किसान
आंदोलन खत्म होता देख गाजीपुर बॉर्डर सबसे पहले पहुंचे थे बागपत के किसान, कई मुकदमे भी हुए
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। एक साल से चल रहे किसान आंदोलन में बागपत के किसान कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। जब आंदोलन के लिए दिल्ली बॉर्डर पर पहुंचने की घोषणा हुई तो यहां से किसान तुंरत ही पहुंच गए। यहां कई बार किसान सडक़ों पर उतरे। पंचायत भी की गई। आंदोलनकारियों के लिए खाना व दूध के अतिरिक्त अन्य सामग्री तक पहुंचाईं। यहां के कई किसानों पर 26 जनवरी को दिल्ली में मुकदमे भी हुए। इसके बाद भी बागपत के किसान पीछे नहीं हटे। अब सरकार ने किसानों की हिम्मत को देखते हुए कानून वापसी की घोषणा कर दी।
दिल्ली के बॉर्डरों पर 27 नवंबर 2020 को आंदोलन शुरू करने की घोषणा हुई तो बागपत से करीब 100 ट्रैक्टर-ट्रॉली में भाकियू नेता व किसान वहां पहुंच गए। यहां के किसानों ने बॉर्डर पर डेरा डाल दिया। इसके बाद से लगातार डटे रहे। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कभी जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन तो कभी चक्का जाम कर आंदोलन को धार दी। यहां किसानों ने दो बार ट्रेन भी रोकी और उनकी पुलिस से काफी खींचतान भी हुई, लेकिन किसान पीछे नहीं हटे। भाकियू के जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह गुर्जर बताते हैं कि 27 जनवरी को जब आंदोलन खत्म होने की कगार पर था। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने दोबारा बॉर्डर पर पहुंचने की अपील की तो बागपत के किसान ही सबसे पहले वहां पहुंचे थे। उनकी एक आवाज पर हजारों किसान यहां से रात में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर गाजीपुर बॉर्डर पहुंच गए थे। इस तरह आंदोलन में बागपत के किसान हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे और कृषि कानून वापसी में बागपत के किसानों का योगदान भी शामिल है।
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रसद जारी रखी, मुकदमे भी हुए
भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर ने बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद से लगातार खाना, दूध व अन्य खाद्य सामग्री यहां से किसान बॉर्डर पर आपूर्ति करते रहे। जब तक आंदोलन जारी रहेगा, ऐसे ही खाद्य सामग्री लेकर जाते रहेंगे। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी पर दिल्ली में बवाल के बाद कुछ किसानों पर झूठे मुकदमें भी दर्ज किए गए थे। इसके बाद भी किसान नहीं डरे और आंदोलन में शामिल रहे।
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