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मुआवजे की मिठास रिश्तों में डाल रही खटास
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बागपत। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए करीब दो साल पहले जमीन का अधिग्रहण किया गया तो यहां विकास की उम्मीद और मुआवजे को लेकर किसान उत्साहित थे। मगर अब वही मुआवजा यहां रिश्तों में खटास डाल रहा है। मुआवजा पूरा अकेले ही लेने की चाहत में बेटा ही बाप का दुश्मन बन गया, तो परिवार के लोग आपस में भिड़ रहे हैं।
इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण की गई जमीन से जुड़े किसानों के बीच चल रहे विवाद के 200 से ज्यादा मामले प्रशासन के पास पहुंच चुके हैं। इनमें 39 मामले ऐसे हैं, जिनमें अधिकतर परिवार के लोगों से विवाद है। इन परिवारों ने जमीन का मौखिक तौर पर पहले बंटवारा कर लिया था और उस पर कब्जा लेकर खेती कर रहे हैं। अब जमीन का अधिग्रहण होने से मुआवजा मिलने का समय आया तो राजस्व रिकार्ड में अपना भी नाम होने की बात कहकर मुआवजे के लिए दावा कर दिया। इसलिए ही परिवारों में विवाद शुरू हो गया है। संवाद
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मुआवजा पूरा लेने के लिए पिता का दुश्मन बन गया बेटा
केस एक : गांगनौली गांव के लहरी की जमीन का दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण किया गया था। लहरी के तीन बेटे हैं और इनमें से एक बेटे ब्रह्मपाल ने पूरा मुआवजा खुद लेने के लिए जमीन अपने नाम कराने के लिए पिता लहरी पर दबाव बनाया। इसके लिए इंकार करने पर लहरी की गर्दन पर बेटे ब्रह्मपाल ने चाकू से हमला कर दिया। इसमें मुकदमा दर्ज कराया गया और मुआवजा अकेले लेने की चाहत में ब्रह्मपाल जेल चला गया।
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- परिवार में हुआ मन मुटाव
केस दो : अग्रवाल मंडी टटीरी के रामचंदर के दो अन्य भाई हैं। इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया, वह बंटवारे में रामचंदर के हिस्से में आई थी। उस पर रामचंदर काफी साल से कब्जा लेकर खेती कर रहा है, लेकिन राजस्व रिकार्ड में तीनों भाईयों के नाम हैं और अब मुआवजे के लिए अन्य दोनों भाई भी आगे आ गए। इसलिए भाइयों में विवाद शुरू हो गया है।
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बागपत के 32 गांवों के 5268 किसानों की जमीन गई
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बागपत के 32 गांवों के 5286 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हुआ है। किसानों को जमीन का 824 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जाना है। इसमें से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जा चुका है।
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शामली, मुजफ्फरनगर व सहारनपुर में भी ऐसे विवाद
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए केवल बागपत ही नहीं, बल्कि शामली, मुजफ्फरनगर व सहारनपुर के किसानों की जमीन का भी अधिग्रहण हुआ है। इन तीनों जिलों के करीब 55 गांव की एक हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण किया गया। वहां भी मुआवजे को लेकर किसानों में आपसी विवाद हो रहे हैं।
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जमीन का पहले आपसी बंटवारा कर लिया गया था और उस पर कब्जा करके एक भाई खेती कर रहा है तो अब मुआवजे के लिए दूसरा भाई भी खड़ा हो गया। इस तरह के काफी मामले आए हैं, लेकिन ऐसे मामले में जांच कराने व कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद ही मुआवजा दिया जाता है। अगर विवाद बढ़ता है तो मुआवजा रोक दिया जाएगा। - अमित कुमार, एडीएम
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इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण की गई जमीन से जुड़े किसानों के बीच चल रहे विवाद के 200 से ज्यादा मामले प्रशासन के पास पहुंच चुके हैं। इनमें 39 मामले ऐसे हैं, जिनमें अधिकतर परिवार के लोगों से विवाद है। इन परिवारों ने जमीन का मौखिक तौर पर पहले बंटवारा कर लिया था और उस पर कब्जा लेकर खेती कर रहे हैं। अब जमीन का अधिग्रहण होने से मुआवजा मिलने का समय आया तो राजस्व रिकार्ड में अपना भी नाम होने की बात कहकर मुआवजे के लिए दावा कर दिया। इसलिए ही परिवारों में विवाद शुरू हो गया है। संवाद
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मुआवजा पूरा लेने के लिए पिता का दुश्मन बन गया बेटा
केस एक : गांगनौली गांव के लहरी की जमीन का दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण किया गया था। लहरी के तीन बेटे हैं और इनमें से एक बेटे ब्रह्मपाल ने पूरा मुआवजा खुद लेने के लिए जमीन अपने नाम कराने के लिए पिता लहरी पर दबाव बनाया। इसके लिए इंकार करने पर लहरी की गर्दन पर बेटे ब्रह्मपाल ने चाकू से हमला कर दिया। इसमें मुकदमा दर्ज कराया गया और मुआवजा अकेले लेने की चाहत में ब्रह्मपाल जेल चला गया।
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- परिवार में हुआ मन मुटाव
केस दो : अग्रवाल मंडी टटीरी के रामचंदर के दो अन्य भाई हैं। इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया, वह बंटवारे में रामचंदर के हिस्से में आई थी। उस पर रामचंदर काफी साल से कब्जा लेकर खेती कर रहा है, लेकिन राजस्व रिकार्ड में तीनों भाईयों के नाम हैं और अब मुआवजे के लिए अन्य दोनों भाई भी आगे आ गए। इसलिए भाइयों में विवाद शुरू हो गया है।
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बागपत के 32 गांवों के 5268 किसानों की जमीन गई
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बागपत के 32 गांवों के 5286 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हुआ है। किसानों को जमीन का 824 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जाना है। इसमें से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जा चुका है।
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शामली, मुजफ्फरनगर व सहारनपुर में भी ऐसे विवाद
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए केवल बागपत ही नहीं, बल्कि शामली, मुजफ्फरनगर व सहारनपुर के किसानों की जमीन का भी अधिग्रहण हुआ है। इन तीनों जिलों के करीब 55 गांव की एक हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण किया गया। वहां भी मुआवजे को लेकर किसानों में आपसी विवाद हो रहे हैं।
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जमीन का पहले आपसी बंटवारा कर लिया गया था और उस पर कब्जा करके एक भाई खेती कर रहा है तो अब मुआवजे के लिए दूसरा भाई भी खड़ा हो गया। इस तरह के काफी मामले आए हैं, लेकिन ऐसे मामले में जांच कराने व कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद ही मुआवजा दिया जाता है। अगर विवाद बढ़ता है तो मुआवजा रोक दिया जाएगा। - अमित कुमार, एडीएम