बागपत। नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की तस्करी के आरोपियों की जमानत अर्जी एडीजे चुतुर्थ सुशील कुमार की कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दी। इससे पहले जमानत अर्जी पर तीन बार सुनवाई टल चुकी थी। दो आरोपी इस मामले में अभी फरार हैं।
बागपत पुलिस को शहर के राष्ट्र वंदना चौक पर एक्सयूवी गाड़ी में गत 19 मई को 60 इंजेक्शन रेमडेसिविर मिले थे। कार से आरोपी मनमोहन व उसका बेटा मुकुंद निवासी गांधी कॉलोनी, नई मंडी मुजफ्फरनगर व बिशन निवासी सलेमपुर चौक रानीपुर हरिद्वार को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने 20 मई को तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया था। उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। वहीं, दूसरी तरफ लखनऊ लैब में इंजेक्शनों के आठ नमूनों को जांच के लिए भेजा गया था। लैब रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि इंजेक्शन नकली हैं। मुकदमे में नकली इंजेक्शन सप्लाई करने की धारा की बढ़ोतरी की जा चुकी है। पुलिस केस की विवेचना कर रही है। वहीं, आरोपी मनमोहन व मुकुंद की जमानत के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की गई थी। चार, 14 और 16 जून को जमानत अर्जी पर सुनवाई टल गई थी। एडीजीसी अनुज ढाका ने बताया कि आरोपियों की जमानत का हमने मजबूती से विरोध किया। एडीजे-4 सुशील कुमार ने सुनवाई के बाद आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इस मामले में आरोपी विशाल निवासी मुजफ्फरनगर और पंजाब निवासी सुखपाल अभी फरार हैं।