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पिलाना को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाना है
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बागपत। जिला मुख्यालय से 18 किमी दूर पिलाना गांव की आबादी करीब 10 हजार है। हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में संजय त्यागी दूसरी बार ग्राम प्रधान चुने गए हैं। गांव के विकास की रूपरेखा उन्होंने तैयार कर ली है। उस पर काम भी शुरू कर दिया है। संजय त्यागी का कहना है कि गांव को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाना ही उनका लक्ष्य है। गांव में लंबे समय तक उनके परिजन प्रधान पद पर रहे हैं। वर्ष 1949 से 1972 तक उनके दादा मुंशीलाल पहलवान ग्राम प्रधान रहे। इसके बाद वर्ष 1980 तक ताऊ ओमप्रकाश त्यागी ने यह पद संभाला। वर्ष 2000 में चाची कुसुम त्यागी ने प्रधान पद की जिम्मेदारी संभाली। 2010 में संजय त्यागी खुद प्रधान बने थे। इस बार वह दोबारा इस पद पर काबिज हुए हैं। उनका कहना है कि ग्रामीणों की सभी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराएंगे।
ग्राम प्रधान का प्रोफाइल
नाम- संजय त्यागी
उम्र- 49 वर्ष
शिक्षा- हाईस्कूल
कार्य क्षेत्र- समाज सेवा
राजनीतिक इतिहास- दूसरी बार प्रधान बने, दादा, ताऊ, चाची कई वर्ष प्रधान रहे।
गांव की आबादी- 10 हजार
कुल मतदाता- 4784
कुल मतदान- 3683
वोट मिले- 1561
गांव की समस्याएं
- श्मशान व कब्रिस्तान की सफाई व चहारदीवारी
- तालाबों पर अतिक्रमण और सफाई
- गांव के कुछ इलाकों में जर्जर रास्ते
- पेयजल की समस्या
- टूटे नाली-खड़ंजे
ये हैं प्राथमिकताएं
- सड़कें, नाली, खड़ंजों का निर्माण कराना।
- पात्रों को पेंशन और बेरोजगारों को मनरेगा में रोजगार दिलाना
- सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि कराना
- इंटर कॉलेज के खेल के मैदान को दुरुस्त कराना
- स्कूलों में विकास कार्य और शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाना
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ग्राम प्रधान का प्रोफाइल
नाम- संजय त्यागी
उम्र- 49 वर्ष
शिक्षा- हाईस्कूल
कार्य क्षेत्र- समाज सेवा
राजनीतिक इतिहास- दूसरी बार प्रधान बने, दादा, ताऊ, चाची कई वर्ष प्रधान रहे।
गांव की आबादी- 10 हजार
कुल मतदाता- 4784
कुल मतदान- 3683
वोट मिले- 1561
गांव की समस्याएं
- श्मशान व कब्रिस्तान की सफाई व चहारदीवारी
- तालाबों पर अतिक्रमण और सफाई
- गांव के कुछ इलाकों में जर्जर रास्ते
- पेयजल की समस्या
- टूटे नाली-खड़ंजे
ये हैं प्राथमिकताएं
- सड़कें, नाली, खड़ंजों का निर्माण कराना।
- पात्रों को पेंशन और बेरोजगारों को मनरेगा में रोजगार दिलाना
- सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि कराना
- इंटर कॉलेज के खेल के मैदान को दुरुस्त कराना
- स्कूलों में विकास कार्य और शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाना